
श्रावण मास की शुरुआत से पहले ही राजधानी पटना का प्रसिद्ध महावीर मंदिर शिवभक्ति के रंग में रंगने लगा है। देवघर जाने वाले डाक बमों की बड़ी संख्या मंदिर पहुंच रही है। भगवा वस्त्र धारण किए कांवरिए “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ महावीर मंदिर में हनुमान जी का आशीर्वाद लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हो रहे हैं।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
महावीर मंदिर में बढ़ी डाक बमों की आवाजाही
श्रावण मास के आगमन के साथ ही महावीर मंदिर में डाक बमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में कांवरिए मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं और इसके बाद देवघर के लिए अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं।
मंदिर परिसर में सुबह से ही शिवभक्ति का माहौल बना हुआ है और श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बढ़ रही है।
रुद्राभिषेक के अधिकांश स्लॉट पहले ही हुए बुक
महावीर मंदिर प्रशासन के अनुसार इस बार रुद्राभिषेक को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। सावन शुरू होने से पहले ही अधिकांश स्लॉट भर चुके हैं।
30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलने वाले श्रावण मास के लिए अब तक करीब 1100 रुद्राभिषेक की बुकिंग हो चुकी है। बुकिंग की प्रक्रिया 30 मई से शुरू कर दी गई थी।
चार शिवालयों में प्रतिदिन होंगे 56 रुद्राभिषेक
महावीर मंदिर के जनसंपर्क पदाधिकारी अजय कुमार ने बताया कि मंदिर परिसर के चार शिवालयों में विशेष व्यवस्था की गई है।
तीन शिवालयों में सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक लगातार रुद्राभिषेक कराया जाएगा, जबकि चौथे शिवालय में दोपहर 12 बजे से रुद्राभिषेक शुरू होगा। यह शिवलिंग मंदिर के पीछे स्थित पुराने गर्भगृह परिसर में है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन कुल 56 रुद्राभिषेक कराए जाएंगे।
रुद्राभिषेक शुल्क की जानकारी
श्रावण मास के सोमवार को रुद्राभिषेक कराने के लिए ₹3100 शुल्क निर्धारित किया गया है। अन्य दिनों में यह शुल्क ₹2500 रहेगा।
जो श्रद्धालु तीन घंटे का विस्तृत रुद्राभिषेक कराना चाहते हैं, उनके लिए ₹7100 शुल्क निर्धारित किया गया है। सामान्य रुद्राभिषेक की अवधि लगभग 45 मिनट होगी।
सोमवारी के लिए विशेष भीड़ प्रबंधन योजना
श्रावण की सोमवारी पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने विशेष भीड़ प्रबंधन योजना तैयार की है।
यदि जलाभिषेक के लिए लंबी कतार लगती है तो महावीर मंदिर के पिछले हिस्से से बैरिकेडिंग कर अलग मार्ग बनाया जाएगा, जिससे दर्शन और जलाभिषेक दोनों व्यवस्थित तरीके से कराए जा सकें।
मंदिर की अपनी सुरक्षा व्यवस्था के अलावा कोतवाली थाना के अधीन संचालित स्थायी टीओपी भी पूरी तरह सक्रिय रहेगा।
डाक बमों का होगा विशेष स्वागत
महावीर मंदिर में देवघर जाने वाले प्रत्येक डाक बम दल का पीतांबरी वस्त्र पहनाकर स्वागत किया जाएगा।
श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेयजल, शरबत, विश्राम और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है। पटना जंक्शन से देवघर जाने वाले यात्रियों के लिए भी मंदिर परिसर में विशेष सेवा केंद्र संचालित किए जाएंगे।
श्रावण मास का धार्मिक महत्व
महावीर मंदिर के पुजारी सत्येंद्र पांडे के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव को जल के साथ बेलपत्र, धतूरा, भांग, कच्चा दूध, गंगाजल, शहद, दही, चंदन और अक्षत अर्पित किए जाते हैं।
समुद्र मंथन से जुड़ी है जलाभिषेक की परंपरा
पुजारी के अनुसार समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने विष का पान किया था। उनके शरीर की तपिश शांत करने के लिए देवताओं ने जल अर्पित किया था। तभी से जलाभिषेक की परंपरा चली आ रही है।
बेलपत्र को भगवान शिव के त्रिनेत्र और त्रिगुण का प्रतीक माना जाता है, जबकि धतूरा और भांग उनके औघड़ स्वरूप से जुड़े माने जाते हैं। कच्चा दूध शीतलता और पवित्रता का प्रतीक है तथा गंगाजल को मोक्षदायिनी माना गया है।
सावन की सोमवारी का विशेष महत्व
पुजारी सत्येंद्र पांडे ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। इसी कारण सावन की सोमवारी का विशेष महत्व माना जाता है।
इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित युवतियां मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए भगवान शिव की पूजा करती हैं। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप और प्रदोष काल में शिव पूजा को विशेष फलदायी माना गया है।
शिवभक्ति के रंग में रंगेगी राजधानी पटना
महावीर मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में राजधानी पटना पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंग जाएगी। एक ओर कांवरियों के कदम देवघर की ओर बढ़ेंगे तो दूसरी ओर महावीर मंदिर में “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष गूंजते रहेंगे।
मंदिर प्रशासन का दावा है कि इस बार श्रद्धालुओं को दर्शन, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली गई हैं।


