
पटना: बिहार सरकार तेजी से बढ़ते शहरीकरण और भविष्य की आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य में 12 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य बड़े शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करना, आधुनिक आवासीय और व्यावसायिक केंद्र विकसित करना तथा योजनाबद्ध शहरी विस्तार सुनिश्चित करना है।
पहले चरण में पाटलिपुत्र और हरिहरनाथपुरम पर फोकस
योजना के पहले चरण में पटना के आसपास पाटलिपुत्र और हरिहरनाथपुरम सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएंगी। प्रस्ताव के अनुसार पाटलिपुत्र में 3,008 एकड़ और हरिहरनाथपुरम में 2,000 एकड़ कोर डेवलपमेंट एरिया विकसित किया जाएगा। इन दोनों परियोजनाओं को राजधानी के भविष्य के विस्तार का आधार माना जा रहा है।
सोशल इंपैक्ट एसेसमेंट शुरू
भूमि अधिग्रहण से पहले सरकार ने सोशल इंपैक्ट एसेसमेंट (SIA) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सर्वे के जरिए यह आकलन किया जाएगा कि परियोजना का स्थानीय लोगों की आजीविका, कृषि, सामाजिक ढांचे और संसाधनों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। रिपोर्ट आने के बाद ही भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी।
प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की होगी व्यवस्था
नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि परियोजना से प्रभावित परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। सोशल इंपैक्ट एसेसमेंट की रिपोर्ट के आधार पर पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की विस्तृत योजना तैयार की जाएगी और पूरी प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम-2013 के प्रावधानों के अनुरूप होगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे नए शहर
सरकार की योजना इन टाउनशिप को सिर्फ आवासीय कॉलोनियों के रूप में नहीं, बल्कि इंटीग्रेटेड अर्बन सिटी के रूप में विकसित करने की है। यहां चौड़ी सड़कें, भूमिगत ड्रेनेज, निर्बाध बिजली, पेयजल, सीवरेज, पार्क, स्कूल, अस्पताल, व्यावसायिक केंद्र, सार्वजनिक परिवहन और हरित क्षेत्र जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
पटना के भविष्य का नया विस्तार
पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप का प्रभाव क्षेत्र करीब 81,730 एकड़ होगा। यह पटना आउटर रिंग रोड और प्रस्तावित मेट्रो नेटवर्क के नजदीक होने के कारण भविष्य में राजधानी का प्रमुख शहरी केंद्र बन सकता है।
वहीं हरिहरनाथपुरम टाउनशिप का प्रभाव क्षेत्र लगभग 33,000 एकड़ होगा। यह क्षेत्र सोनपुर-हाजीपुर कॉरिडोर, भारतमाला परियोजना और प्रस्तावित सड़क नेटवर्क से जुड़ा होने के कारण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसानों को मुआवजे के साथ विकसित प्लॉट भी
सरकार प्रभावित भू-स्वामियों के लिए विशेष व्यवस्था पर भी काम कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जिन किसानों या जमीन मालिकों की भूमि अधिग्रहित होगी, उन्हें मुआवजे के साथ विकसित क्षेत्र में नियमानुसार प्लॉट देने का भी प्रस्ताव है, ताकि वे भविष्य में विकसित होने वाले शहर का हिस्सा बन सकें और उनकी संपत्ति का मूल्य भी बढ़े।
निजी निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार सड़क, जलापूर्ति, बिजली, सीवरेज और अन्य आधारभूत ढांचे के विकास के लिए चरणबद्ध निवेश की योजना बना रही है। परियोजना को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि भविष्य में निजी निवेश भी आकर्षित हो और बिहार में आधुनिक शहरी विकास को नई गति मिल सके।
फिलहाल सरकार पहले चरण के सोशल सर्वे पर जोर दे रही है। इसके पूरा होने के बाद भूमि अधिग्रहण और दोनों सैटेलाइट टाउनशिप के विकास कार्यों की दिशा तय की जाएगी।


