
पटना, 25 जुलाई 2026: बिहार सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर पटना स्थित बीआईटी मेसरा परिसर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में राज्य के विकास को लेकर सरकार की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मौके पर कहा कि सरकार बिहार की जनता की है और सरकार में बैठे लोग जनता के सेवक के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीते 100 दिनों में लिए गए निर्णयों का मुख्य उद्देश्य जनहित, सुशासन और राज्य के समग्र विकास को गति देना रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, निवेश, रोजगार और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों पर एक साथ काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और बिहार को समृद्ध राज्य बनाने के लक्ष्य के अनुरूप सरकार आगे बढ़ रही है। उन्होंने 100 दिन के कार्यकाल को जनता की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए राज्यवासियों के प्रति आभार जताया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों से जुड़ी कुल 11,464 करोड़ रुपये की लागत वाली 2,476 विकास योजनाओं का रिमोट के माध्यम से उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, पेयजल, उद्योग और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज होगी और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
100 दिनों में जनता से सीधे संवाद पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पद संभालने के शुरुआती दिनों में उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और सुझावों को समझने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद लगभग 15 दिनों के भीतर करीब 11 हजार लोगों से संवाद करने का अवसर मिला। इस दौरान आम लोगों की समस्याओं को नजदीक से समझने और उनके समाधान की दिशा में काम करने का मौका मिला।
उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर सुनने और उनका समाधान करने के लिए राज्य के सभी 534 प्रखंडों में सहयोग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में अब तक करीब 7 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से लगभग 90 प्रतिशत मामलों का निपटारा किए जाने की बात कही गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन मामलों का प्रखंड स्तर पर समाधान हो जाता है, लेकिन आवेदक निर्णय से संतुष्ट नहीं होते, उनके लिए राज्य स्तर पर भी सुनवाई की व्यवस्था की गई है। इसके तहत प्रत्येक महीने के दूसरे मंगलवार को पटना में राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम के माध्यम से मामलों की समीक्षा और सुनवाई की जाती है।
शिक्षा के क्षेत्र में बड़े विस्तार की तैयारी
कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा के विस्तार के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद लंबे समय तक राज्य में डिग्री कॉलेजों की संख्या सीमित रही, लेकिन हाल के समय में एक साथ 211 नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत की गई है।
इसके अलावा 551 स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाया गया है। सरकार का लक्ष्य विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर शिक्षण व्यवस्था और तकनीक आधारित शिक्षा का वातावरण उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल शिक्षा और आधुनिक तकनीक को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी नए संस्थानों की स्थापना की योजना है। विक्रमशिला विश्वविद्यालय के विकास के लिए 220 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई। इसके अलावा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर एआई और कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय तथा शहीद जुब्बा सहनी के नाम पर आर्किटेक्चर एवं इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना बताई गई।
कर्पूरी ठाकुर संस्थान में अनुसंधान केंद्र विकसित करने की बात भी कही गई। सरकार का मानना है कि शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और अनुसंधान को मजबूत किए बिना बिहार को आधुनिक और आत्मनिर्भर राज्य बनाना संभव नहीं है।
उद्योग और निवेश को लेकर बड़े लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने राज्य में औद्योगिक विकास को तेज करने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक प्रमुख उद्योग स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। साथ ही 20 नवंबर तक बिहार में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने का लक्ष्य रखा गया है।
वैशाली जिले के राजापाकर में इंडस्ट्रीज और इलेक्ट्रॉनिक्स पार्क विकसित करने की योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बड़े निवेश के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। प्रस्तावित परियोजना में करीब 20 हजार से 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है और लगभग 1 लाख युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद व्यक्त की गई।
गया के इंटीग्रेटेड मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर परिसर में करीब 3,000 एकड़ क्षेत्र में डेडिकेटेड स्टील प्लांट हब विकसित करने की योजना भी सामने रखी गई। सरकार टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उद्योगों में निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।
कृषि आधारित उद्योगों को मिलेगी नई गति
कृषि क्षेत्र को उद्योग और रोजगार से जोड़ने के लिए भी सरकार ने योजनाएं सामने रखी हैं। मुख्यमंत्री ने अगले पांच वर्षों में बिहार में 25 नई चीनी मिलें शुरू करने का लक्ष्य बताया। इससे गन्ना किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार की ओर से कृषि में आधुनिक तकनीक और डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देने की बात भी कही गई। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक बनाने के लिए नई तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
इसके अलावा अभियान चलाकर एक करोड़ लोगों को राशन कार्ड से जोड़ने की योजना का भी उल्लेख किया गया। गंडक और कोसी नदी के किनारे कॉरिडोर विकसित करने तथा पटना में जीविका टावर बनाने की योजना भी सरकार की आगामी प्राथमिकताओं में शामिल बताई गई।
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए मेडिकल बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। सार्वजनिक और निजी भागीदारी के माध्यम से आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करने की योजना है, ताकि आम लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं आसानी से मिल सकें।
उन्होंने कहा कि 15 अगस्त के बाद जिला अस्पताल और अनुमंडल अस्पताल से गंभीर बीमारी के अभाव में होने वाले अनावश्यक रेफरल को रोकने की दिशा में व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को अधिक से अधिक उपचार उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विभिन्न पदों पर नियुक्त चिकित्सकों और फार्मासिस्टों को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए गए।
परिवहन और आधारभूत संरचना पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने बिहार में आधुनिक परिवहन व्यवस्था को विकसित करने की योजनाओं का भी उल्लेख किया। पटना में विकसित किए गए मरीन ड्राइव को राज्य के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए उन्होंने अगले तीन वर्षों में करीब 200 किलोमीटर मरीन ड्राइव विकसित करने की योजना की जानकारी दी। इससे बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई।
उन्होंने बताया कि राज्य में 12 टाउनशिप विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है। पटना एयरपोर्ट के विकास के साथ दरभंगा एयरपोर्ट को भी बेहतर बनाने की प्रक्रिया जारी है। सोनपुर में बड़े एयरपोर्ट के विकास और सुल्तानगंज में नए एयरपोर्ट की योजना का भी उल्लेख किया गया। इसके साथ ही हेली-टूरिज्म को बढ़ावा देने की बात कही गई।
डिजिटल गवर्नेंस और रोजगार पर विशेष ध्यान
सरकार ने एआई आधारित स्मार्ट गवर्नेंस को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग और माइक्रोसॉफ्ट के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। इसके अलावा डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और एचपीसीएल तथा आईओसीएल के बीच भी समझौता हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर तैयार करना है। उद्योगों में निवेश बढ़ने से रोजगार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में सरकार के 100 दिनों की उपलब्धियों पर आधारित पत्रिका और कॉफी टेबल बुक का लोकार्पण किया गया। विभिन्न विभागों की नीतियों पर आधारित पुस्तिकाओं का विमोचन भी हुआ। इस दौरान सरकार के 100 दिनों के कामकाज पर आधारित वीडियो फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक, विधान पार्षद और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार देश के सबसे युवा और संभावनाओं से भरे राज्यों में शामिल है। सरकार का लक्ष्य आशा, सपने और जनकल्याण के आधार पर राज्य के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता के सहयोग और विश्वास से समृद्ध बिहार का सपना साकार होगा और आने वाले वर्षों में राज्य निवेश, रोजगार, नवाचार और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।


