
पटना: बिहार सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर सख्त रुख अपनाते हुए इसे संगठित अपराध की श्रेणी में लाने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि इस संबंध में आवश्यक विधेयक विधानमंडल से पारित किया जा चुका है। सरकार का उद्देश्य पेपर लीक के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाना है।
वीडियो और CCTV फुटेज से होगी आरोपियों की पहचान
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के घटनाक्रमों की सरकार गंभीरता से जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि उपद्रव और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान वीडियो और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की जाएगी। दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होगी।
केंद्र सरकार भी गंभीर, जांच आगे बढ़ रही
विजय कुमार चौधरी ने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर केंद्र सरकार भी गंभीर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भी इस विषय का संज्ञान लिया है और जांच एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। सरकार चाहती है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों को शीघ्र न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा मिले।
हिंसा करने वालों को बताया असामाजिक तत्व
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने दावा किया कि हालिया प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वाले लोग वास्तविक छात्र नहीं थे, बल्कि ऐसे असामाजिक तत्व थे जिन्होंने छात्रों के बीच घुसकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया।
विधायकों पर हमले की निंदा
उन्होंने प्रदर्शन के दौरान जनप्रतिनिधियों पर हुए कथित हमलों की भी निंदा की और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह की घटनाएं स्वीकार नहीं की जा सकतीं। सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
नोट: इस समाचार में पेपर लीक, प्रदर्शन और हिंसा को लेकर किए गए दावे बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के सार्वजनिक बयान पर आधारित हैं।


