रेलवे के तकनीकी विषयों पर हिंदी लेखन को मिलेगा सम्मान, लाल बहादुर शास्त्री तकनीकी मौलिक लेखन पुरस्कार योजना के लिए आमंत्रित किए गए आवेदन

भारतीय रेलवे से जुड़े तकनीकी विषयों पर हिंदी में मौलिक लेखन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रेल मंत्रालय ने लाल बहादुर शास्त्री तकनीकी मौलिक लेखन पुरस्कार योजना के अंतर्गत प्रविष्टियां आमंत्रित की हैं। इस योजना का उद्देश्य रेलवे के तकनीकी ज्ञान को हिंदी भाषा के माध्यम से अधिक समृद्ध बनाना और ऐसे लेखकों को सम्मानित करना है, जो रेलवे संचालन, प्रबंधन और तकनीकी पहलुओं पर गुणवत्तापूर्ण एवं मौलिक पुस्तकें तैयार कर रहे हैं।

इस पुरस्कार योजना में वर्तमान रेलवे कर्मचारी, सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी और भारत के सभी नागरिक भाग ले सकते हैं। रेल मंत्रालय का मानना है कि तकनीकी विषयों पर हिंदी में बेहतर साहित्य उपलब्ध होने से न केवल ज्ञान का विस्तार होगा, बल्कि रेलवे क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को भी उपयोगी अध्ययन सामग्री प्राप्त होगी। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस योजना का संचालन किया जा रहा है।

पुरस्कार योजना के तहत चयनित पुस्तकों के लेखकों को नकद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले लेखक को बीस हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। द्वितीय स्थान पर चयनित लेखक को दस हजार रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले लेखक को सात हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इन पुरस्कारों का उद्देश्य केवल सम्मान देना ही नहीं, बल्कि हिंदी में तकनीकी लेखन को नई दिशा और प्रोत्साहन देना भी है।

इस योजना में वही पुस्तकें स्वीकार की जाएंगी जो पूरी तरह लेखक की स्वयं की मौलिक रचना हों। किसी अन्य पुस्तक, दस्तावेज, शोध सामग्री या इंटरनेट से ली गई सामग्री पर आधारित, अनूदित, संपादित, संकलित अथवा कॉपी की गई पुस्तकों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केवल मौलिक लेखन ही पुरस्कार के लिए पात्र माना जाएगा। यदि किसी पुस्तक में साहित्यिक चोरी या अन्य स्रोतों से सामग्री लेने की पुष्टि होती है, तो उसे प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाएगा।

पुरस्कार वर्ष के लिए निर्धारित अवधि भी तय की गई है। इस चक्र में केवल वही पुस्तकें मान्य होंगी जिनका लेखन या प्रकाशन एक जनवरी दो हजार तेईस से इकतीस दिसंबर दो हजार पच्चीस के बीच हुआ हो। इससे पहले या इसके बाद प्रकाशित अथवा लिखी गई पुस्तकें इस पुरस्कार योजना के लिए पात्र नहीं मानी जाएंगी।

रेलवे के तकनीकी विषयों पर हिंदी लेखन को मिलेगा सम्मान, लाल बहादुर शास्त्री तकनीकी मौलिक लेखन पुरस्कार योजना के लिए आमंत्रित किए गए आवेदन

रेल मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि चयनित पुस्तक के लेखक का कॉपीराइट पूरी तरह उसी के पास रहेगा। पुरस्कार मिलने के बाद भी पुस्तक के अधिकार लेखक के पास सुरक्षित रहेंगे। इससे लेखकों को अपने बौद्धिक अधिकारों की सुरक्षा के साथ सम्मान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

इस योजना में भाग लेने के लिए कुछ आवश्यक पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि पुस्तक का विषय रेलवे संचालन, रेलवे प्रबंधन या रेलवे के किसी तकनीकी क्षेत्र से सीधे जुड़ा होना चाहिए। सामान्य साहित्य, कहानी, कविता, संस्मरण या अन्य गैर-तकनीकी विषयों पर आधारित पुस्तकें इस योजना के अंतर्गत स्वीकार नहीं की जाएंगी।

इसके अलावा पुस्तक की न्यूनतम लंबाई भी निर्धारित की गई है। आवेदन के लिए भेजी जाने वाली पुस्तक कम से कम सौ पृष्ठों की होनी चाहिए। साथ ही पुस्तक में प्रयुक्त फॉन्ट का आकार बारह प्वाइंट से अधिक नहीं होना चाहिए। यह नियम सभी प्रतिभागियों पर समान रूप से लागू होगा।

रेल मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन पुस्तकों को पहले से भारत सरकार, किसी राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की ओर से पुरस्कार मिल चुका है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगी। इसका उद्देश्य नई और अप्रतिष्ठित मौलिक कृतियों को अवसर देना है।

एक अन्य महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि जो पुस्तक पहले कभी इसी पुरस्कार योजना के लिए भेजी जा चुकी है, उसे दोबारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए प्रतिभागियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे नई और पहली बार प्रस्तुत की जा रही पुस्तक ही आवेदन के साथ भेजें।

चयन प्रक्रिया के संबंध में रेल मंत्रालय ने बताया है कि सभी प्राप्त पुस्तकों का मूल्यांकन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाएगा। विषय की उपयोगिता, तकनीकी गुणवत्ता, भाषा की शुद्धता, मौलिकता और प्रस्तुति जैसे विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर विशेषज्ञों द्वारा चयन किया जाएगा। अंतिम निर्णय रेल मंत्रालय के रेलवे बोर्ड का होगा और वही सभी प्रतिभागियों पर अंतिम एवं बाध्यकारी माना जाएगा।

आवेदन प्रक्रिया भी स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है। इच्छुक लेखक अपनी पुस्तक या पांडुलिपि की दो मुद्रित अथवा टंकित प्रतियां निर्धारित घोषणा पत्र और आवश्यक जानकारी के साथ निर्धारित पते पर भेज सकते हैं। आवेदन निम्न पते पर भेजना होगा—

निदेशक, राजभाषा
कक्ष संख्या 376 (जी)
रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड)
रेल भवन, नई दिल्ली – 110001

प्रतिभागियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवेदन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न हों। यदि पुस्तक की दोनों प्रतियां, निर्धारित घोषणा पत्र या अन्य आवश्यक जानकारी अधूरी पाई जाती है, तो आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

रेल मंत्रालय ने आवेदन भेजने की अंतिम तिथि इकतीस अगस्त दो हजार छब्बीस निर्धारित की है। इस तिथि के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। इसलिए इच्छुक लेखक समय रहते अपनी पुस्तक और सभी आवश्यक दस्तावेज निर्धारित पते पर भेज दें।

रेलवे के तकनीकी क्षेत्र में हिंदी लेखन को बढ़ावा देने वाली यह योजना उन लेखकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो अपने अनुभव, शोध और तकनीकी ज्ञान को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं। इससे हिंदी में तकनीकी साहित्य का दायरा और मजबूत होगा तथा रेलवे से जुड़े विषयों पर गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी। यदि आपके पास रेलवे संचालन या प्रबंधन से संबंधित मौलिक हिंदी पुस्तक है और वह निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करती है, तो इस प्रतिष्ठित पुरस्कार योजना में भाग लेकर अपनी रचना को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है।

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