
नई दिल्ली: NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी राजनीतिक घमासान थमता नजर नहीं आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के ऐलान के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने साफ कहा है कि केवल नए कानूनी कदम पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पूरे मामले में राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
CJP ने प्रधानमंत्री के ऐलान का स्वागत करते हुए भी इसे अधूरा बताया और एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
“समस्या सजा नहीं, पेपर लीक रोकना है”
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि डेढ़ महीने से चल रहे आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री ने पहली बार इस मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है, लेकिन असली सवाल अभी भी अनुत्तरित है।
उन्होंने कहा, “पेपर लीक होने के बाद सजा देना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि पेपर लीक हो ही क्यों रहे हैं। अगर व्यवस्था जवाबदेह होती, तो ऐसी घटनाएं बार-बार नहीं होतीं।”
उन्होंने कहा कि “चोट लगने के बाद दवा लगाना अलग बात है, लेकिन असली जिम्मेदारी चोट लगने से रोकने की होती है। जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं देते, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”
‘सिर्फ कोर्ट नहीं, जवाबदेही भी तय हो’
CJP ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की पोस्ट साझा करते हुए कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन इससे पहले यह तय होना चाहिए कि पेपर लीक जैसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है।
पार्टी का कहना है कि लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है, इसलिए केवल कानूनी प्रक्रिया तेज करने से भरोसा वापस नहीं आएगा।
विपक्ष भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम
इस मुद्दे पर कांग्रेस भी लगातार केंद्र सरकार पर हमला बोल रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक ने करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और सरकार को इसकी राजनीतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार के सामने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, छात्रों से माफी और प्रदर्शन के दौरान हुई कथित कार्रवाई की जांच जैसी मांगें रखी हैं।
सरकार का रुख
केंद्र सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों को शीघ्र सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे।
हालांकि, विपक्ष और CJP का कहना है कि केवल नए कानून और घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। उनका आग्रह है कि पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय हो और जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और आंदोलनकारी पक्षों के बीच कोई सहमति बनती है या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर यह राजनीतिक टकराव और तेज होता है।


