
नई दिल्ली: NEET पेपर लीक विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के ऐलान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। प्रधानमंत्री ने युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए पेपर लीक के आरोपियों को कठोर सजा दिलाने का भरोसा दिया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे छात्रों की मूल मांगों से अलग बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP) और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) के नेताओं का कहना है कि छात्र केवल कड़ी कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
प्रियंका गांधी ने उठाए नेतृत्व और जवाबदेही के सवाल
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार छात्रों की असली मांगों को समझने में विफल रही है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यह ऐसा है जैसे कोई बच्चा डिजाइनर बनना चाहता हो और उसे इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला दिला दिया जाए। उनके मुताबिक छात्र जवाबदेही और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार किसी दूसरे मुद्दे पर जवाब दे रही है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार को नेतृत्व दिखाते हुए छात्रों की बात सुननी चाहिए और आवश्यक राजनीतिक निर्णय लेने चाहिए।
के.सी. वेणुगोपाल बोले- भरोसा खत्म हो चुका है
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि केवल ट्वीट और घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की बातों पर जनता का भरोसा कम हो गया है और यदि सरकार गंभीर है तो सबसे पहले शिक्षा मंत्री को पद से हटाना चाहिए।
सेलजा कुमारी ने उठाए लाठीचार्ज पर सवाल
कांग्रेस सांसद सेलजा कुमारी ने कहा कि सरकार ने भविष्य की घोषणाएं तो की हैं, लेकिन अब तक की घटनाओं पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी।
उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर न तो अफसोस जताया गया, न किसी मंत्री ने जिम्मेदारी ली और न ही विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का स्पष्ट जवाब दिया गया।
SP और RSP ने संसद में जवाब की मांग की
समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री युवाओं को संदेश देना चाहते थे तो उन्हें सोशल मीडिया के बजाय संसद में आकर देश के सामने अपनी बात रखनी चाहिए थी।
वहीं, RSP सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने कहा कि विपक्ष और छात्र केवल मामलों के त्वरित निपटारे की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि पूरे प्रकरण में राजनीतिक जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
क्या था प्रधानमंत्री का ऐलान?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, ताकि दोषियों को शीघ्र और कठोर सजा मिल सके। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की बात भी कही और दोहराया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद अब पेपर लीक विवाद केवल परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक जवाबदेही, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सरकार-विपक्ष के बीच टकराव का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।


