
पटना: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पत्रकारों से जुड़े मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी विधायकों ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों की कवरेज को लेकर सामने आए विवाद का मुद्दा उठाते हुए तत्काल समाधान की मांग की। विपक्ष का कहना था कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं और विधानसभा की कार्यवाही को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से जनता तक पहुंचाने के लिए उन्हें उचित माहौल मिलना चाहिए।
मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब विधानसभा में पत्रकारों की खबरों के बहिष्कार से जुड़ा मुद्दा भी सामने आया। विपक्षी नेताओं ने सदन में इस विषय को उठाते हुए कहा कि पत्रकारों और विधानसभा प्रशासन के बीच उत्पन्न विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से तत्काल हस्तक्षेप करने और दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कराने की मांग की।
पत्रकारों से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष ने उठाई आवाज
बुधवार को जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी विधायकों ने पत्रकारों से संबंधित विवाद को लेकर अपनी बात रखनी शुरू कर दी। विपक्ष का कहना था कि विधानसभा में पत्रकारों की रिपोर्टिंग और कवरेज को लेकर जो स्थिति बनी है, उससे मीडिया की स्वतंत्रता और कामकाज प्रभावित हो रहा है।
विपक्षी सदस्यों ने कहा कि पत्रकारों को विधानसभा की कार्यवाही और जनप्रतिनिधियों से जुड़े मुद्दों को जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभानी होती है। ऐसे में यदि उनके काम में किसी तरह की बाधा या पाबंदी आती है तो इसका असर सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ता है।
विपक्ष ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि विवाद को बढ़ाने के बजाय सभी पक्षों को एक साथ बैठकर समाधान निकालना चाहिए। उनका कहना था कि बातचीत के जरिए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे पत्रकारों को अपना काम करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
जेडीयू विधायक की शिकायत के बाद बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि यह विवाद जेडीयू विधायक विशाल साह की ओर से पत्रकारों के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत दिए जाने के बाद बढ़ा। इसके बाद पत्रकारों और विधानसभा प्रशासन के बीच स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई।
विवाद के बीच पत्रकारों की ओर से विधानसभा की खबरों के बहिष्कार का फैसला लिया गया। इसके चलते विधानसभा की कार्यवाही की सामान्य मीडिया कवरेज पर भी असर पड़ा। पत्रकारों के इस कदम के बाद विपक्षी दलों ने भी मामले को सदन में उठाते हुए विधानसभा अध्यक्ष से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।
विपक्षी विधायकों का कहना था कि पत्रकारों के साथ संवाद के माध्यम से मामले को सुलझाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और विधानसभा की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाने में पत्रकारों की अहम भूमिका रहती है।
विपक्ष ने दी सदन के बहिष्कार की चेतावनी
विपक्षी नेताओं ने विधानसभा में पत्रकारों से जुड़े मामले पर गंभीर रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो वे सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करने पर विचार कर सकते हैं।
विपक्ष का कहना था कि पत्रकारों को लेकर उत्पन्न विवाद का असर विधानसभा की कार्यवाही पर नहीं पड़ना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि विधानसभा अध्यक्ष की मौजूदगी में पत्रकारों और संबंधित पक्षों के बीच बातचीत हो और सभी शिकायतों का समाधान निकाला जाए।
विपक्षी विधायकों ने कहा कि वे इस मामले को राजनीतिक टकराव का विषय नहीं बनाना चाहते, बल्कि चाहते हैं कि पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने का अवसर मिले। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि इस मामले में जल्द से जल्द कोई रास्ता निकाला जाए।
स्पीकर प्रेम कुमार ने दिया समाधान का भरोसा
विपक्ष की मांगों को सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने मामले में समाधान का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर उनकी पत्रकारों से बातचीत हो चुकी है। विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार, मंगलवार को भी पत्रकारों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की गई थी और सभी पक्षों की चिंताओं को समझने का प्रयास किया जा रहा है।
स्पीकर ने कहा कि इस मामले का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जा सकता है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने दें।
विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी भरोसा दिलाया कि सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विवाद को लंबा खींचने के बजाय संवाद और आपसी सहमति के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जाना चाहिए।
दोपहर 12 बजे चर्चा का दिया गया समय
विपक्ष की मांगों के बीच विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए दोपहर 12 बजे का समय देने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय पर इस विषय को लेकर चर्चा की जा सकती है और संबंधित पक्ष अपनी बात रख सकते हैं।
स्पीकर के इस आश्वासन के बाद उम्मीद जगी कि पत्रकारों और विधानसभा प्रशासन के बीच चल रहे विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
विपक्षी विधायकों ने भी कहा कि वे चाहते हैं कि दोपहर की चर्चा में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले। उनका कहना था कि बातचीत के जरिए समाधान निकलने से विधानसभा की कार्यवाही भी सामान्य रूप से चल सकेगी और पत्रकार भी अपनी जिम्मेदारी निभा सकेंगे।
पत्रकारों के बहिष्कार का विधानसभा कवरेज पर असर
पत्रकारों की ओर से खबरों के बहिष्कार के फैसले का असर विधानसभा की मीडिया कवरेज पर भी दिखाई दिया। विधानसभा की कार्यवाही को नियमित रूप से कवर करने वाले पत्रकारों ने अपनी मांगों और नाराजगी को लेकर विरोध दर्ज कराया।
मीडिया कर्मियों का यह रुख सामने आने के बाद विपक्ष ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया। विपक्षी नेताओं का कहना था कि पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर संवाद होना जरूरी है। उनका मानना है कि विधानसभा की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाने के लिए मीडिया की स्वतंत्र और प्रभावी भूमिका महत्वपूर्ण है।
विपक्ष ने यह भी कहा कि किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में बातचीत का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए। यदि पत्रकारों को कोई शिकायत है तो उसे सुना जाना चाहिए और यदि विधानसभा या किसी जनप्रतिनिधि को मीडिया से कोई आपत्ति है तो उसका समाधान भी संवाद के जरिए किया जाना चाहिए।
विवाद के समाधान पर टिकी नजर
फिलहाल सभी की नजरें विधानसभा अध्यक्ष की ओर से तय दोपहर 12 बजे की चर्चा पर टिकी हैं। इस चर्चा में पत्रकारों से जुड़े विवाद को लेकर क्या समाधान निकलता है, यह देखने वाली बात होगी।
एक ओर विपक्ष इस मुद्दे पर तत्काल समाधान की मांग कर रहा है, वहीं विधानसभा अध्यक्ष ने बातचीत के जरिए विवाद को सुलझाने का भरोसा दिया है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद कोई सकारात्मक रास्ता निकल सकता है।
विधानसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच सहमति बनना जरूरी है। वहीं पत्रकारों की ओर से भी यह उम्मीद की जा रही है कि उनके काम से जुड़े मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
पूरे विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विधानसभा लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक प्रमुख संस्थान है और मीडिया जनता तथा जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में पत्रकारों, विधानसभा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय से ही इस तरह के विवादों का स्थायी समाधान संभव है।
अब यह देखना अहम होगा कि दोपहर 12 बजे होने वाली चर्चा में क्या निर्णय लिया जाता है और क्या पत्रकारों की कवरेज से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकल पाता है। यदि बातचीत सफल रहती है तो विधानसभा की मीडिया कवरेज फिर से सामान्य होने की संभावना है। वहीं, अगर विवाद का समाधान नहीं निकलता है, तो विपक्ष द्वारा सदन की कार्यवाही के बहिष्कार की चेतावनी आगे राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।


