बिहार विधानसभा में सात विधेयकों पर चर्चा से लेकर TRE-4 भर्ती तक, मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में क्या-क्या हुआ?

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर चर्चा और बहस से भरा रहा। सदन की कार्यवाही के दौरान सरकार की ओर से एक साथ सात महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए, जिनमें जुआ निषेध, जीएसटी, जमीन की दाखिल-खारिज, चिकित्सा व्यवस्था, नर्सों के पंजीकरण और कृषि भूमि से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।

इसके अलावा शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक भर्ती का मुद्दा भी सदन में प्रमुखता से उठा। डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को लेकर सवाल किए गए, जिसके बाद सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया को लेकर जानकारी दी गई। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने TRE-4 शिक्षक भर्ती को लेकर भी बड़ा ऐलान किया और अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति का लक्ष्य बताया।

वहीं, पंचायतों में टैक्स वसूली के मुद्दे पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष की ओर से गरीब परिवारों पर टैक्स का बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया गया, जबकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गरीबों पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया जा रहा है।

विधानसभा में एक साथ पेश किए गए सात विधेयक

मानसून सत्र के दूसरे दिन दोपहर बाद विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सरकार की ओर से सात महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किए गए। इन विधेयकों को अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कानूनों में बदलाव और नई व्यवस्था लागू करने के उद्देश्य से लाया गया है।

सदन में पेश किए गए विधेयकों में बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक 2026 भी शामिल है। इसके अलावा बिहार माल एवं सेवा कर संशोधन विधेयक, बिहार भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक, बिहार चीनी उपक्रम अर्जन संशोधन विधेयक, बिहार चिकित्सा संशोधन विधेयक और बिहार नर्सेस पंजीकरण संशोधन विधेयक भी पेश किए गए।

सातवां विधेयक बिहार कृषि भूमि को गैर कृषि प्रयोजन के लिए सम्परिवर्तन से संबंधित निरसन विधेयक है। सरकार की ओर से इन सभी विधेयकों को सदन के सामने रखा गया और इनके प्रावधानों पर चर्चा की प्रक्रिया शुरू हुई।

विधेयकों पर चर्चा और बहस पूरी होने के बाद इन्हें पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। विधानसभा से पारित होने के बाद संबंधित विधेयकों को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे भेजा जाएगा।

आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पर सवाल

सदन में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा जदयू विधायक श्याम रजक ने उठाया। उन्होंने इंदिरा आंबेडकर विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

विधायक ने कहा कि इन विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षक पद खाली पड़े हैं और करीब 62 प्रतिशत पदों पर नियुक्ति नहीं होने की बात सामने आ रही है। शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई।

मामले पर जवाब देते हुए एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने बताया कि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बीपीएससी को अधियाचना भेजी जा चुकी है। इसका उद्देश्य खाली पदों को भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से भरना है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी सदन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी से जुड़ी चिंता उचित है और सरकार इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई करेगी।

TRE-4 शिक्षक भर्ती पर शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान

मानसून सत्र के दूसरे दिन शिक्षक भर्ती का मुद्दा भी काफी महत्वपूर्ण रहा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन में TRE-4 भर्ती को लेकर सरकार की योजना की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि TRE-4 शिक्षक भर्ती से जुड़ी अधिसूचना इसी महीने जारी किए जाने की योजना है। सरकार का लक्ष्य राज्य में शिक्षकों की कमी को दूर करना और स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करना है।

शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर अगले पांच वर्षों में बिहार में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार का प्रयास है कि आने वाले वर्षों में स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बेहतर हो और विद्यार्थियों को नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

उन्होंने भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी पिछली कमियों को दूर करने की बात भी कही। सरकार का कहना है कि भर्ती व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की कोशिश की जाएगी, ताकि अभ्यर्थियों को कम से कम समस्याओं का सामना करना पड़े।

TRE-4 भर्ती को लेकर सरकार की ओर से दिए गए इस बयान के बाद शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की नजर अब आगामी अधिसूचना पर रहेगी। भर्ती में पदों की संख्या, पात्रता, परीक्षा कार्यक्रम और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी अधिसूचना जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।

पंचायतों में टैक्स वसूली पर सदन में बहस

मानसून सत्र के दौरान ग्राम पंचायतों में टैक्स वसूली का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा। विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि पंचायत स्तर पर टैक्स वसूली की व्यवस्था से गरीब और सामान्य परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

विधान परिषद में राजद एमएलसी सुनील सिंह ने गरीब परिवारों से होल्डिंग टैक्स वसूलने के मुद्दे पर सरकार की नीति का विरोध किया। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

विपक्ष का कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। ऐसे में उनसे अतिरिक्त टैक्स लेने की व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है।

मुख्यमंत्री ने टैक्स को लेकर विपक्ष के आरोपों को बताया भ्रामक

पंचायत टैक्स के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गरीब परिवारों पर नया टैक्स लगाने की बात पूरी तरह भ्रामक और निराधार है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार गरीबों पर किसी तरह का अतिरिक्त टैक्स लगाने की योजना नहीं बना रही है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य गरीब और कमजोर वर्गों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना नहीं है।

टैक्स के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस के बाद भी यह मामला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना हुआ है। आने वाले दिनों में संबंधित विधेयक या प्रस्ताव सदन में आने पर इसके प्रावधानों को लेकर और चर्चा होने की संभावना है।

जमीन और कृषि से जुड़े विधेयक भी महत्वपूर्ण

सात विधेयकों में बिहार भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक भी शामिल है। जमीन की दाखिल-खारिज प्रक्रिया आम लोगों से सीधे जुड़ी हुई है। जमीन की खरीद-बिक्री या स्वामित्व में बदलाव के बाद राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया को म्यूटेशन या दाखिल-खारिज कहा जाता है।

इसके अलावा कृषि भूमि के गैर कृषि प्रयोजन के लिए इस्तेमाल से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव भी सदन में पेश किया गया। इन विधेयकों पर होने वाली चर्चा में सरकार की ओर से इनके उद्देश्यों और संभावित प्रभावों को स्पष्ट किया जाएगा।

चीनी उपक्रमों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विधेयक भी सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं। वहीं, नर्सों के पंजीकरण से जुड़े संशोधन का उद्देश्य संबंधित व्यवस्था में आवश्यक बदलाव करना बताया गया है।

दूसरे दिन की कार्यवाही में शिक्षा और ग्रामीण मुद्दे रहे केंद्र में

कुल मिलाकर बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही में शिक्षा, शिक्षक भर्ती, पंचायत व्यवस्था और जमीन से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। एक ओर सरकार ने सात विधेयक सदन में पेश किए, तो दूसरी ओर शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ी घोषणा की गई।

TRE-4 भर्ती की अधिसूचना इसी महीने जारी करने और अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति के लक्ष्य ने शिक्षा क्षेत्र में सरकार की आगामी योजना को सामने रखा। वहीं, आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को जल्द दूर करने का आश्वासन भी दिया गया।

पंचायत टैक्स के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री ने गरीबों पर अतिरिक्त टैक्स लगाए जाने के आरोप को खारिज कर दिया। अब आने वाले दिनों में विधानसभा में पेश किए गए सातों विधेयकों पर होने वाली बहस और उनके पारित होने की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

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