
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सदन में शिक्षा, पंचायत व्यवस्था, ग्रामीण विकास और सरकारी स्कूलों से जुड़े कई अहम मुद्दे छाए रहे। एक ओर सरकार की ओर से शिक्षकों की नियुक्ति और स्कूलों के लिए जमीन उपलब्ध कराने को लेकर बड़े ऐलान किए गए, तो दूसरी ओर पंचायतों में टैक्स वसूली के मुद्दे पर विपक्ष ने जमकर विरोध जताया।
सदन की कार्यवाही के दौरान आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का मामला भी प्रमुखता से उठा। इस पर सरकार की ओर से जल्द शिक्षकों की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया गया। वहीं, शिक्षा मंत्री ने अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति का लक्ष्य बताते हुए शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
इसके अलावा सरकारी स्कूलों के पास जमीन नहीं होने की समस्या को दूर करने के लिए अगले छह महीने में जमीन उपलब्ध कराने की घोषणा की गई। दूसरी ओर पंचायत टैक्स से जुड़े प्रस्ताव को लेकर विपक्षी सदस्यों ने सदन में हंगामा किया और इसे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला कदम बताया।
आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठा
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया गया। जदयू विधायक श्याम रजक ने सरकार का ध्यान इस ओर दिलाते हुए कहा कि कई आवासीय विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली हैं।
उन्होंने बताया कि कुछ स्कूलों में करीब 62 प्रतिशत शिक्षकों की कमी है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी कब तक दूर की जाएगी।
इस सवाल के जवाब में एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने बताया कि शिक्षक भर्ती के लिए बीपीएससी को अधियाचना भेजने की प्रक्रिया की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि TRE-4 के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्ति की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी सदन में खड़े हुए और उन्होंने जल्द समाधान का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि एक महीने के भीतर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पांच साल में एक लाख शिक्षकों की भर्ती का लक्ष्य
विधानसभा के दूसरे दिन शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की ओर से सबसे बड़ी घोषणाओं में अगले पांच वर्षों के दौरान एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति का लक्ष्य शामिल रहा।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन में बताया कि राज्य में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए बड़े स्तर पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अगले पांच साल में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंत्री ने यह भी बताया कि TRE-4 के तहत शिक्षक भर्ती से संबंधित प्रस्ताव जुलाई के अंतिम सप्ताह तक बीपीएससी को भेजे जाने की योजना है। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
सरकार के इस ऐलान को राज्य के शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए भी यह घोषणा अहम हो सकती है। हालांकि, भर्ती की वास्तविक प्रक्रिया, रिक्तियों की संख्या और परीक्षा से संबंधित विस्तृत जानकारी आगे की आधिकारिक प्रक्रिया में सामने आने की उम्मीद है।
जिन स्कूलों के पास जमीन नहीं, उन्हें छह महीने में जमीन
विधानसभा में सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठा। चर्चा के दौरान बताया गया कि राज्य के कुछ सरकारी विद्यालय ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन या परिसर होने के बावजूद पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं है।
इस समस्या पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि जिन सरकारी स्कूलों के पास अपनी जमीन नहीं है, उन्हें अगले छह महीने के भीतर जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य स्कूलों के लिए जरूरी आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है। जमीन उपलब्ध होने के बाद विद्यालयों में भवन विस्तार, खेल मैदान और अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास की संभावना बढ़ सकती है।
पंचायत टैक्स के मुद्दे पर विपक्ष का जोरदार विरोध
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान पंचायतों में टैक्स वसूली का मुद्दा भी काफी गरमाया रहा। विपक्षी दलों के विधायकों ने सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और इसका विरोध किया।
माले विधायकों ने आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर टैक्स लगाने या उसकी वसूली बढ़ाने से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
विपक्ष की ओर से इस मुद्दे पर कार्य स्थगन प्रस्ताव भी लाया गया, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद विपक्षी विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। इससे विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कुछ समय के लिए माहौल काफी गरम हो गया।
सत्ता पक्ष की ओर से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने विपक्ष के विरोध पर जवाब देते हुए कहा कि संबंधित विधेयक जब सदन में पेश किया जाएगा, तब उसके प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से कहा कि यदि किसी प्रावधान को लेकर आपत्ति है तो वे संशोधन प्रस्ताव के माध्यम से अपनी बात रख सकते हैं।
विधान परिषद में भी उठा नशे का मुद्दा
विधानसभा के साथ-साथ बिहार विधान परिषद में भी दूसरे दिन कई मुद्दों को लेकर माहौल गर्म रहा। राजद एमएलसी सुनील सिंह ने राज्य में गांजा और चरस की कथित बढ़ती उपलब्धता का मुद्दा सदन में उठाया।
उन्होंने सरकार से इस दिशा में कार्रवाई और नशीले पदार्थों की रोकथाम को लेकर सवाल किया। उनके बयान के बाद भाजपा सदस्यों ने विरोध जताया, जिसके कारण सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।
नशे के अलावा विधान परिषद में टैक्स और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी सदस्यों ने अपनी बातें रखीं। वहीं, समस्तीपुर छात्रा हत्याकांड का मामला भी सदन में उठाया गया और इस पर चर्चा की गई।
नई चीनी मिलों की स्थापना की तैयारी
मानसून सत्र के दूसरे दिन की प्रमुख घोषणाओं में राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना से जुड़ी जानकारी भी शामिल रही। सरकार की ओर से बताया गया कि गोपालगंज, मधुबनी समेत तीन स्थानों पर नई चीनी मिलें स्थापित करने की तैयारी चल रही है।
बिहार के कई जिलों में गन्ना उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में नई चीनी मिलों की स्थापना से किसानों को स्थानीय स्तर पर गन्ने की खरीद और प्रसंस्करण की सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
स्कूलों में अनुशासन को लेकर भी निर्देश
सदन में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के बीच स्कूलों में अनुशासन और विद्यार्थियों से संबंधित मामलों पर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से स्कूलों में अनुशासनहीनता या अनुचित पहनावे से जुड़े मामलों में शिकायत मिलने पर 48 घंटे के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिए जाने की बात सामने आई।
सरकार का जोर स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने पर है। हालांकि, ऐसे मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया और नियमों को लेकर संबंधित विभाग के निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।
दूसरे दिन की बड़ी घोषणाओं पर नजर
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए। सरकार ने एक महीने के भीतर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया। इसके अलावा अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की भर्ती का लक्ष्य भी घोषित किया गया।
TRE-4 शिक्षक भर्ती का प्रस्ताव जुलाई के अंतिम सप्ताह में बीपीएससी को भेजने की जानकारी दी गई। वहीं, जिन सरकारी स्कूलों के पास अपनी जमीन नहीं है, उन्हें अगले छह महीने में जमीन उपलब्ध कराने का भी आश्वासन मिला।
दूसरी ओर पंचायत टैक्स के मुद्दे पर विपक्ष के विरोध और सदन में हंगामे ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। विधान परिषद में नशीले पदार्थों की उपलब्धता और छात्रा हत्याकांड जैसे मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा बने।
कुल मिलाकर बिहार विधानसभा मानसून सत्र का दूसरा दिन शिक्षा, पंचायत व्यवस्था और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों के कारण काफी महत्वपूर्ण रहा। एक तरफ सरकार ने शिक्षक भर्ती और स्कूलों की सुविधाओं को लेकर कई घोषणाएं कीं, वहीं विपक्ष ने पंचायत टैक्स सहित अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरा। अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घोषित योजनाओं और फैसलों को जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और सदन में किन नए मुद्दों पर राजनीतिक बहस होती है।


