
बिहार में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को चुनाव आयोग के समक्ष एक ज्ञापन सौंपते हुए जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर से जुड़े चुनाव प्रचार और कथित वित्तीय गतिविधियों की जांच की मांग की है। भाजपा का आरोप है कि उपचुनाव के दौरान चुनावी खर्च की निर्धारित सीमा से अधिक रकम प्रचार अभियान में खर्च की जा रही है और इसके लिए कथित तौर पर कुछ कंपनियों तथा डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भाजपा ने अपने ज्ञापन में सोशल मीडिया प्रचार, कथित शेल कंपनियों, इन्फ्लुएंसर्स और एआई आधारित बॉट अकाउंट्स से जुड़े कई सवाल उठाए हैं। पार्टी ने चुनाव आयोग से पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने और यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों और संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
इस मामले को लेकर भाजपा नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की, जिसमें उन्होंने अपने आरोपों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और प्रशांत किशोर या जन सुराज की ओर से इस मामले में प्रतिक्रिया का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
चुनाव आयोग को सौंपा गया ज्ञापन
बांकीपुर उपचुनाव को लेकर भाजपा नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को चुनाव आयोग पहुंचा। पार्टी की ओर से आयोग को ज्ञापन सौंपकर कथित चुनावी खर्च और सोशल मीडिया प्रचार से जुड़े मामलों की जांच की मांग की गई।
भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गतिविधियां चल रही हैं, उसकी गंभीरता से जांच आवश्यक है। पार्टी ने दावा किया कि प्रचार अभियान में बड़ी मात्रा में धन खर्च किया जा रहा है और इस खर्च को सीधे उम्मीदवार के चुनावी खाते में दर्ज किए जाने के बजाय दूसरे माध्यमों से किए जाने की आशंका है।
भाजपा ने आयोग से मांग की है कि चुनावी खर्च के रिकॉर्ड और डिजिटल प्रचार से जुड़े भुगतान की जांच की जाए। पार्टी का कहना है कि यदि किसी उम्मीदवार या राजनीतिक संगठन की ओर से निर्धारित सीमा से अधिक खर्च किया जा रहा है तो चुनावी नियमों के तहत उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
भाजपा ने खर्च सीमा को लेकर उठाए सवाल
भाजपा के अनुसार विधानसभा चुनाव में एक उम्मीदवार के लिए चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा 40 लाख रुपये निर्धारित है। पार्टी का आरोप है कि बांकीपुर उपचुनाव के दौरान सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
भाजपा का दावा है कि यह खर्च उम्मीदवार के आधिकारिक चुनावी खाते के बजाय कथित शेल या प्रॉक्सी कंपनियों के माध्यम से किया जा सकता है। पार्टी ने चुनाव आयोग से इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच करने की मांग की है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि सभी प्रचार खर्च का सही हिसाब चुनाव आयोग के सामने प्रस्तुत किया जाए। पार्टी का आरोप है कि यदि किसी तीसरे पक्ष के माध्यम से चुनाव प्रचार पर पैसा खर्च किया जा रहा है तो इसकी भी जांच होनी चाहिए।
हालांकि, भाजपा द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल चुनाव आयोग के स्तर पर मामले की जांच और आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
दो कंपनियों के नाम लेकर जांच की मांग
भाजपा ने अपने ज्ञापन में कुछ कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि Simple Sense Analytics Private Limited और News LightHouse LLP जैसी संस्थाओं के माध्यम से सोशल मीडिया अभियान संचालित किए जाने की आशंका है।
भाजपा नेताओं ने इन कंपनियों के पते, दस्तावेज और वित्तीय गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी ने मांग की कि संबंधित कंपनियों के बैंक खातों और उनके वित्तीय लेनदेन की जांच की जाए। साथ ही यह पता लगाया जाए कि प्रचार अभियान के लिए इस्तेमाल किए जा रहे धन का स्रोत क्या है।
भाजपा ने जरूरत पड़ने पर प्रवर्तन निदेशालय और अन्य संबंधित जांच एजेंसियों से वित्तीय पहलुओं की जांच कराने की मांग भी रखी है। पार्टी का कहना है कि यदि किसी कंपनी का इस्तेमाल चुनावी खर्च को छिपाने या निर्धारित सीमा से बचने के लिए किया गया है तो उसकी पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के भुगतान का भी मुद्दा
भाजपा ने चुनाव प्रचार में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि कुछ इन्फ्लुएंसर्स को कथित तौर पर भुगतान करके चुनावी प्रचार कराया जा रहा है।
भाजपा ने आयोग से मांग की है कि ऐसे भुगतान की जांच की जाए और यह देखा जाए कि क्या इनका हिसाब चुनावी खर्च में शामिल किया गया है या नहीं। पार्टी का कहना है कि डिजिटल प्रचार भी चुनावी अभियान का हिस्सा है और यदि इसके लिए धन खर्च किया जाता है तो नियमों के तहत उसकी जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक होना चाहिए।
इसके अलावा भाजपा ने बड़ी संख्या में कथित फर्जी बॉट अकाउंट्स के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि इन खातों के माध्यम से सोशल मीडिया पर कृत्रिम जनसमर्थन का माहौल बनाने की कोशिश की जा सकती है।
एआई आधारित प्रचार को लेकर भी शिकायत
भाजपा ने चुनाव आयोग के सामने एआई आधारित डिजिटल प्रचार का मुद्दा भी उठाया है। पार्टी का आरोप है कि सोशल मीडिया पर कृत्रिम तरीके से प्रचार सामग्री को बढ़ावा देने और जनसमर्थन का माहौल तैयार करने के लिए बॉट अकाउंट्स तथा एआई तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पार्टी ने आयोग से इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। भाजपा का कहना है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशों पर नजर रखना जरूरी है।
भाजपा ने यह दावा भी किया कि कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स विदेश से संचालित हो सकते हैं। पार्टी ने चुनाव आयोग से इस पहलू की भी जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि चुनाव प्रचार से जुड़े डिजिटल अभियान का संचालन कहां से किया जा रहा है और इसके पीछे वास्तविक लोग या संस्थाएं कौन हैं।
भाजपा ने आयोग के सामने रखीं कई मांगें
भाजपा ने चुनाव आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में कई बिंदुओं पर जांच की मांग की है। इनमें बांकीपुर उपचुनाव में कथित चुनावी खर्च की विस्तृत जांच प्रमुख है। इसके साथ ही पार्टी ने कथित शेल और प्रॉक्सी कंपनियों की भूमिका का पता लगाने की मांग की है।
भाजपा ने सोशल मीडिया पर सक्रिय कथित फर्जी बॉट अकाउंट्स और एआई आधारित प्रचार की भी जांच की मांग की है। इसके अलावा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को किए गए संभावित भुगतान और उसके स्रोत की जांच कराने की बात कही गई है।
पार्टी ने कहा है कि यदि जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलते हैं तो संबंधित केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद भी ली जा सकती है।
शाहनवाज हुसैन ने भाजपा की जीत का किया दावा
इस पूरे मामले को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन के अलावा शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, जीवेश मिश्रा, अरवल विधायक मनोज शर्मा और जनक राम मौजूद रहे।
शाहनवाज हुसैन ने दावा किया कि बांकीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा मजबूत स्थिति में है और पार्टी चुनाव जीतने की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा का मुख्य मुकाबला जन सुराज से नहीं है, बल्कि उनके अनुसार जन सुराज और राजद के बीच दूसरे और तीसरे स्थान के लिए मुकाबला है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि बांकीपुर क्षेत्र में भाजपा पहले से मजबूत रही है और आगे भी पार्टी का जनाधार कायम रहेगा। शाहनवाज हुसैन ने प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछले चुनावों के दौरान भी सोशल मीडिया के जरिए माहौल बनाने की कोशिश की गई थी, लेकिन उसका प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दिया।
भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग को डिजिटल प्रचार और चुनावी खर्च से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
कुल मिलाकर बांकीपुर उपचुनाव से पहले भाजपा की ओर से चुनाव आयोग में की गई शिकायत ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा ने प्रशांत किशोर से जुड़े चुनावी प्रचार, कथित वित्तीय गतिविधियों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और बॉट अकाउंट्स को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने आयोग से चुनावी खर्च और डिजिटल प्रचार की जांच की मांग की है। अब इस मामले में चुनाव आयोग की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर राजनीतिक और चुनावी हलकों की नजर बनी हुई है। वहीं, भाजपा के इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब और जांच के बाद सामने आने वाले तथ्य ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेंगे।


