
पटना, 21 जुलाई: बिहार में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत कॉम्फेड (बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड) ने करीब 7 हजार जीविका दीदियों को डेयरी एवं पशुपालन का विशेष प्रशिक्षण दिया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये पशु सखियां अब अपने-अपने गांवों में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की अन्य महिला सदस्यों को प्रशिक्षित करेंगी, जिससे पशुपालन आधारित आजीविका गतिविधियों का विस्तार हो सके।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत चल रही पहल
ग्रामीण विकास विभाग के अधीन बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) और डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की संस्था कॉम्फेड संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (एमएमआरवाई) के तहत महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
योजना के तहत अब तक राज्य की 1.5 करोड़ से अधिक जीविका दीदियों को निर्धारित सहायता राशि की पहली किस्त उपलब्ध कराई जा चुकी है। अब इन महिलाओं को कृषि, पशुपालन और अन्य उद्यमों से जोड़ने के लिए चरणबद्ध तरीके से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
पहले चरण में 7 हजार पशु सखियां हुईं प्रशिक्षित
जीविका के अनुसार, प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में करीब 7 हजार पशु सखियों, आजीविका विशेषज्ञों तथा प्रत्येक प्रखंड के सीएलएफ नोडल (एसी/सीसी) को प्रशिक्षित किया गया। यह प्रशिक्षण कॉम्फेड के माध्यम से राज्य के सभी जिलों में आयोजित किया गया। इसके लिए कॉम्फेड और जीविका ने जिला स्तर पर नोडल पदाधिकारियों की भी नियुक्ति की थी।
अब गांवों में अन्य महिलाओं को देंगी प्रशिक्षण
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पशु सखियां अपने-अपने गांवों में डेयरी गतिविधियों से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्यों को प्रशिक्षण देंगी। इसके लिए ग्राम संगठन के सामुदायिक प्रेरक और परियोजना कर्मी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम का विवरण ग्राम संगठन स्तर पर दर्ज किया जाएगा।
केवल डेयरी नहीं, बकरी, भेड़ और सूअर पालन का भी मिलेगा प्रशिक्षण
जीविका ने स्पष्ट किया है कि पशु सखियां केवल डेयरी गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेंगी। वे भेड़, बकरी, सूअर तथा अन्य लघु पशुपालन से जुड़ी महिला सदस्यों को भी अलग से प्रशिक्षण देंगी। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन डेयरी प्रशिक्षण के अतिरिक्त किया जाएगा और उनकी कार्यवाही भी ग्राम संगठन स्तर पर दर्ज की जाएगी।
महिलाओं की आय बढ़ाने पर फोकस
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक पशुपालन तकनीकों से जोड़ना, उनकी उत्पादकता बढ़ाना और डेयरी व पशुपालन आधारित स्वरोजगार के माध्यम से उनकी आय में वृद्धि करना है। सरकार का मानना है कि प्रशिक्षित पशु सखियों के जरिए गांव-गांव तक तकनीकी जानकारी पहुंचने से महिला स्वयं सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।
नोट: यह समाचार बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) एवं संबंधित विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है।


