
पटना, 21 जुलाई: बिहार में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। विभाग के अनुसार, अब तक राज्य के 4,909 ट्रैफिक पुलिसकर्मी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से लाभान्वित हो चुके हैं।
14 दिनों का आवासीय प्रशिक्षण
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से 80 पुलिसकर्मियों का एक बैच तैयार किया जाता है। उन्हें औरंगाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (IDTR) में 14 दिनों का निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जाता है।
इससे पहले वर्ष 2019 में पुलिस मुख्यालय की अनुमति मिलने के बाद यह प्रशिक्षण 6 दिनों का होता था, लेकिन ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क सुरक्षा से जुड़े विषयों की व्यापक जानकारी देने के लिए इसकी अवधि बढ़ाकर 14 दिन कर दी गई है।
इन विषयों पर दिया जाता है प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक जानकारी दी जाती है। इनमें—
- हिट एंड रन मामलों की जांच
- यातायात नियमों का प्रभावी अनुपालन
- गुड सेमेरिटन (Good Samaritan) कानून
- सड़क दुर्घटना स्थल पर प्राथमिक उपचार
- ट्रैफिक प्रबंधन
- रोड सेफ्टी प्रोटोकॉल
शामिल हैं। प्रशिक्षण के अंतिम दिन परीक्षा आयोजित की जाती है तथा सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जाता है।
सड़क दुर्घटनाएं कम करने पर जोर
परिवहन सचिव राज कुमार ने कहा कि ट्रैफिक पुलिसकर्मी सड़क पर कानून लागू करने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्हें समय-समय पर आधुनिक और अद्यतन प्रशिक्षण देकर सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने तथा यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि गुड सेमेरिटन योजना के तहत सड़क दुर्घटना के दौरान घायलों की सहायता करने में पुलिसकर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
नोट: यह समाचार बिहार परिवहन विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है।


