
आगरा पुलिस ने करीब 27 वर्षों से फरार चल रहे 50 हजार रुपये के इनामी आरोपी को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बेहद शातिर तरीके से अपनी पहचान बदल ली थी। इतना ही नहीं, उसने कथित तौर पर खुद को मृत घोषित करवाकर पुलिस को भ्रमित करने की कोशिश की और लंबे समय तक कानून की नजरों से दूर रहा।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान भूरा उर्फ जमील के रूप में हुई है। वह आगरा के खेरागढ़ थाना क्षेत्र में वर्ष 1999 में हुई एक गंभीर वारदात के बाद से फरार बताया जा रहा था। इस मामले में पुलिसकर्मियों पर हमला, लूटपाट और दो पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोप था। घटना के बाद कई आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन भूरा पुलिस की पकड़ से बाहर निकलने में कामयाब हो गया।
लगभग तीन दशक तक आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस की तलाश जारी रही। इस दौरान उसने अपनी पुरानी पहचान और संपर्कों से दूरी बना ली। पुलिस जांच के मुताबिक, उसने अपना नाम बदलकर जमील रख लिया और भोपाल में एक सामान्य नागरिक की तरह परिवार के साथ रहने लगा।
1999 की वारदात के बाद हो गया था फरार
पुलिस के मुताबिक, वर्ष 1999 में आगरा के खेरागढ़ थाना क्षेत्र में एक गंभीर आपराधिक घटना हुई थी। आरोप है कि बदमाशों के एक समूह ने पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर लूटपाट की थी। इस दौरान दो पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या किए जाने की बात सामने आई थी।
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और वारदात में शामिल कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, पुलिस के अनुसार इस मामले में शामिल मुख्य आरोपियों में से एक भूरा मौके से फरार होने में सफल रहा।
गिरफ्तारी नहीं होने के कारण वह लंबे समय तक पुलिस की वांछित सूची में बना रहा। उसकी तलाश के लिए कई स्तर पर प्रयास किए गए, लेकिन वह हर बार पुलिस की पहुंच से दूर रहा। समय बीतने के साथ मामला पुराना जरूर होता गया, लेकिन पुलिस ने आरोपी की तलाश पूरी तरह बंद नहीं की।
उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। पुलिस के लिए आरोपी की गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह लगभग 27 वर्षों से फरार चल रहा था।
गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को मृत बताने का दावा
पुलिस जांच में कथित तौर पर यह जानकारी सामने आई कि आरोपी ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को मृत दिखाने की योजना बनाई थी। पुलिस के मुताबिक, उसने ऐसी परिस्थितियां तैयार कीं, जिससे उसके बारे में यह धारणा बन सके कि उसकी मौत हो चुकी है।
इसके बाद उसने अपने पुराने परिचितों और रिश्तेदारों से भी संपर्क कम कर दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए लंबे समय तक अलग-अलग स्थानों पर रहने का रास्ता अपनाया।
जांच में यह भी पता चला कि बाद में उसने अपना नाम बदलकर जमील रख लिया। नई पहचान के साथ उसने मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में रहना शुरू किया। वहां उसने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ सामान्य पारिवारिक जीवन बिताया।
बताया जा रहा है कि उसने अपनी पुरानी पहचान को इस तरह छिपाकर रखा कि आसपास रहने वाले लोगों को भी उसके कथित आपराधिक अतीत की जानकारी नहीं थी। वर्षों तक वह नई पहचान के साथ सामान्य जीवन जीता रहा और आगरा पुलिस उसकी तलाश में लगी रही।
नई पहचान के बावजूद पुलिस तक पहुंची जानकारी
करीब 27 साल बाद पुलिस को आरोपी के भोपाल में रहने की सूचना मिली। खेरागढ़ थाना पुलिस को मिली जानकारी के आधार पर पहले आरोपी की पहचान और उसके ठिकाने की पुष्टि करने का प्रयास किया गया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सूचना की जांच के बाद एक विशेष टीम को भोपाल भेजा गया। टीम ने स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई और आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी। पर्याप्त जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की।
पुलिस टीम ने भोपाल में दबिश देकर भूरा उर्फ जमील को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगरा लाया गया, जहां उसके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
पुलिस की इस कार्रवाई को लंबे समय से लंबित मामले में बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। 27 वर्षों तक फरार रहने के बावजूद आरोपी का आखिरकार पकड़ा जाना पुलिस की लगातार चल रही जांच और सूचना तंत्र की भूमिका को भी सामने लाता है।
पुलिस ने तकनीकी जांच और मुखबिर तंत्र का लिया सहारा
आगरा पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इतने लंबे समय तक फरार रहने वाले आरोपी तक पहुंचना आसान नहीं था। आरोपी ने कथित तौर पर अपनी पहचान बदलने के साथ-साथ पुराने संपर्कों से दूरी बना ली थी। इसके कारण पुलिस को उसकी तलाश में काफी समय लगा।
पुलिस के मुताबिक, लगातार निगरानी, तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र से मिली जानकारी को एक साथ जोड़कर आरोपी की लोकेशन का पता लगाया गया। इसके बाद टीम ने भोपाल जाकर कार्रवाई की।
अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने पुलिस से बचने के लिए अपनी पहचान और रहने का स्थान बदलने की कोशिश की, लेकिन लगातार चल रही जांच के कारण आखिरकार उसकी पहचान सामने आ गई।
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फरारी के दौरान वह किन-किन स्थानों पर रहा और इस दौरान किन लोगों ने उसकी मदद की। साथ ही, उसकी बदली हुई पहचान से जुड़े दस्तावेजों और अन्य पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।
पुलिस अधिकारी ने कहा, कानून से बचना संभव नहीं
आगरा के डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार सिंह के अनुसार, आरोपी पिछले 27 वर्षों से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। उन्होंने बताया कि आरोपी ने खुद को मृत घोषित करवाने और नाम बदलकर नई पहचान के साथ रहने की कोशिश की थी।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, जांच टीम ने लगातार इस मामले पर काम जारी रखा और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के साथ मुखबिर तंत्र की सहायता ली। इसी प्रक्रिया के तहत पुलिस आरोपी तक पहुंचने में सफल रही।
डीसीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर अपराधों में लंबे समय तक फरार रहने वाले आरोपियों की तलाश पुलिस के लिए लगातार जारी रहती है। किसी आरोपी के लिए पहचान बदलकर या स्थान बदलकर हमेशा के लिए कानून से बचना संभव नहीं है।
परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रहा था आरोपी
पुलिस के अनुसार, भूरा ने नई पहचान के साथ भोपाल में अपना परिवार बसा लिया था। वह पत्नी और बच्चों के साथ वहां रह रहा था और सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहा था।
कथित तौर पर उसने अपने आसपास के लोगों से अपने पुराने जीवन और आपराधिक मामले की जानकारी छिपाकर रखी थी। वर्षों तक उसकी पहचान उजागर नहीं हुई और वह पुलिस की नजरों से बचा रहा।
अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके पुराने रिकॉर्ड और फरारी के दौरान की गतिविधियों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी ने किन दस्तावेजों के आधार पर नई पहचान बनाई और क्या इस प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति की मदद ली गई थी।
27 साल पुराने इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में जुटी है। 1999 की घटना से जुड़े आरोपों की अदालत में सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी कितने भी लंबे समय तक फरार क्यों न रहे, जांच एजेंसियां उसकी तलाश जारी रख सकती हैं। भूरा के मामले में नाम बदलने, नई पहचान अपनाने और खुद को मृत बताने जैसी कथित कोशिशों के बावजूद पुलिस आखिरकार उसकी वास्तविक पहचान तक पहुंच गई। अब आरोपी से पूछताछ के जरिए उसके 27 वर्षों के फरारी काल और पुराने मामले से जुड़े अन्य पहलुओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है।


