1086 बेटियों ने पहनी बिहार पुलिस की वर्दी: बोधगया में भावुक कर देने वाली पासिंग आउट परेड, संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी

बोधगया: बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (BSAP-3) परिसर में शुक्रवार को गर्व, सम्मान और भावनाओं से भरा ऐतिहासिक पल देखने को मिला। 1086 प्रशिक्षु महिला सिपाहियों ने कठिन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भव्य पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया और आधिकारिक रूप से बिहार पुलिस का हिस्सा बन गईं।

मगध क्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने परेड की सलामी ली और सभी नव-नियुक्त महिला सिपाहियों को संविधान के प्रति निष्ठा, ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ सेवा करने की शपथ दिलाई।

पासिंग आउट परेड के बाद छलक पड़े जज्बात

परेड समाप्त होते ही BSAP-3 परिसर भावुक दृश्यों का साक्षी बन गया। कई महिला सिपाहियां अपने माता-पिता से गले लगकर रो पड़ीं, तो कई ने उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। अनेक बेटियों ने अपने माता-पिता को अपनी पुलिस कैप पहनाकर उनके वर्षों के संघर्ष और त्याग को सम्मान दिया।

ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करने वाले पिता की बेटी बनी पुलिसकर्मी

कैमूर जिले की रहने वाली सुमन कुमारी की सफलता पूरे समारोह की सबसे प्रेरक कहानियों में रही।

सुमन के पिता राजवंश ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। कई बार प्रतियोगी परीक्षा का फॉर्म भरने के लिए भी पैसे नहीं होते थे, लेकिन परिवार ने कर्ज लेकर भी उसकी पढ़ाई जारी रखी।

आज वही सुमन बिहार पुलिस की सिपाही बनकर अपने माता-पिता का सपना पूरा कर चुकी हैं।

कटिहार की रुचि प्रिया ने भी लिखी सफलता की कहानी

कटिहार की रुचि प्रिया पासिंग आउट परेड के बाद अपने भाई और मामा से गले लगकर भावुक हो गईं। छोटे किसान परिवार से आने वाली रुचि ने सीमित संसाधनों के बीच मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया।

उन्होंने कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य बिहार पुलिस में दारोगा (Sub-Inspector) बनना है।

परिवार की पहली सरकारी नौकरी बनी सुलेखा

पटना जिले के बाढ़ की रहने वाली सुलेखा के लिए यह उपलब्धि पूरे परिवार के इतिहास में पहली सरकारी नौकरी है।

उन्होंने बताया कि दारोगा भर्ती में सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते हुए आखिरकार बिहार पुलिस में सिपाही बन गईं।

उनके पिता शंकर महतो ने कहा कि बेटी ने पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

‘भयमुक्त बिहार’ बनाने में निभाएंगी अहम भूमिका

समारोह को संबोधित करते हुए आईजी विकास वैभव ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत और विकसित बिहार के निर्माण में पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।

उन्होंने कहा कि बिहार में भयमुक्त और विश्वासयुक्त वातावरण बनाना आवश्यक है, ताकि निवेश बढ़े, रोजगार के अवसर पैदा हों और लोगों को शिक्षा व रोजगार के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े।

संघर्ष की जीत का बना ऐतिहासिक समारोह

बोधगया की यह पासिंग आउट परेड केवल नियुक्ति का कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि 1086 बेटियों के संघर्ष, मेहनत और सपनों की जीत का उत्सव बन गई। किसी ने गरीबी को हराया, किसी ने आर्थिक तंगी को, तो किसी ने असफलताओं को पीछे छोड़कर वर्दी पहनने का सपना साकार किया।

इन बेटियों की सफलता आज पूरे बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

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