
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में छिड़ा पोस्टर वार अब चुनाव आयोग की चौखट तक पहुंच गया है। प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने चुनाव प्रचार के दौरान आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से शिकायत की है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता कर भाजपा पर भ्रामक प्रचार और चुनावी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
भ्रामक पोस्टरों को लेकर आयोग से शिकायत
मनोज भारती ने आरोप लगाया कि पिछले दो दिनों से पटना के कई प्रमुख चौराहों पर प्रशांत किशोर को निशाना बनाते हुए भ्रामक और आपत्तिजनक पोस्टर लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पोस्टरों में मुस्लिम टोपी, नोटों की गड्डी और “केसी सिन्हा तो झांकी हैं, जमानत जब्त होना अभी बाकी है” जैसे संदेश लिखे गए हैं, जिनका उद्देश्य मतदाताओं को गुमराह करना है।
जन सुराज ने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है।
‘हमारे पोस्टर हटाकर BJP के बैनर लगाए जा रहे’
जन सुराज ने आरोप लगाया कि जिन घरों पर लोगों की अनुमति से पार्टी के पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं, उन्हें भाजपा कार्यकर्ता जबरन हटाकर अपनी पार्टी के पोस्टर और झंडे लगा रहे हैं।
पार्टी का दावा है कि विरोध करने पर संबंधित लोग खुद को नगर निगम का कर्मचारी बताते हैं, लेकिन पहचान पत्र मांगने पर वहां से चले जाते हैं।
जीविका दीदियों के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
जन सुराज ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि पिछले विधानसभा चुनाव में कुछ स्थानों पर जीविका दीदियों का उपयोग मतदान प्रक्रिया के दौरान किया गया था। पार्टी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि इस बार ऐसी किसी भी स्थिति को रोकने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।
अर्धसैनिक बलों की भूमिका पर भी आपत्ति
पार्टी ने अर्धसैनिक बलों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए हैं। मनोज भारती ने कहा कि सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी मतदान केंद्र के बाहर कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन पिछले चुनाव में कई जगह उन्हें बूथ के अंदर भी लगाया गया था।
उन्होंने आयोग से मांग की कि इस बार सभी सुरक्षा बलों और चुनाव अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं ताकि पूरी मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।
निष्पक्ष चुनाव की मांग
जन सुराज ने चुनाव आयोग से सभी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान सभी दलों के लिए समान नियम लागू होने चाहिए और आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए।


