
पटना | पटना हाईकोर्ट ने बांका जिले के अमरपुर थाना क्षेत्र के वर्ष 2008 के एक दुष्कर्म के प्रयास से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति पूर्णेंदु सिंह की एकल पीठ ने निचली अदालत द्वारा वर्ष 2013 में सुनाई गई तीन वर्ष की सश्रम कारावास की सजा को रद्द कर दिया।
क्या था मामला?
मामले के अनुसार, 19 जनवरी 2008 को पीड़िता अपने पिता के साथ अमरपुर स्थित एक फोटो स्टूडियो गई थी। आरोप था कि स्टूडियो संचालक हिमांशु कुमार पाठक ने पीड़िता को कमरे में ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती की और दुष्कर्म का प्रयास किया।
बाद में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई।
हाईकोर्ट ने क्यों किया बरी?
हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
अदालत ने जांच और मुकदमे में कई गंभीर खामियां गिनाईं, जिनमें शामिल हैं:
- जांच अधिकारी की गवाही नहीं कराई गई।
- मेडिकल अधिकारी को गवाह नहीं बनाया गया।
- रिकॉर्ड पर कोई चिकित्सकीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं था।
- स्वतंत्र गवाहों ने अभियोजन का साथ नहीं दिया।
- मामला मुख्य रूप से केवल पीड़िता और उसके पिता के बयानों पर आधारित रह गया।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों के मामलों में पीड़िता की गवाही महत्वपूर्ण होती है, लेकिन वह विश्वसनीय, सुसंगत और भरोसेमंद होनी चाहिए। यदि वैज्ञानिक, चिकित्सकीय या अन्य स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं और जांच में गंभीर कमियां हैं, तो केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
जुर्माना राशि लौटाने का आदेश
अदालत ने आरोपी हिमांशु कुमार पाठक को सभी आरोपों से बरी करते हुए:
- उनकी जमानत बांड की देनदारी समाप्त की,
- तथा जमा की गई जुर्माना राशि वापस करने का भी निर्देश दिया।
यह फैसला अभियोजन और जांच एजेंसियों के लिए इस बात की याद दिलाता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में निष्पक्ष, विधिसम्मत और साक्ष्य-आधारित जांच अत्यंत आवश्यक है।


