
नई दिल्ली | भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को भेजे गए मानहानि नोटिस को लेकर विवाद और गहरा गया है। समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल ने कहा कि यह मामला केवल किसी एक व्यक्ति की प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि राजनीतिक दल, उसके कार्यकर्ताओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान से जुड़ा हुआ है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
कृष्ण कन्हैया पाल के अनुसार, विवाद की शुरुआत तब हुई जब बालासुब्रमण्यम नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर कथित आपत्तिजनक पोस्ट साझा की। आरोप है कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने उसी पोस्ट को व्यंग्यात्मक टिप्पणी के साथ रीपोस्ट किया, जिसके बाद उन्होंने कानूनी कार्रवाई का फैसला लिया।
‘राजनीतिक दल की प्रतिष्ठा भी कानून से संरक्षित’
पाल ने कहा कि वह समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ-साथ अधिवक्ता भी हैं। उनके मुताबिक भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत यदि किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली टिप्पणी की जाती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
निशिकांत दुबे को दी कानूनी सलाह
कृष्ण कन्हैया पाल ने कहा कि यदि निशिकांत दुबे यह सवाल उठा रहे हैं कि उनका व्यक्तिगत रूप से क्या अपमान हुआ है, तो उन्हें अपने कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला व्यक्तिगत भावना से अधिक संगठन की प्रतिष्ठा से जुड़ा है।
‘माफी मांगी, फिर सोशल मीडिया पर टिप्पणी की’
पाल ने दावा किया कि मानहानि नोटिस भेजे जाने के बाद निशिकांत दुबे ने व्यक्तिगत रूप से उनसे माफी मांगी थी। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में सांसद ने X पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को “चापलूस” बताते हुए टिप्पणी की और समाजवादी विचारधारा पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक अधिवक्ता के रूप में उनकी गरिमा पर भी टिप्पणी की गई, जिसके बाद उन्होंने अपने वकील के माध्यम से औपचारिक मानहानि नोटिस भेजा।
निशिकांत दुबे ने किया इनकार
वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कृष्ण कन्हैया पाल के इस दावे को खारिज करते हुए सोशल मीडिया पर साफ कहा कि उन्होंने किसी से कोई माफी नहीं मांगी है और ऐसा करने का सवाल ही नहीं उठता।
‘लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान का सवाल’
पाल ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों, उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं की गरिमा का सम्मान होना चाहिए। यदि किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है तो कानून सभी नागरिकों को उचित कानूनी कार्रवाई का अधिकार देता है।
कौन हैं कृष्ण कन्हैया पाल?
कृष्ण कन्हैया पाल पेशे से वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। हाल के दिनों में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को भेजे गए मानहानि नोटिस के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच मामला कानूनी और राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।


