नाबार्ड के 45वें स्थापना दिवस पर कृषि और ग्रामीण विकास को नई गति देने का संकल्प, बिहार में सहकारी बैंकों के साथ भविष्य की रणनीति पर हुआ मंथन

पटना: कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में देश की प्रमुख वित्तीय संस्था नाबार्ड ने अपना 45वां स्थापना दिवस उत्साह और गरिमा के साथ मनाया। इस अवसर पर पटना स्थित बिहार क्षेत्रीय कार्यालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य के कई प्रमुख सहकारी बैंकों के अध्यक्ष, बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी, ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञ तथा नाबार्ड के पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान बीते चार दशकों से अधिक समय में कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सहकारिता और आधारभूत संरचना के विकास में नाबार्ड की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही आने वाले वर्षों में किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और सहकारी संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में नई रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

1982 से अब तक ग्रामीण भारत के विकास में निभाई अहम भूमिका

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कहा कि वर्ष 1982 में स्थापित नाबार्ड का उद्देश्य केवल कृषि क्षेत्र को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना नहीं था, बल्कि ग्रामीण भारत के समग्र विकास को नई दिशा देना भी था। उन्होंने कहा कि पिछले 45 वर्षों में संस्था ने किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने, ग्रामीण रोजगार बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने और ग्रामीण आधारभूत ढांचे के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि समय के साथ नाबार्ड ने अपनी कार्यशैली में लगातार बदलाव किया और नई योजनाओं के माध्यम से किसानों तथा ग्रामीण समुदाय की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप काम किया। आज संस्था केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, नवाचार, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

किसान क्रेडिट कार्ड और स्वयं सहायता समूह बने आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल

अपने संबोधन में उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड योजना को किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक बताया। उनके अनुसार इस योजना ने किसानों को समय पर सुलभ ऋण उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाई है, जिससे खेती की लागत पूरी करने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में मदद मिली।

उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की सफलता का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन समूहों ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। लाखों महिलाओं ने छोटे व्यवसाय शुरू किए, परिवार की आय बढ़ाई और सामाजिक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।

जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के विकास पर लगातार काम

नाबार्ड द्वारा संचालित जलछाजन परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से जल संरक्षण, मृदा संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे कई क्षेत्रों में खेती की उत्पादकता बढ़ी, भूजल स्तर में सुधार हुआ और किसानों की आय में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला।

उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य को देखते हुए भविष्य में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग पर और अधिक जोर देना होगा। इसके लिए किसानों, सरकारी संस्थाओं और वित्तीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

ग्रामीण आधारभूत संरचना के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण सड़कों, पुलों, सिंचाई परियोजनाओं, विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण सहायता दी गई है।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन आसान हुआ, कृषि उत्पादों की बाजार तक पहुंच बेहतर बनी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली। अधिकारियों ने कहा कि मजबूत आधारभूत संरचना किसी भी ग्रामीण विकास मॉडल की सबसे बड़ी आवश्यकता होती है और इस दिशा में नाबार्ड लगातार कार्य कर रहा है।

पैक्स कंप्यूटरीकरण से बदलेगी ग्रामीण बैंकिंग की तस्वीर

कार्यक्रम में भारत सरकार की पैक्स कंप्यूटरीकरण योजना का भी विशेष उल्लेख किया गया। बताया गया कि इस महत्वाकांक्षी योजना का कार्यान्वयन नाबार्ड के माध्यम से किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को पूरी तरह डिजिटल बनाना है ताकि किसानों को अधिक पारदर्शी, तेज और आधुनिक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटरीकरण के बाद ऋण वितरण, रिकॉर्ड प्रबंधन, लेखांकन और अन्य बैंकिंग प्रक्रियाएं अधिक सरल और प्रभावी होंगी। इससे किसानों को सेवाएं प्राप्त करने में कम समय लगेगा और सहकारी संस्थाओं की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।

जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आर्थिक असमानता बनी नई चुनौती

मुख्य महाप्रबंधक ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और प्राकृतिक आपदाओं का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आय की असमानता भी चिंता का विषय है।

उन्होंने नाबार्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे बदलती परिस्थितियों के अनुरूप नई सोच, नई तकनीक और बेहतर योजनाओं के साथ कार्य करें ताकि भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

सहकारी बैंकों ने नाबार्ड की भूमिका को बताया विकास की मजबूत नींव

कार्यक्रम में शामिल बिहार राज्य सहकारी बैंक, नालंदा जिला सहकारी बैंक, सीवान जिला सहकारी बैंक, गोपालगंज जिला सहकारी बैंक, पाटलिपुत्र जिला सहकारी बैंक और वैशाली जिला सहकारी बैंक के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश आज खाद्यान्न, सब्जी, फल और अन्य कृषि उत्पादों के उत्पादन में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इसमें किसानों की मेहनत, सरकारी नीतियों, सहकारी संस्थाओं और नाबार्ड के साझा प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने भविष्य में कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए नाबार्ड और सहकारी संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया। उनका मानना था कि यदि तकनीक, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ा जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

स्थापना दिवस समारोह के दौरान बिहार की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प को भी विशेष महत्व दिया गया। नाबार्ड के सहयोग से हाल ही में भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त करने वाले गया के पत्थरकट्टी शिल्प, नालंदा की बावनबूटी कला और भोजपुर की पीढ़िया पेंटिंग की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई।

प्रदर्शनी में मौजूद लोगों ने इन उत्पादों की गुणवत्ता, पारंपरिक निर्माण शैली और स्थानीय कारीगरों की मेहनत की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान मजबूत होगी, जिससे स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण विकास के नए दौर की ओर बढ़ रहा नाबार्ड

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले समय में नाबार्ड की भूमिका और भी व्यापक होने वाली है। डिजिटल तकनीक, जलवायु अनुकूल कृषि, ग्रामीण उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण, किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा, प्राकृतिक खेती और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने जैसे क्षेत्रों में संस्था की जिम्मेदारी लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार, वित्तीय संस्थाएं, सहकारी बैंक, किसान और स्थानीय समुदाय मिलकर काम करें तो ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। 45वें स्थापना दिवस का यह आयोजन केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं रहा, बल्कि भविष्य के ग्रामीण भारत की नई विकास यात्रा का संकल्प भी बनकर सामने आया।

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