iPhone 17 Pro से भी महंगा है BSNL का नया सैटेलाइट फोन, जानिए आखिर क्यों है इसकी कीमत ₹1.34 लाख

भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में एक ऐसा डिवाइस पेश किया है, जिसकी कीमत ने सभी को चौंका दिया है। बीएसएनएल का नया सैटेलाइट फोन 1,34,166 रुपये की कीमत के साथ लॉन्च किया गया है, जो कई प्रीमियम स्मार्टफोन्स, यहां तक कि iPhone 17 Pro से भी महंगा है। पहली नजर में यह फोन सामान्य फीचर फोन जैसा दिखाई देता है, लेकिन इसकी असली ताकत इसकी अत्याधुनिक सैटेलाइट कम्युनिकेशन तकनीक है। यही तकनीक इसे सामान्य स्मार्टफोन से पूरी तरह अलग बनाती है।

यह फोन खास तौर पर उन क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है, जहां मोबाइल टावरों का नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता। पहाड़ी इलाकों, समुद्र के बीच, जंगलों, सीमावर्ती क्षेत्रों और प्राकृतिक आपदा प्रभावित स्थानों में भी यह फोन बिना किसी मोबाइल टावर के काम कर सकता है। ऐसे में यह केवल एक मोबाइल फोन नहीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भरोसेमंद संचार का माध्यम माना जा रहा है।

बीएसएनएल ने इस डिवाइस को ग्लोबल सैटेलाइट फोन सर्विस (GSPS) के तहत लॉन्च किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी मोबाइल टावर पर निर्भर नहीं रहता। जहां सामान्य स्मार्टफोन नेटवर्क उपलब्ध न होने पर पूरी तरह बेकार हो जाते हैं, वहीं यह सैटेलाइट फोन सीधे अंतरिक्ष में मौजूद संचार उपग्रहों से जुड़कर कॉल और संदेश भेजने की सुविधा देता है।

इसी वजह से यह फोन उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है, जिन्हें अक्सर ऐसे क्षेत्रों में काम करना पड़ता है जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता। सेना, सीमा सुरक्षा बल, आपदा प्रबंधन एजेंसियां, समुद्री जहाजों पर कार्यरत कर्मचारी, तेल और गैस परियोजनाओं से जुड़े विशेषज्ञ, खनन उद्योग, पर्वतारोही, ट्रेकर्स, तीर्थयात्री और दूर-दराज के इलाकों में कार्य करने वाले सरकारी कर्मचारी इसके प्रमुख उपयोगकर्ताओं में शामिल हो सकते हैं।

बीएसएनएल के अनुसार किसी प्राकृतिक आपदा, भूकंप, बाढ़, चक्रवात या अन्य आपातकालीन स्थिति में अक्सर मोबाइल टावर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे समय में सामान्य मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह बंद हो जाता है और लोगों का संपर्क टूट जाता है। लेकिन सैटेलाइट फोन सीधे उपग्रहों से जुड़ने के कारण ऐसे हालात में भी संचार की सुविधा बनाए रखता है। यही कारण है कि दुनिया भर में आपदा राहत एजेंसियां और सुरक्षा बल सैटेलाइट फोन का उपयोग करते हैं।

इस फोन में मजबूत और टिकाऊ डिजाइन दिया गया है, ताकि कठिन परिस्थितियों में भी यह सुरक्षित तरीके से काम कर सके। इसमें लंबी बैटरी लाइफ, स्पष्ट वॉयस कॉलिंग, एसएमएस सुविधा और इमरजेंसी SOS फीचर जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। इसे ऐसे वातावरण को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है जहां सामान्य स्मार्टफोन जल्दी खराब हो सकते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इसकी कीमत इतनी अधिक क्यों रखी गई है। इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण इसकी विशेष तकनीक है। सामान्य मोबाइल फोन कॉल और इंटरनेट के लिए आसपास लगे मोबाइल टावरों से जुड़ते हैं। लेकिन सैटेलाइट फोन को सीधे अंतरिक्ष में मौजूद संचार उपग्रहों से संपर्क स्थापित करना पड़ता है। इसके लिए इसमें विशेष हार्डवेयर, उच्च क्षमता वाला एंटीना, एडवांस रेडियो सिस्टम और अत्याधुनिक सैटेलाइट कम्युनिकेशन तकनीक का उपयोग किया जाता है। यही तकनीकी जटिलता इसकी लागत को काफी बढ़ा देती है।

इसके अलावा सैटेलाइट नेटवर्क का संचालन भी बेहद महंगा होता है। बीएसएनएल इस सेवा के लिए अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट नेटवर्क का उपयोग करता है। उपग्रहों के संचालन, रखरखाव और वैश्विक नेटवर्क सेवाओं पर होने वाला खर्च भी फोन की कीमत को प्रभावित करता है। यही वजह है कि सैटेलाइट फोन की कीमत सामान्य स्मार्टफोन की तुलना में कई गुना अधिक होती है।

एक और बड़ा कारण इसका सीमित उत्पादन है। स्मार्टफोन की तरह सैटेलाइट फोन करोड़ों की संख्या में नहीं बनाए जाते। इनका उपयोग विशेष क्षेत्रों तक सीमित रहता है, इसलिए इनका उत्पादन भी कम मात्रा में होता है। कम उत्पादन के कारण प्रति यूनिट निर्माण लागत काफी बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर इसकी बाजार कीमत पर दिखाई देता है।

बीएसएनएल का यह फोन खरीद लेने के बाद भी उपयोगकर्ताओं का खर्च समाप्त नहीं होता। इसे चलाने के लिए अलग से सैटेलाइट सेवा योजना लेनी होगी। यह सेवा सामान्य मोबाइल रिचार्ज की तुलना में काफी महंगी होती है क्योंकि इसमें सैटेलाइट नेटवर्क का उपयोग किया जाता है। कॉलिंग और मैसेजिंग के लिए उपयोगकर्ताओं को विशेष सेवा शुल्क भी देना होगा।

कई लोग इस फोन की तुलना Apple के iPhone में मिलने वाले Satellite फीचर से कर रहे हैं, लेकिन दोनों तकनीकों में बड़ा अंतर है। iPhone में उपलब्ध Satellite सुविधा केवल आपातकालीन परिस्थितियों के लिए विकसित की गई है। यदि किसी स्थान पर मोबाइल नेटवर्क और वाई-फाई उपलब्ध नहीं हो, तो उपयोगकर्ता केवल इमरजेंसी सेवाओं से संपर्क कर सकता है या अपनी लोकेशन साझा कर सकता है। इससे नियमित वॉयस कॉल या सामान्य संदेश सेवा उपलब्ध नहीं होती।

इसके विपरीत बीएसएनएल का सैटेलाइट फोन पूरी तरह सैटेलाइट आधारित संचार प्रणाली पर काम करता है। इसमें उपयोगकर्ता नेटवर्क रहित क्षेत्रों में भी सामान्य वॉयस कॉल कर सकता है, एसएमएस भेज सकता है और नियमित संचार बनाए रख सकता है। यही कारण है कि यह केवल आपातकालीन डिवाइस नहीं बल्कि पूर्ण संचार उपकरण के रूप में विकसित किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं का विस्तार तेजी से होगा। दूर-दराज के गांवों, सीमावर्ती इलाकों, समुद्री क्षेत्रों और आपदा प्रभावित स्थानों में ऐसी तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां भी इस दिशा में लगातार नई पहल कर रही हैं।

हालांकि यह फोन आम उपभोक्ताओं के लिए नहीं बनाया गया है। इसकी कीमत और सेवा शुल्क को देखते हुए इसका उपयोग मुख्य रूप से सरकारी एजेंसियां, सुरक्षा बल, औद्योगिक संस्थान, समुद्री क्षेत्र, आपदा प्रबंधन संगठन और ऐसे पेशेवर लोग करेंगे जिन्हें हर परिस्थिति में संचार सुविधा की आवश्यकता होती है।

बीएसएनएल का नया सैटेलाइट फोन भारत में संचार तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसकी कीमत भले ही iPhone 17 Pro से अधिक हो, लेकिन इसका उद्देश्य प्रीमियम स्मार्टफोन से प्रतिस्पर्धा करना नहीं है। यह उन परिस्थितियों के लिए विकसित किया गया है जहां सामान्य मोबाइल फोन पूरी तरह बेकार साबित हो जाते हैं। अत्याधुनिक सैटेलाइट तकनीक, मजबूत निर्माण, नेटवर्क रहित क्षेत्रों में भी संचार की क्षमता और विशेष उपयोगिता ही इसकी ऊंची कीमत की सबसे बड़ी वजह है।

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