“मैं गांधी नहीं, सिर्फ एक जिम्मेदार नागरिक हूं…” — अनशन के 14वें दिन सोनम वांगचुक की देशवासियों से भावुक अपील

नई दिल्ली: लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने देशवासियों से आंदोलन की कमान खुद संभालने की अपील करते हुए कहा है कि उन्हें किसी “आधुनिक गांधी” या “हीरो” के रूप में न देखा जाए। उन्होंने कहा कि वह केवल एक सामान्य नागरिक हैं, जो अपना संवैधानिक कर्तव्य निभा रहे हैं। अब समय आ गया है कि हर नागरिक खुद आगे आए और जिम्मेदारी निभाए।

अनिश्चितकालीन अनशन का 14वां दिन, 7.5 किलो घटा वजन

परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में जंतर-मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ के धरने में शामिल सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन अब 14वें दिन में पहुंच गया है।

संगठन द्वारा जारी हेल्थ अपडेट के अनुसार:

  • वजन: 7.5 किलो कम
  • ब्लड प्रेशर: 106/74 mm Hg
  • स्वास्थ्य में कमजोरी के बावजूद आंदोलन जारी रखने का संकल्प बरकरार।

“मुझे आधुनिक गांधी मत कहिए”

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि लोग उन्हें “21वीं सदी का गांधी” या “हीरो” कह रहे हैं, लेकिन यह उन्हें असहज करता है।

उन्होंने कहा:

“मैं न गांधी हूं और न कोई हीरो। मैं सिर्फ एक साधारण नागरिक हूं जिसने अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की है। कृपया किसी और में हीरो मत खोजिए, अपने जीवन के हीरो खुद बनिए।”

छात्रों की आत्महत्या पर जताई चिंता

सोनम वांगचुक ने परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों से परेशान होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि पीड़ित छात्र आपके परिवार का सदस्य होता, तो शायद आप भी आज सड़क पर होते।

उन्होंने लोगों से अपील की कि:

  • यदि संभव हो तो जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन करें।
  • जो लोग दिल्ली नहीं आ सकते, वे अपने शहर में एक दिन का उपवास रखकर समर्थन दर्ज कराएं।

20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान

वांगचुक ने मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को प्रस्तावित शांतिपूर्ण “संसद मार्च” में बड़ी संख्या में लोगों से शामिल होने की अपील की।

उन्होंने कहा,

“आपको हमारी तरह 24 दिन भूखे रहने की जरूरत नहीं है। खाना खाकर आइए, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर संसद मार्च में जरूर शामिल होइए।”

जबरन हटाने की कोशिश हुई तो होगा अधिकारों का उल्लंघन

वांगचुक ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उन्हें जंतर-मंतर से जबरन हटाया गया तो यह उनके शांतिपूर्ण विरोध और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।

उन्होंने कहा कि वह अपनी इच्छा से धरना स्थल पर हैं और आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।

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