रेल रोको आंदोलन और रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, पूर्व रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

कोलकाता: पूर्व रेलवे ने रेलवे संपत्ति की सुरक्षा, यात्रियों की निर्बाध यात्रा और रेल परिचालन को सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से आम नागरिकों से महत्वपूर्ण अपील जारी की है। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भारतीय रेल देश की साझा राष्ट्रीय धरोहर है और इसकी सुरक्षा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि कोई व्यक्ति ‘रेल रोको’ जैसे आंदोलनों के माध्यम से रेल परिचालन बाधित करता है, यात्रियों की सुरक्षा से समझौता करता है या रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करता है, तो उसके विरुद्ध संशोधित कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व रेलवे ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि रेलवे केवल परिवहन का साधन नहीं है, बल्कि देश की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था की जीवनरेखा है। प्रतिदिन लाखों लोग रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा, व्यवसाय और पारिवारिक जरूरतों के लिए रेल यात्रा करते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का अवरोध केवल रेलवे प्रशासन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि लाखों यात्रियों के जीवन पर सीधा असर डालता है।

पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर ने कहा कि भारतीय रेल देश की जनता की मेहनत और करदाताओं के योगदान से निर्मित राष्ट्रीय संपत्ति है। इसकी सुरक्षा करना केवल रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन या विरोध प्रदर्शन के दौरान रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या रेल सेवाओं को बाधित करना लाखों निर्दोष यात्रियों की परेशानी का कारण बनता है।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि एक ट्रेन के रुक जाने का असर केवल उस ट्रेन तक सीमित नहीं रहता। इसके कारण कई अन्य ट्रेनों का परिचालन भी प्रभावित होता है। इससे अस्पतालों तक पहुंचने वाले मरीज, परीक्षा देने जा रहे छात्र, रोजाना काम पर जाने वाले कर्मचारी, व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े लोग और अपने परिवार से मिलने जा रहे यात्री भी गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं।

इसी प्रकार मालगाड़ियों के परिचालन में बाधा आने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। चिकित्सा सामग्री, खाद्यान्न, औद्योगिक सामान और अन्य आवश्यक वस्तुओं के परिवहन पर इसका सीधा असर पड़ता है। इसलिए रेलवे प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन में रेल सेवाओं को बाधित करने से बचें।

पूर्व रेलवे ने जानकारी दी कि जन विश्वास अधिनियम, 2026 के तहत रेलवे अधिनियम, 1989 की कई धाराओं में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। इन संशोधनों को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया जा चुका है। इनका उद्देश्य रेलवे परिसरों में अनुशासन बनाए रखना, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करना है।

संशोधित प्रावधानों के अनुसार रेलवे अधिनियम की धारा 145 को और अधिक सख्त बनाया गया है। यदि कोई व्यक्ति रेलवे परिसर या ट्रेन में नशे की हालत में पाया जाता है, यात्रियों को परेशान करता है, अभद्र व्यवहार करता है, अशोभनीय भाषा का प्रयोग करता है या रेलवे की सुविधाओं में बाधा उत्पन्न करता है, तो उस पर तत्काल 1000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

यदि संबंधित व्यक्ति चेतावनी के बावजूद अपना व्यवहार नहीं बदलता या दोबारा ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ छह महीने तक की जेल, 5000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों प्रकार की सजा का प्रावधान किया गया है। रेलवे का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित और सम्मानजनक यात्रा का वातावरण उपलब्ध कराना है।

रेलवे कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार या उनके वैधानिक कार्यों में बाधा पहुंचाने से संबंधित धारा 146 के अंतर्गत भी दंड को और कठोर बनाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि रेलवे कर्मचारी दिन-रात यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए कार्य करते हैं। ऐसे में उनके कार्य में बाधा डालना पूरे रेल संचालन को प्रभावित करता है। इसलिए इस प्रकार की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसी तरह रेलवे प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों के उल्लंघन से संबंधित धारा 155 के तहत भी जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है। नए प्रावधानों के अनुसार नियमों के उल्लंघन पर निश्चित आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। यदि दोषी निर्धारित जुर्माना जमा नहीं करता है तो सक्षम न्यायालय अतिरिक्त जुर्माना लगाने का भी अधिकार रखता है।

रेलवे परिसरों में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 159 के तहत भी नियमों को सख्त किया गया है। यदि कोई वाहन चालक रेलवे कर्मचारी या पुलिस अधिकारी के वैध निर्देशों का पालन नहीं करता अथवा रेलवे परिसर में यातायात बाधित करता है, तो उसके विरुद्ध आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय अतिरिक्त कार्रवाई भी कर सकता है।

पूर्व रेलवे ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की शिकायत, मांग या समस्या के समाधान के लिए प्रशासन हमेशा संवाद के लिए तैयार है। नागरिक अपनी समस्याओं और सुझावों को रेलवे के अधिकृत माध्यमों के जरिए संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं। रेलवे ने लोगों से आग्रह किया है कि किसी भी मुद्दे का समाधान शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से किया जाए तथा ऐसी गतिविधियों से बचा जाए जिनसे आम यात्रियों को परेशानी हो।

रेलवे प्रशासन का कहना है कि भारतीय रेल केवल पटरियों, इंजन और डिब्बों का नेटवर्क नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की भावनाओं, उम्मीदों और सपनों को जोड़ने वाली व्यवस्था है। प्रतिदिन लाखों लोग अपने जीवन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए रेलवे पर निर्भर रहते हैं। इसलिए रेलवे सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न करना समाज के बड़े वर्ग को प्रभावित करता है।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि रेलगाड़ियां केवल यात्रियों को उनके गंतव्य तक नहीं पहुंचातीं, बल्कि देशवासियों की उम्मीदों और सपनों को भी आगे बढ़ाती हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे ‘रेल रोको’ जैसे आंदोलनों या रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से दूर रहें। उन्होंने कहा कि क्षणिक आक्रोश के कारण किसी दूसरे व्यक्ति की जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण यात्रा प्रभावित हो सकती है।

पूर्व रेलवे ने दोहराया कि यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और निर्बाध रेल सेवा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। रेलवे प्रशासन नागरिकों के साथ संवाद और सहयोग के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, रेल परिचालन बाधित करने या यात्रियों की सुरक्षा से समझौता करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ संशोधित कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई करने में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। रेलवे ने सभी नागरिकों से अपील की है कि राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा करें और सुरक्षित, शांतिपूर्ण तथा व्यवस्थित रेल यात्रा सुनिश्चित करने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

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