
जमालपुर: भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति देते हुए पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। जमालपुर लोको शेड में पहली बार WAG-7 श्रेणी के विद्युत इंजन पर स्वदेशी रूफ-माउंटेड एयर कंडीशनिंग (आरएमएसी) प्रणाली सफलतापूर्वक स्थापित की गई है। यह उपलब्धि न केवल रेलवे की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करती है, बल्कि लोको पायलटों के कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में पूरी की गई। इस पहल का उद्देश्य लोको पायलटों को विशेष रूप से भीषण गर्मी के मौसम में बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराना, परिचालन क्षमता बढ़ाना तथा स्वदेशी तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करना है। भारतीय रेलवे लगातार ऐसी तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रहा है जो देश में विकसित हों और परिचालन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाएं।
जमालपुर लोको शेड पूर्व रेलवे के महत्वपूर्ण अनुरक्षण केंद्रों में शामिल है। यहां वर्तमान समय में WAG-7 श्रेणी के कुल 59 विद्युत इंजनों का नियमित अनुरक्षण किया जाता है। इनमें से 10 इंजनों में अब तक एयर कंडीशनिंग प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। इसी क्रम में पहली बार स्वदेशी रूफ-माउंटेड एयर कंडीशनिंग प्रणाली को विद्युत इंजन संख्या 28677 पर सफलतापूर्वक लगाया गया, जिसे रेलवे के लिए एक उल्लेखनीय तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।
रेलवे के अनुसार यह स्थापना कार्य 30 जून 2026 को पूरा किया गया। परियोजना को सफल बनाने में वरिष्ठ अनुभाग अभियंता प्रभाष और कनिष्ठ अभियंता शेख जमालुद्दीन अहमद की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों अधिकारियों ने लोको शेड के तकनीकी कर्मचारियों के सहयोग से पूरी प्रक्रिया को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा किया। परियोजना के दौरान सभी तकनीकी चरणों की बारीकी से निगरानी की गई, ताकि इंजन की कार्यक्षमता और सुरक्षा पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े।
दोनों चालक कक्षों में एयर कंडीशनिंग प्रणाली स्थापित करने का कार्य वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता (डीजल) कृष्ण कुमार दास के पर्यवेक्षण में किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार की स्थापना के लिए कोई विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध नहीं था, लेकिन जमालपुर लोको शेड के इंजीनियरों और कर्मचारियों ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता, अनुभव और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफल बनाया। यह भारतीय रेलवे की आंतरिक इंजीनियरिंग क्षमता और नवाचार की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि पूरी प्रक्रिया में लोको शेड की विभिन्न तकनीकी इकाइयों ने मिलकर कार्य किया। ई-1, ई-2, मैकेनिकल, वेल्डिंग और ग्राइंडिंग अनुभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया। सभी विभागों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया, जिसके परिणामस्वरूप निर्धारित समय के भीतर परियोजना सफलतापूर्वक पूरी हो सकी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह टीमवर्क और तकनीकी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।
नई रूफ-माउंटेड एयर कंडीशनिंग प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ लोको पायलटों को मिलेगा। सामान्यतः गर्मियों के दौरान इंजन के चालक कक्ष का तापमान काफी अधिक हो जाता है, जिससे लंबे समय तक कार्य करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एयर कंडीशनिंग प्रणाली स्थापित होने के बाद चालक कक्ष के अंदर तापमान नियंत्रित रहेगा, जिससे लोको पायलटों को अधिक आरामदायक वातावरण मिलेगा और वे लंबे समय तक बेहतर एकाग्रता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगे।
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि चालक कक्ष में बेहतर तापमान नियंत्रण केवल सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह परिचालन सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। अत्यधिक गर्मी के कारण चालक की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जबकि नियंत्रित तापमान उन्हें अधिक सतर्क और सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। इससे ट्रेन संचालन की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों में सुधार होने की संभावना रहती है।
भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से लोको पायलटों के कार्यस्थल को आधुनिक बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। पहले कई इंजनों में पारंपरिक एयर कंडीशनिंग प्रणाली लगाई गई थी, लेकिन रूफ-माउंटेड एयर कंडीशनिंग प्रणाली अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी और आधुनिक मानी जाती है। इससे चालक कक्ष के भीतर स्थान का बेहतर उपयोग संभव होता है और तापमान नियंत्रण भी अधिक संतुलित तरीके से किया जा सकता है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना की सफलता भविष्य में अन्य इंजनों में भी इसी प्रकार की तकनीक अपनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। यदि यह प्रणाली अपेक्षित परिणाम देती है, तो आने वाले समय में अधिक संख्या में WAG-7 और अन्य श्रेणी के इंजनों में भी स्वदेशी रूफ-माउंटेड एयर कंडीशनिंग प्रणाली स्थापित की जा सकती है। इससे भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान को और गति मिलेगी।
यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान की भावना को भी मजबूत करती है। स्वदेशी तकनीक का उपयोग कर रेलवे ने यह साबित किया है कि देश के इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी जटिल परियोजनाओं को भी अपने संसाधनों और विशेषज्ञता के बल पर सफलतापूर्वक पूरा कर सकते हैं। इससे आयातित तकनीकों पर निर्भरता कम होगी और रेलवे के रखरखाव तथा संचालन की लागत में भी कमी आने की संभावना है।
मालदा मंडल का कहना है कि कर्मचारी कल्याण और परिचालन उत्कृष्टता उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। आधुनिक तकनीक को अपनाने के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराना भी रेलवे की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। लोको पायलटों को आरामदायक कार्यस्थल मिलने से उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, जिसका सकारात्मक प्रभाव रेल परिचालन पर भी पड़ेगा।
रेलवे अधिकारियों ने इस उपलब्धि को जमालपुर लोको शेड के अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास, तकनीकी दक्षता और नवाचार की सोच का परिणाम बताया है। सीमित संसाधनों और विशेष प्रशिक्षण के अभाव के बावजूद टीम ने जिस प्रकार इस परियोजना को सफल बनाया, वह भारतीय रेलवे की आंतरिक क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता का मजबूत उदाहरण है।
जमालपुर लोको शेड में WAG-7 विद्युत इंजन पर पहली बार स्वदेशी रूफ-माउंटेड एयर कंडीशनिंग प्रणाली की सफल स्थापना न केवल मालदा मंडल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण, स्वदेशी तकनीक के विस्तार और कर्मचारी हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। आने वाले समय में इस पहल से रेलवे के अन्य मंडलों को भी नई तकनीक अपनाने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।


