गोपालगंज में पुलिस पर बर्बरता का आरोप, मिठाई कारोबारी की बंदूक की बट से पिटाई; एसडीपीओ ने जांच के दिए आदेश

गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया थाना क्षेत्र स्थित बथुआ बाजार में पुलिस की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुक्रवार सुबह क्यूआरटी (त्वरित प्रतिक्रिया दल) के जवानों पर एक मिठाई व्यवसायी के साथ कथित मारपीट करने का आरोप लगा है। आरोप है कि जवानों ने व्यवसायी को बंदूक की बट से पीट दिया, जिससे उसके सिर और नाक में गंभीर चोटें आईं। घायल हालत में व्यवसायी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों में आक्रोश फैल गया और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई। इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों ने जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

घटना फुलवरिया थाना क्षेत्र के बथुआ बाजार में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह के समय क्यूआरटी के दो जवान बाजार क्षेत्र में एक युवक को पकड़े हुए थे। पुलिसकर्मियों का दावा था कि युवक शराब के नशे में था और उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान स्थानीय मिठाई व्यवसायी मनीष कुमार वहां पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी लेने लगे। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि यदि युवक ने शराब पी है तो उसका परीक्षण कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।

आरोप है कि बहस के बाद पुलिसकर्मी नाराज हो गए और व्यवसायी को भी शराब पीने का आरोप लगाते हुए जबरन अपने साथ ले गए। इसके बाद बाजार के बीच कथित तौर पर उसकी पिटाई की गई। व्यवसायी का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बंदूक की बट से उसके सिर पर कई वार किए, जिससे उसका सिर फट गया और नाक से भी खून बहने लगा। घायल की हालत देखकर आसपास मौजूद लोगों ने विरोध जताया और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

घटना की सूचना मिलने पर फुलवरिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय पुलिस ने घायल व्यवसायी को डायल-112 की सहायता से अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसका इलाज शुरू किया। प्राथमिक उपचार के दौरान उसके सिर और नाक में चोट की पुष्टि हुई। डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।

मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य तब सामने आया जब पुलिस ने घायल व्यवसायी की ब्रेथ एनालाइजर से जांच कराई। थाना प्रभारी कुंदन कुमार के अनुसार जांच में शराब पीने की पुष्टि नहीं हुई। यानी जिस आरोप के आधार पर व्यवसायी को रोका गया था, उसकी पुष्टि नहीं हो सकी। इसके बाद यह सवाल और गंभीर हो गया कि यदि व्यवसायी ने शराब का सेवन नहीं किया था तो उसके साथ कथित मारपीट क्यों की गई।

घायल व्यवसायी मनीष कुमार ने आरोप लगाया कि घटना के समय अपाचे मोटरसाइकिल पर तीन लोग मौजूद थे। उनके अनुसार दो पुलिसकर्मी वर्दी में थे, जबकि एक व्यक्ति सादे कपड़ों में था। उन्होंने आरोप लगाया कि तीनों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की और बंदूक की बट से हमला किया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

घटना के बाद बथुआ बाजार के व्यापारियों में नाराजगी देखी गई। स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि बाजार में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों का व्यवहार आम लोगों के साथ मर्यादित होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

मामले को गंभीरता से लेते हुए हथुआ अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) आनंद मोहन गुप्ता ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उनके पर्यवेक्षण में दो क्यूआरटी जवानों की तैनाती लाइन बाजार और बथुआ बाजार क्षेत्र में व्यवसायियों की सुरक्षा के लिए की गई थी। उन्हें शराब जांच या किसी अन्य प्रकार की आपराधिक जांच करने का अधिकार नहीं दिया गया था। यदि जांच में यह पाया जाता है कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की है या नियमों का उल्लंघन किया है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और संबंधित पुलिसकर्मियों से पूछताछ के आधार पर पूरी घटना की समीक्षा की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन प्रत्येक कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति पर शराब पीने का संदेह हो तो उसकी वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए। बिना पर्याप्त आधार के बल प्रयोग के आरोप सामने आने पर स्वतंत्र जांच आवश्यक मानी जाती है।

फिलहाल घायल व्यवसायी का इलाज जारी है और पुलिस विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों की निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।

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