बिहार में स्कूल बसों की होगी ऑनलाइन निगरानी: अब हर वाहन की लाइव लोकेशन पर रहेगी नजर, बच्चों की सुरक्षा होगी और मजबूत

पटना | बिहार सरकार ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब राज्यभर में चलने वाली स्कूल बसों और वैन की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत सभी स्कूल वाहनों को एक डिजिटल पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे उनकी गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखी जा सकेगी।

VLTS से जुड़ेंगे सभी स्कूल वाहन

नई व्यवस्था के अनुसार सभी स्कूल बसों और वैन में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) लगाना अनिवार्य होगा।

इस तकनीक की मदद से—

  • वाहन की लाइव लोकेशन,
  • तय मार्ग (रूट),
  • वाहन की आवाजाही,
  • और संचालन की लगातार निगरानी की जा सकेगी।

यदि कोई वाहन निर्धारित मार्ग से हटता है या किसी आपात स्थिति में फंसता है, तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचना मिल जाएगी।

ट्रैफिक एसपी और डीटीओ करेंगे निगरानी

स्कूल वाहनों की निगरानी की जिम्मेदारी जिला स्तर पर—

  • ट्रैफिक एसपी
  • जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO)

को दी जाएगी।

दोनों अधिकारी स्कूल वाहनों के पंजीकरण, सत्यापन और सुरक्षा मानकों के पालन की नियमित निगरानी करेंगे।

बच्चों की सुरक्षा होगी प्राथमिकता

सरकार का कहना है कि कई बार स्कूल वाहनों से जुड़ी घटनाओं की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती थी।

अब डिजिटल मॉनिटरिंग के कारण—

  • हर वाहन की गतिविधि रिकॉर्ड होगी,
  • किसी भी संदिग्ध स्थिति की तुरंत जानकारी मिलेगी,
  • और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी।

फिटनेस, बीमा और परमिट पर भी रहेगी नजर

नई प्रणाली केवल लोकेशन ट्रैकिंग तक सीमित नहीं होगी।

इसके जरिए वाहन की—

  • फिटनेस सर्टिफिकेट,
  • बीमा (Insurance),
  • परमिट,
  • और अन्य आवश्यक दस्तावेजों

की वैधता पर भी लगातार निगरानी रखी जाएगी।

यदि किसी वाहन का फिटनेस या बीमा समाप्त हो जाता है, तो संबंधित विभाग को स्वतः सूचना मिल जाएगी।

सभी स्कूल होंगे पोर्टल से लिंक

राज्य के सभी सरकारी, निजी और संस्थागत स्कूलों की बसों एवं वैन को चरणबद्ध तरीके से इस डिजिटल पोर्टल से जोड़ा जाएगा।

स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिकों को निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिससे राज्य सरकार के पास स्कूल वाहनों का केंद्रीकृत डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

पहले से बसों और टैक्सियों पर लागू है तकनीक

सरकार पहले से यात्री बसों और टैक्सियों की निगरानी तकनीकी माध्यमों से कर रही है। अब उसी व्यवस्था का विस्तार स्कूल वाहनों तक किया जा रहा है, ताकि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके।

अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ेगा

सरकार का मानना है कि डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद स्कूल परिवहन व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनेगी।

वाहनों की लाइव लोकेशन, दस्तावेजों की स्थिति और संचालन संबंधी सभी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहने से अनियमितताओं और दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इससे अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ेगा और बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित स्कूल परिवहन व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।

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