श्रावणी मेला 2026: कांवरिया पथ पर हर 2-3 किलोमीटर पर स्वास्थ्य शिविर, एएलएस और बीएलएस एंबुलेंस रहेंगी तैनात, स्वास्थ्य मंत्री ने तैयारियों की समीक्षा की

श्रावणी मेला 2026 को सुरक्षित, व्यवस्थित और स्वास्थ्य सुविधाओं से सुसज्जित बनाने के लिए बिहार स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए विभाग ने राज्य के 14 जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने विभागीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिया कि मेले के दौरान किसी भी श्रद्धालु को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से तैयारियां पूरी करने और प्रत्येक स्तर पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

पटना स्थित स्वास्थ्य विभाग के सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से श्रावणी मेला से जुड़े 14 जिलों के सिविल सर्जनों ने भी बैठक में भाग लिया और अपने-अपने जिलों में चल रही तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य शिविरों, चिकित्सकों, दवाओं, एंबुलेंस और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की व्यापक व्यवस्था की जा रही है।

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया कि सुल्तानगंज-देवघर कांवरिया पथ सहित प्रमुख मेला क्षेत्रों में प्रत्येक दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर अस्थायी स्वास्थ्य शिविर स्थापित किए जाएंगे। इन शिविरों में चिकित्सकों के साथ एएनएम, पैरामेडिकल कर्मी और अन्य स्वास्थ्यकर्मी चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेंगे। शिविरों में प्राथमिक उपचार, आवश्यक दवाएं, ऑक्सीजन, बेड और अन्य जरूरी चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रहेंगे ताकि किसी भी श्रद्धालु को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके।

स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी स्वास्थ्य शिविर पूरी तरह कार्यशील रहें और वहां पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित चिकित्साकर्मी मौजूद हों। उन्होंने कहा कि श्रावणी मेला बिहार का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, जिसमें राज्य ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।

बैठक के दौरान आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और मजबूत बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। विभाग ने निर्णय लिया कि मेले के दौरान एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस (ALSA) और बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस (BLSA) पर्याप्त संख्या में तैनात की जाएंगी। इन एंबुलेंसों के माध्यम से गंभीर मरीजों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाया जाएगा ताकि समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निःशुल्क एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य सहायता से जुड़े टोल फ्री नंबर भी सक्रिय रखने का निर्णय लिया है। किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालु 102 नंबर पर कॉल कर मुफ्त एंबुलेंस सेवा प्राप्त कर सकेंगे। वहीं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, परामर्श और अन्य सहायता के लिए 104 टोल फ्री नंबर उपलब्ध रहेगा। विभाग का मानना है कि इन सेवाओं से श्रद्धालुओं को आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता मिल सकेगी।

बैठक में स्वास्थ्य संस्थानों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह तैयार रखी जाए। स्वास्थ्य शिविरों से रेफर होने वाले मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए आवश्यक दवाओं, चिकित्सकों और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से सर्पदंश और जलजनित रोगों से बचाव की तैयारियों पर भी जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी स्वास्थ्य शिविरों और अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम सीरम (ASVS) तथा एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) का पर्याप्त भंडारण रखा जाए। मानसून के दौरान सर्पदंश की घटनाओं की संभावना को देखते हुए यह व्यवस्था विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि दुर्घटनाओं की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था भी होनी चाहिए जिससे दुर्घटनाओं की संभावना न्यूनतम रहे। इसके लिए जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने बैठक में साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मेले में दुकान लगाने वाले सभी खाद्य विक्रेताओं को स्वच्छता के प्रति प्रशिक्षित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि श्रद्धालुओं को केवल सुरक्षित और शुद्ध खाद्य पदार्थ ही उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुरक्षा केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ भोजन और साफ-सफाई भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

विभाग ने बांका, भागलपुर, जमुई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, सारण, वैशाली, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, जहानाबाद, लखीसराय, मधुबनी, समस्तीपुर और सिवान सहित सभी संबंधित जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्रों की तैयारियों का विस्तृत प्रतिवेदन समय पर विभाग को उपलब्ध कराएं। साथ ही प्रत्येक जिले को अपनी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। कांवरिया पथ, स्वास्थ्य शिविरों और प्रमुख मेला स्थलों पर होर्डिंग, बैनर और पोस्टर लगाए जाएंगे। इन पर स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सावधानियां, प्राथमिक उपचार की जानकारी और संबंधित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के संपर्क नंबर भी प्रदर्शित किए जाएंगे ताकि जरूरत पड़ने पर श्रद्धालु तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।

स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न जिलों में चिकित्सकों, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की अतिरिक्त प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। जिन जिलों ने अतिरिक्त मानव संसाधन की मांग की है, वहां आवश्यकतानुसार कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। जिला कार्यक्रम प्रबंधकों, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों और प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधकों को नियमित निरीक्षण और निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की कमी को तुरंत दूर किया जा सके।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि विभाग का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित, सम्मानजनक और त्वरित चिकित्सा सुविधा देना है। उन्होंने कहा कि श्रावणी मेला आस्था का सबसे बड़ा पर्व है और इसमें शामिल होने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी तैयारियां समय से पूरी कर ली जाएं और मेले की अवधि के दौरान चौबीसों घंटे सतर्क रहकर कार्य किया जाए।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि व्यापक योजना, पर्याप्त स्वास्थ्य संसाधन, प्रशिक्षित चिकित्सा दल, मजबूत एंबुलेंस नेटवर्क और प्रभावी निगरानी व्यवस्था के माध्यम से श्रावणी मेला 2026 के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इससे न केवल आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटना संभव होगा, बल्कि पूरे आयोजन को सुरक्षित और सफल बनाने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।

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