भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी, नए प्राचार्य डॉ. विमलेश कुमार ने संभाला कार्यभार

भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। संस्थान के नवनियुक्त प्राचार्य डॉ. विमलेश कुमार ने कार्यभार संभालने के महज 24 घंटे के भीतर कॉलेज परिसर का व्यापक निरीक्षण कर विकास और शैक्षणिक सुधार का स्पष्ट रोडमैप सामने रखा। उन्होंने कहा कि कॉलेज में उपलब्ध प्रतिभाशाली शिक्षक, मेहनती विद्यार्थी और बेहतर शैक्षणिक माहौल इस संस्थान को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिला सकते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कॉलेज की आधारभूत सुविधाओं से लेकर शैक्षणिक गुणवत्ता तक हर क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से सुधार किया जाएगा।

कार्यभार ग्रहण करने के तुरंत बाद डॉ. विमलेश कुमार ने कॉलेज परिसर के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शैक्षणिक भवनों, प्रयोगशालाओं, कक्षाओं, प्रशासनिक कार्यालयों, परिसर की साफ-सफाई, आधारभूत संरचना और छात्रों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से बातचीत कर मौजूदा व्यवस्था की जानकारी ली तथा जिन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता महसूस हुई, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए डॉ. विमलेश कुमार ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहचान केवल उसकी इमारतों से नहीं होती, बल्कि वहां की शिक्षा व्यवस्था, शोध गतिविधियों, शिक्षकों की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की उपलब्धियों से होती है। उनका लक्ष्य भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट संस्थान के रूप में स्थापित करना है, जहां से निकलने वाले छात्र राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।

उन्होंने बताया कि इससे पहले वे लगभग तीन दशकों तक महाराष्ट्र के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इस लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने कहा कि बिहार में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यहां के विद्यार्थी मेहनती हैं और यदि उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले तो वे किसी भी राज्य के छात्रों से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की तकनीकी शिक्षा तेजी से आगे बढ़ रही है और अब इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने की आवश्यकता है।

डॉ. विमलेश कुमार ने कहा कि पहले इंजीनियरिंग संस्थानों के सामने योग्य शिक्षकों की कमी बड़ी चुनौती हुआ करती थी, लेकिन अब स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हो चुकी है। विभिन्न विषयों में प्रशिक्षित और अनुभवी फैकल्टी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में भी कई योग्य शिक्षक कार्यरत हैं, जिनकी विशेषज्ञता और अनुभव का लाभ विद्यार्थियों को मिल रहा है। यदि शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करें तो यह संस्थान देश के प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से छात्रों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी ताकत उसके विद्यार्थी होते हैं। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे केवल परीक्षा पास करने तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, तकनीकी कौशल और व्यावहारिक ज्ञान पर भी विशेष ध्यान दें। आधुनिक तकनीक के इस दौर में इंजीनियरिंग शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि उद्योगों और समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान तैयार करना भी है।

प्राचार्य ने बताया कि उनकी प्राथमिकताओं में सबसे पहले कॉलेज की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना शामिल है। उन्होंने कहा कि परिसर में जहां भी कमियां हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से दूर किया जाएगा। प्रयोगशालाओं को आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित करने, कक्षाओं की सुविधाओं में सुधार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों के लिए बेहतर अध्ययन वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना पर्याप्त नहीं होता। विद्यार्थियों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना भी आवश्यक है। इसके लिए उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय, प्रशिक्षण कार्यक्रम, इंटर्नशिप, कार्यशालाएं, तकनीकी संगोष्ठियां और शोध गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। उनका मानना है कि यदि छात्रों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा तो रोजगार के अवसर और बेहतर होंगे।

डॉ. विमलेश कुमार ने कहा कि कॉलेज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए शोध और नवाचार पर विशेष बल दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि शिक्षक और छात्रों को शोध परियोजनाओं में भाग लेने, तकनीकी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और नए आविष्कारों पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा और राष्ट्रीय स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा भी मजबूत होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज प्रशासन छात्रों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनेगा और उनके समाधान के लिए सकारात्मक पहल करेगा। विद्यार्थियों के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार किया जाएगा जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी शैक्षणिक या अन्य समस्याओं को प्रशासन के सामने रख सकें। उनका कहना था कि बेहतर संवाद और पारदर्शी व्यवस्था किसी भी संस्थान के विकास के लिए आवश्यक होती है।

प्राचार्य ने कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों से भी सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान का विकास सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। यदि शिक्षक, कर्मचारी और छात्र एक साझा लक्ष्य के साथ कार्य करेंगे तो संस्थान नई उपलब्धियां हासिल कर सकता है। उन्होंने सभी से टीम भावना के साथ कार्य करने और कॉलेज की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान देने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कॉलेज में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास, कौशल विकास, स्टार्टअप संस्कृति, उद्यमिता और नवाचार को भी बढ़ावा दिया जाएगा। विद्यार्थियों को केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और व्यावसायिक दक्षता विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। इससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।

कॉलेज प्रशासन की योजना है कि विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों, उद्योगों और शोध संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाकर विद्यार्थियों को अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसके अलावा प्लेसमेंट गतिविधियों को मजबूत करने, कैंपस भर्ती बढ़ाने और उद्योग जगत से संबंध मजबूत करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

डॉ. विमलेश कुमार ने विश्वास व्यक्त किया कि भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थी आने वाले समय में अपने गांव, जिले, राज्य और देश का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि संस्थान में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल सही दिशा, आधुनिक संसाधनों और सामूहिक प्रयासों की है। यदि सभी मिलकर ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करेंगे तो भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग और मजबूत पहचान स्थापित करने में सफल होगा।

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