
पटना | भोजपुर के बिलौटी गांव में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात को लेकर उठे राजनीतिक विवाद पर बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री अशोक चौधरी ने पहली बार खुलकर अपनी सफाई दी है। जदयू प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उनका बिलौटी दौरा किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना के तहत था।
“14 साल से मंत्री हूं, हाफ पैंट से राजनीति कर रहा हूं”
अशोक चौधरी ने कहा कि वे पिछले 14 वर्षों से मंत्री हैं और मैट्रिक के बाद से ही राजनीति में सक्रिय हैं।
उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक आदर्श डॉ. भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं।
“14 साल से मंत्री हूं। मैट्रिक के बाद से राजनीति में हूं। हाफ पैंट से ही राजनीति कर रहा हूं। मेरे तीन आदर्श हैं— बाबा साहब अंबेडकर, महात्मा गांधी और नीतीश कुमार। संवेदना जताना हमारी संवेदनशीलता दिखाता है।”
— अशोक चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री
बिलौटी क्यों गए थे मंत्री?
मंत्री ने कहा कि यदि किसी 75 वर्षीय पिता का जवान बेटा मर जाए, तो उसके परिवार के बीच जाकर ढाढ़स बंधाना राजनीति नहीं बल्कि मानवीय जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा कहते हैं कि “पूरा बिहार मेरा परिवार है”, उसी सोच के साथ वह लोगों के दुख-दर्द में शामिल होते हैं।
दौरे पर क्यों हुआ था विवाद?
भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद अशोक चौधरी बिलौटी गांव पहुंचे थे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी।
इसके बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या मंत्री सरकार या जदयू की ओर से आधिकारिक प्रतिनिधि बनकर गए थे।
वहीं जदयू के कई नेताओं ने भी इस दौरे से दूरी बना ली।
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने स्पष्ट कहा था कि अशोक चौधरी को न तो सरकार ने भेजा था और न ही पार्टी ने।
एनकाउंटर की न्यायिक जांच जारी
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच राज्य सरकार ने मामले की न्यायिक जांच का आदेश दिया है।
पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित आयोग भोजपुर पहुंचकर जांच शुरू कर चुका है। आयोग पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर की पूरी परिस्थितियों की जांच कर रहा है।
सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर एनडीए के नेताओं के अलग-अलग बयानों से सरकार पहले ही विपक्ष के निशाने पर है।
अब अशोक चौधरी ने स्पष्ट किया है कि उनका बिलौटी दौरा पूरी तरह मानवीय संवेदना के आधार पर था, न कि किसी राजनीतिक संदेश के लिए।
अब सबकी नजर न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे इस पूरे मामले की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।


