सीवान के उत्पाद निरीक्षक पर आय से अधिक संपत्ति का मामला, पटना, मुंगेर और सीवान समेत पांच ठिकानों पर EOU की बड़ी कार्रवाई

बिहार में भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के मामलों पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को सीवान में तैनात उत्पाद निरीक्षक अंकेश राज गौंड के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में बड़ी कार्रवाई की गई। ईओयू की टीम ने एक साथ पटना, मुंगेर और सीवान स्थित पांच अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई से संबंधित इलाकों में हलचल मच गई और प्रशासनिक महकमे में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया।

जानकारी के अनुसार आर्थिक अपराध इकाई को प्रारंभिक जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर उत्पाद निरीक्षक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया। जांच में यह बात सामने आई कि उनके पास ज्ञात आय के मुकाबले काफी अधिक संपत्ति होने की आशंका है। इसके बाद जांच एजेंसी ने न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त किया और निर्धारित प्रक्रिया के तहत विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी।

ईओयू की टीम ने सबसे पहले संबंधित परिसरों को अपने नियंत्रण में लिया और उसके बाद तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने मकानों, कार्यालयों और अन्य परिसरों में मौजूद दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, निवेश संबंधी कागजात, अचल संपत्ति के दस्तावेज, नगदी तथा अन्य वित्तीय अभिलेखों की बारीकी से जांच शुरू की। टीम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित संपत्तियां किस स्रोत से अर्जित की गईं और क्या वे वैध आय के अनुरूप हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार प्रारंभिक जांच में लगभग दो करोड़ 36 लाख 31 हजार रुपये की कथित अतिरिक्त संपत्ति का मामला सामने आया है। यह राशि संबंधित अधिकारी की ज्ञात आय की तुलना में करीब 201.97 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही सामने आएगा।

छापेमारी की कार्रवाई पटना, मुंगेर और सीवान के कुल पांच ठिकानों पर एक साथ की गई। इनमें पटना के दानापुर क्षेत्र स्थित आवास, मुंगेर के चंदनबाग स्थित पैतृक घर, लल्लूपोखर स्थित एक व्यावसायिक भवन, सीवान स्थित उत्पाद विभाग का कार्यालय तथा सीवान शहर में किराये का आवास शामिल है। सभी स्थानों पर अलग-अलग टीमों को तैनात किया गया ताकि एक साथ प्रभावी ढंग से तलाशी अभियान चलाया जा सके।

सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान अधिकारियों ने बड़ी संख्या में दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। इनमें संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़े कागजात, बैंक खातों का विवरण, निवेश संबंधी दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड शामिल हैं। इन सभी दस्तावेजों का अब विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा ताकि संपत्ति के वास्तविक स्रोत और वित्तीय लेन-देन की पूरी जानकारी सामने आ सके।

कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई। जिन परिसरों में तलाशी चल रही थी, वहां बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। किसी भी व्यक्ति को बिना अनुमति अंदर जाने या बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी गई। जांच एजेंसी चाहती थी कि तलाशी प्रक्रिया बिना किसी व्यवधान के पूरी की जा सके और किसी भी महत्वपूर्ण दस्तावेज या साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की संभावना न रहे।

सुबह जैसे ही ईओयू की टीम संबंधित ठिकानों पर पहुंची, आसपास के इलाकों में लोगों की भीड़ जमा होने लगी। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि जांच एजेंसी के अधिकारियों ने मीडिया या अन्य लोगों के सामने कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की और केवल इतना कहा कि जांच पूरी होने के बाद आधिकारिक जानकारी जारी की जाएगी।

बताया जा रहा है कि अंकेश राज गौंड लंबे समय तक सीवान जिले में उत्पाद विभाग में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। सेवा अवधि के दौरान विभागीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण अभियान भी उनके कार्यकाल में चलाए गए थे। अब आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार मुंगेर के लल्लूपोखर क्षेत्र में स्थित मकान कुछ वर्ष पहले खरीदा गया था। इलाके में इस संपत्ति की कीमत को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। जांच एजेंसी अब इस संपत्ति की खरीद से जुड़े दस्तावेज, भुगतान के स्रोत और अन्य कानूनी अभिलेखों की भी गहन जांच कर रही है। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो उसे भी केस का हिस्सा बनाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में केवल संपत्ति का मूल्य ही नहीं देखा जाता, बल्कि यह भी जांचा जाता है कि संबंधित अधिकारी की वैध आय कितनी थी और उसी के अनुपात में संपत्ति अर्जित की गई या नहीं। यदि आय और संपत्ति के बीच असामान्य अंतर पाया जाता है तो उसके स्रोत की विस्तृत जांच की जाती है।

ईओयू की टीम डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। बैंकिंग लेन-देन, निवेश, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरी वित्तीय स्थिति स्पष्ट हो सके। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित संस्थानों से अतिरिक्त जानकारी भी मांगी जा सकती है।

फिलहाल छापेमारी और दस्तावेजों की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद आर्थिक अपराध इकाई अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की पुष्टि होती है तो आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका सामने आती है तो जांच का दायरा भी बढ़ाया जा सकता है।

गुरुवार को हुई इस कार्रवाई ने सीवान, मुंगेर और पटना के प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की नजर आर्थिक अपराध इकाई की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। जांच एजेंसी का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और साक्ष्य आधारित जांच की जा रही है तथा सभी तथ्यों के सत्यापन के बाद ही आधिकारिक रूप से आगे की जानकारी साझा की जाएगी।

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