
भागलपुर। आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने तथा उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित सहयोग शिविरों की लगातार निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को भागलपुर के जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक ने कहलगांव में आयोजित सहयोग शिविर का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ अनुमंडल पदाधिकारी, कहलगांव सहित जिला एवं अनुमंडल स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का जायजा लिया, आम लोगों से सीधे बातचीत की और संबंधित अधिकारियों को सभी आवेदनों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
कहलगांव में आयोजित सहयोग शिविर में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक अपनी समस्याएं और आवेदन लेकर पहुंचे थे। शिविर में राजस्व, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, श्रम, आपूर्ति, बैंकिंग, विद्युत, पेयजल, पंचायत, पुलिस सहित विभिन्न विभागों के अलग-अलग सहायता केंद्र बनाए गए थे। इन स्टॉलों पर संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने लोगों की शिकायतें सुनीं और योजनाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्रत्येक विभाग के स्टॉल पर पहुंचकर वहां की कार्यप्रणाली की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से प्राप्त आवेदनों की संख्या, उनके निस्तारण की स्थिति और लंबित मामलों की जानकारी ली। साथ ही यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किसी भी नागरिक के आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और निर्धारित समय सीमा के भीतर उसका समाधान किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि सहयोग शिविर का उद्देश्य केवल आवेदन प्राप्त करना नहीं है, बल्कि लोगों की समस्याओं का वास्तविक और प्रभावी समाधान करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक आवेदन का गंभीरतापूर्वक परीक्षण किया जाए और पात्र लाभार्थियों को संबंधित सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी देरी के उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण आधार होना चाहिए।
शिविर में पहुंचे नागरिकों से बातचीत के दौरान जिलाधिकारी ने उनसे सरकारी योजनाओं के लाभ, आवेदन प्रक्रिया और विभिन्न विभागों की कार्यशैली के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने लोगों से पूछा कि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं हो रही है और यदि किसी स्तर पर कठिनाई आ रही है तो उसे तत्काल संबंधित अधिकारी के संज्ञान में लाया जाए। कई नागरिकों ने अपनी समस्याएं सीधे जिलाधिकारी के समक्ष रखीं, जिनके त्वरित समाधान के लिए मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
वरीय पुलिस अधीक्षक ने भी सहयोग शिविर का विस्तृत निरीक्षण किया और पुलिस विभाग के स्टॉल पर पहुंचकर लोगों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने आम नागरिकों से कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और पुलिस सेवाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। उन्होंने लोगों से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, बैंकिंग फ्रॉड और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले अपराधों से बचने के लिए जागरूक रहना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी या किसी अन्य प्रकार का अपराध होता है तो वह तुरंत पुलिस से संपर्क करे। समय पर सूचना मिलने से कई मामलों में आर्थिक नुकसान को रोका जा सकता है और अपराधियों तक शीघ्र पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने नशामुक्ति अभियान और सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करने की भी अपील की।
अनुमंडल पदाधिकारी, कहलगांव ने बताया कि सहयोग शिविर के माध्यम से आम लोगों को विभिन्न सरकारी विभागों की सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे लोगों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने बताया कि शिविर में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का विभागवार पंजीकरण किया जा रहा है और संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के लिए भेजा जा रहा है।
शिविर में सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन कार्ड, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी मामलों, श्रम योजनाओं, किसान हित से जुड़ी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली, पेयजल, बैंकिंग सुविधाओं तथा पंचायत स्तर की विभिन्न समस्याओं से संबंधित आवेदन लिए गए। अधिकारियों ने मौके पर ही कई मामलों का समाधान किया, जबकि अन्य आवेदनों को नियमानुसार संबंधित विभागों को अग्रेषित किया गया।
प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के सहयोग शिविर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लोगों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रहे हैं। पहले जहां लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए कई कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की मौजूदगी से समय और संसाधनों दोनों की बचत हो रही है।
जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना का लाभ देने में भेदभाव या अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। यदि किसी आवेदन में दस्तावेजों की कमी है तो आवेदक को स्पष्ट जानकारी देकर उसे समय पर पूरा करने का अवसर दिया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सहयोग शिविर केवल शिकायत निवारण का माध्यम नहीं है, बल्कि सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी मंच भी है। इससे प्रशासन को जमीनी स्तर की समस्याओं की वास्तविक जानकारी मिलती है और योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार करने का अवसर प्राप्त होता है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि शिविरों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग इनका लाभ उठा सकें। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक इसकी जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया गया।
निरीक्षण के दौरान यह भी समीक्षा की गई कि विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर पर्याप्त कर्मचारी, आवश्यक दस्तावेज और तकनीकी संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं। अधिकारियों ने व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुझाव भी दिए, ताकि आने वाले शिविरों में लोगों को और अधिक सुविधाजनक सेवाएं मिल सकें।
कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों से कहा कि सहयोग शिविर को केवल औपचारिक कार्यक्रम के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे जनसेवा का प्रभावी माध्यम बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक विभाग की जवाबदेही तय होगी और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाएगी। वहीं वरीय पुलिस अधीक्षक ने भरोसा दिलाया कि पुलिस प्रशासन आम नागरिकों की सुरक्षा, सहायता और शिकायतों के समाधान के लिए हमेशा उपलब्ध रहेगा।
कहलगांव में आयोजित यह सहयोग शिविर प्रशासन की जनकल्याणकारी पहल का महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया, जहां विभिन्न विभागों की सेवाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराकर लोगों की समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रभावी प्रयास किया गया। जिला प्रशासन ने उम्मीद जताई कि ऐसे शिविरों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचेगा और आम नागरिकों तथा प्रशासन के बीच विश्वास और संवाद भी मजबूत होगा।


