सहरसा के रेड लाइट एरिया में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 4 नाबालिग लड़कियां समेत 18 लोग हिरासत में, कथित मानव तस्करी नेटवर्क की जांच तेज

सहरसा। बिहार के सहरसा जिले में मंगलवार को पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने संयुक्त अभियान चलाकर सदर थाना क्षेत्र के भारतीय नगर स्थित रेड लाइट एरिया में बड़ी कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, लगातार मिल रही शिकायतों और उनके सत्यापन के बाद की गई इस छापेमारी के दौरान 4 नाबालिग लड़कियों, 4 नाबालिग लड़कों, 9 महिलाओं सहित कुल 18 लोगों को हिरासत में लिया गया। वहीं कथित तौर पर इस पूरे नेटवर्क का संचालन करने के आरोप में एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान में जुटी हुई है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय नगर क्षेत्र को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों में आरोप लगाया जा रहा था कि इलाके में अवैध गतिविधियां दोबारा संचालित की जा रही हैं। इन सूचनाओं के आधार पर पहले गोपनीय जांच कराई गई और जब प्रारंभिक स्तर पर शिकायतों की पुष्टि हुई, तब संयुक्त छापेमारी की योजना बनाई गई।

मंगलवार को पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और अन्य संबंधित अधिकारियों की टीम ने एक साथ इलाके में प्रवेश कर कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान विभिन्न मकानों और कमरों की जांच की गई। पुलिस का कहना है कि इस दौरान कई लोगों को संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया, जिसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।

साइबर डीएसपी कल्याण आनंद ने बताया कि अभियान के दौरान कुल 18 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें 4 नाबालिग लड़कियां, 4 नाबालिग लड़के और 9 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा कथित अवैध गतिविधियों का संचालन करने के आरोप में एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया। अधिकारियों ने बताया कि जिन भवनों को पहले प्रशासन द्वारा सील किया गया था, उनमें से कुछ स्थानों पर फिर से लोगों की मौजूदगी मिली। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला कि सील किए गए भवनों का दोबारा उपयोग किया जा रहा था। इस मामले में यह भी जांच की जा रही है कि सील किए गए परिसरों तक दोबारा पहुंच कैसे संभव हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

छापेमारी के दौरान बरामद किए गए नाबालिगों को तत्काल सुरक्षा में लिया गया। पुलिस ने बताया कि सभी नाबालिगों की काउंसलिंग शुरू कर दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बाल संरक्षण से जुड़े संबंधित विभागों और संस्थाओं की सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि नाबालिगों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और उनके पुनर्वास से जुड़े सभी कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाएगा।

जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि कथित नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था, इसमें कितने लोग शामिल थे और इसका संचालन किस प्रकार किया जा रहा था। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध तथ्यों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे मामले का खुलासा किया जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल हिरासत में लिए गए लोगों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है और उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मानव तस्करी और नाबालिगों से जुड़े मामलों को लेकर पुलिस विशेष सतर्कता बरत रही है। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का गठन ऐसे ही मामलों की रोकथाम, पीड़ितों की पहचान, बचाव और पुनर्वास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। इस तरह के अभियानों में पुलिस के साथ महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़े विभाग भी आवश्यकतानुसार समन्वय स्थापित करते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी मामले में नाबालिगों की संलिप्तता सामने आती है तो जांच और न्यायिक प्रक्रिया विशेष कानूनों के तहत संचालित की जाती है। ऐसे मामलों में पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखना और उनके अधिकारों की रक्षा करना कानूनी रूप से आवश्यक होता है। इसी कारण पुलिस ने बरामद नाबालिगों की व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है ताकि किसी प्रकार की अवैध गतिविधि दोबारा संचालित न हो सके। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में नियमित निगरानी जारी रहेगी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

साइबर डीएसपी कल्याण आनंद ने बताया कि यह कार्रवाई प्राप्त शिकायतों के सत्यापन के बाद की गई है और मामले की जांच अभी जारी है। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, पीड़ितों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना और पूरे मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाना है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सहरसा में हुई इस कार्रवाई को मानव तस्करी और कथित अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि भविष्य में भी इस प्रकार की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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