हाजीपुर में ‘ऑपरेशन उपलब्ध’ की बड़ी कार्रवाई, तत्काल टिकटों की कालाबाजारी का भंडाफोड़; एक गिरफ्तार, दो फरार

हाजीपुर: बिहार के वैशाली जिले में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने तत्काल टिकटों की कालाबाजारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भगवानपुर रेलवे स्टेशन के आरक्षण केंद्र पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान तत्काल टिकटों की अवैध खरीद-बिक्री में कथित रूप से शामिल एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, जबकि गिरोह के दो अन्य सदस्य फरार बताए जा रहे हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई “ऑपरेशन उपलब्ध” के तहत अपराध आसूचना इकाई (CIB), सोनपुर के सहयोग से की गई।

आरपीएफ का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी के पास से तत्काल श्रेणी का रेल आरक्षण टिकट, जिसकी कीमत 11,560 रुपये बताई गई है, और एक स्मार्ट मोबाइल फोन बरामद किया गया है। जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर दो अन्य संदिग्धों की भी पहचान की गई है, जिनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।

आरक्षण केंद्र पर की गई छापेमारी

रेलवे सुरक्षा बल को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि भगवानपुर रेलवे स्टेशन के आरक्षण केंद्र के आसपास तत्काल टिकटों की अवैध खरीद-बिक्री का नेटवर्क सक्रिय है। शिकायतों के आधार पर आरपीएफ और अपराध आसूचना इकाई ने संयुक्त रणनीति बनाकर छापेमारी की।

कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति को कथित रूप से तत्काल टिकटों की दलाली करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। अधिकारियों ने मौके पर ही उससे पूछताछ शुरू की और उसके कब्जे से मिले दस्तावेजों एवं मोबाइल फोन को जब्त कर लिया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान

आरपीएफ के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान वैशाली जिले के कटहरा थाना क्षेत्र के दुल्लहपुर निवासी रीति कुमार के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान मिले इनपुट और मोबाइल फोन से प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में दो अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई।

जांच एजेंसियों ने अनिल कुमार और मोहम्मद जावेद आलम को भी इस संगठित नेटवर्क का हिस्सा बताते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। दोनों आरोपी फिलहाल फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

11,560 रुपये का तत्काल टिकट और मोबाइल बरामद

छापेमारी के दौरान आरपीएफ ने आरोपी के पास से 11,560 रुपये मूल्य का तत्काल रेल आरक्षण टिकट बरामद किया। इसके अलावा एक स्मार्ट मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल फोन से टिकट बुकिंग, लेन-देन और अन्य सहयोगियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।

मोबाइल की डिजिटल जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह कितने समय से सक्रिय था और अब तक कितने लोगों को अवैध तरीके से टिकट उपलब्ध कराए गए।

कैसे चलता था नेटवर्क?

प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि गिरोह तत्काल टिकटों की बुकिंग कर जरूरतमंद यात्रियों को अधिक कीमत पर बेचता था। रेलवे के नियमों के अनुसार इस प्रकार टिकटों की खरीद-बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं तथा कहीं अन्य रेलवे स्टेशनों तक भी इसका दायरा तो नहीं फैला हुआ है।

गिरफ्तार आरोपी को भेजा गया जेल

आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित कर लगातार कार्रवाई की जा रही है।

यात्रियों से आरपीएफ की अपील

रेलवे सुरक्षा बल ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल रेलवे के अधिकृत माध्यमों से ही टिकट खरीदें। किसी भी अनधिकृत एजेंट या दलाल से टिकट खरीदना न केवल गैरकानूनी है बल्कि यात्रियों के साथ धोखाधड़ी की संभावना भी बढ़ जाती है।

यदि किसी यात्री को टिकटों की कालाबाजारी या दलाली की जानकारी मिलती है तो उसकी सूचना तत्काल रेलवे सुरक्षा बल या रेलवे की हेल्पलाइन “रेल मदद” पर दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

ऑपरेशन उपलब्ध के तहत लगातार कार्रवाई

आरपीएफ ने बताया कि “ऑपरेशन उपलब्ध” का उद्देश्य रेलवे टिकटों की कालाबाजारी पर रोक लगाना और आम यात्रियों को पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से टिकट उपलब्ध कराना है। इस अभियान के तहत विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे और टिकट दलाली में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

जांच जारी

फिलहाल पुलिस और आरपीएफ पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हैं। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों की जांच पूरी होने के बाद इस गिरोह से जुड़े और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। वहीं फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे रैकेट के संचालन के तरीके का भी खुलासा होने की संभावना है।

रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुविधा और टिकट प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। टिकटों की कालाबाजारी रोकने के लिए आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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