
पटना: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की राजनीति लगातार गरमाई हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी मंत्री अशोक चौधरी द्वारा भोजपुर के बिलौटी गांव जाकर मृतक के परिजनों से मुलाकात करने के बाद अब सरकार के भीतर भी अलग-अलग बयान सामने आने लगे हैं।
ग्रामीण विकास मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार ने स्पष्ट किया है कि अशोक चौधरी को न तो राज्य सरकार ने और न ही पार्टी ने अधिकृत रूप से वहां भेजा था।
“अशोक चौधरी निजी तौर पर गए थे”
मीडिया से बातचीत में श्रवण कुमार ने कहा कि अशोक चौधरी अपनी निजी यात्रा पर बिलौटी गांव गए थे।
उन्होंने कहा,
“कोई व्यक्ति संवेदना व्यक्त करने के लिए निजी तौर पर कहीं जाता है तो वह उसका व्यक्तिगत फैसला होता है। सरकार की ओर से उन्हें नहीं भेजा गया था। यदि सरकार भेजती, तो बाकायदा आदेश जारी किया जाता।”
न्यायिक जांच के बाद होगी कार्रवाई
श्रवण कुमार ने कहा कि सरकार ने पूरे मामले की न्यायिक जांच का आदेश दे दिया है और जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा,
“जांच के बाद जो रिपोर्ट आएगी, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।”
अशोक चौधरी ने परिजनों से की थी मुलाकात
रविवार को मंत्री अशोक चौधरी भोजपुर के बिलौटी गांव पहुंचे थे, जहां उन्होंने भरत तिवारी के माता-पिता से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया था। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बचाव करते हुए कहा था कि कुछ लोग बेवजह मुख्यमंत्री के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
एनडीए में अलग-अलग राय
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर एनडीए के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
- चिराग पासवान ने एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए इसे गलत बताया।
- वहीं जीतन राम मांझी ने भरत तिवारी को अपराधी बताते हुए पुलिस कार्रवाई को उचित ठहराया।
अब जेडीयू के भीतर भी अशोक चौधरी और श्रवण कुमार के अलग-अलग रुख के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।


