पूर्णकालिक सेवा की मांग को लेकर सक्रिय हुए शारीरिक शिक्षा अनुदेशक, मंत्री शैलेन्द्र को सौंपा ज्ञापन

बिहार में शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आंदोलन एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। राज्यभर के अनुदेशक अपनी प्रमुख मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए लगातार जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों से मुलाकात कर रहे हैं। इसी कड़ी में भागलपुर इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा और जल्द समाधान की अपील की।

भागलपुर से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में विक्रम कुमार, दिलीप कुमार और राजवर्धन कुमार शामिल थे। प्रतिनिधियों ने मंत्री के समक्ष शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों की वर्तमान कार्य व्यवस्था, मानदेय और विद्यालयों में उनकी भूमिका से जुड़े विभिन्न मुद्दों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग पूर्णकालिक कार्य व्यवस्था लागू किए जाने की है, ताकि वे विद्यालयों में खेल, स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा से संबंधित जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को बताया कि वर्तमान व्यवस्था में सीमित कार्य अवधि के कारण विद्यार्थियों को नियमित खेल प्रशिक्षण, शारीरिक गतिविधियों और स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। उनका कहना था कि यदि अनुदेशकों को पूर्णकालिक सेवा का अवसर मिलेगा तो विद्यालयों में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

मुलाकात के दौरान मंत्री शैलेन्द्र ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनी। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस विषय पर शिक्षा विभाग के साथ चर्चा की जाएगी और संबंधित मुद्दों को सरकार के समक्ष रखा जाएगा। मंत्री ने कहा कि वे शिक्षा मंत्री से इस संबंध में बातचीत करेंगे और सकारात्मक समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। मंत्री के इस आश्वासन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर जल्द निर्णय ले सकती है।

शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2022 में हुई थी। नियुक्ति के समय उनका मासिक मानदेय 8 हजार रुपये निर्धारित किया गया था। उस समय अनुदेशकों ने इसे अत्यंत कम बताते हुए विरोध दर्ज कराया था। उनका तर्क था कि इतनी कम राशि में परिवार का भरण-पोषण करना और सम्मानजनक जीवनयापन करना संभव नहीं है।

मानदेय को लेकर राज्यभर में कई चरणों में आंदोलन भी हुए। अनुदेशकों ने धरना-प्रदर्शन किए, ज्ञापन सौंपे, जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की और सरकार के साथ कई दौर की वार्ता भी की। लंबे संघर्ष के बाद चुनावी अवधि में सरकार ने उनका मानदेय बढ़ाकर 16 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया। हालांकि अनुदेशकों का कहना है कि केवल मानदेय बढ़ाना उनकी सभी समस्याओं का समाधान नहीं है।

उनका कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा पूर्णकालिक सेवा का है। उनका मानना है कि जब तक उन्हें नियमित और पूर्णकालिक कार्य व्यवस्था नहीं मिलेगी, तब तक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार संभव नहीं होगा। उनका कहना है कि खेल और स्वास्थ्य शिक्षा आज के समय में अकादमिक शिक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है और इसे विद्यालयी व्यवस्था में समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को यह भी बताया कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों में शारीरिक गतिविधियों की कमी, बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएं और खेलों के प्रति घटती रुचि जैसी चुनौतियां सामने हैं। ऐसे में प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षा अनुदेशकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि उन्हें पर्याप्त समय और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वे विद्यालयों में खेल प्रतियोगिताओं, योग, फिटनेस कार्यक्रमों और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को बेहतर तरीके से संचालित कर सकते हैं।

अनुदेशकों का कहना है कि वे केवल अपनी सेवा शर्तों में सुधार की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में भी योगदान देना चाहते हैं। उनका मानना है कि नियमित खेल गतिविधियां विद्यार्थियों में अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

हाल के दिनों में शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों ने अपनी मांगों को लेकर राज्यभर में जनसंपर्क अभियान भी तेज किया है। विभिन्न जिलों के प्रतिनिधिमंडल लगातार विधायकों, मंत्रियों और अन्य जनप्रतिनिधियों से मिलकर समर्थन जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना और जल्द निर्णय सुनिश्चित कराना है।

कुछ दिन पहले पटना में आयोजित शिक्षा मंत्री के स्वागत एवं सम्मान समारोह के दौरान भी अनुदेशकों ने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया था। उस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है और 100 दिनों के भीतर सकारात्मक निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा। इस बयान के बाद अनुदेशकों में उम्मीद जगी है कि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कदम उठा सकती है।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का भी मानना है कि वर्तमान समय में विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा को अधिक महत्व देने की आवश्यकता है। नई शिक्षा नीति में भी खेल आधारित शिक्षा, फिटनेस और समग्र विकास पर विशेष जोर दिया गया है। ऐसे में प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षा अनुदेशकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

फिलहाल राज्यभर के शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक अपनी मांगों को लेकर संगठित रूप से प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे सरकार के साथ सकारात्मक संवाद बनाए रखना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि जल्द ही उनकी पूर्णकालिक सेवा से संबंधित मांग पर ठोस निर्णय लिया जाएगा। अब सभी की निगाहें सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह अनुदेशकों की इस लंबे समय से लंबित मांग पर कब और क्या फैसला लेती है।

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