पीरपैंती के 190 स्कूलों का 6 जुलाई से होगा सोशल ऑडिट, शिक्षा व्यवस्था सुधारने की दिशा में बड़ा कदम

भागलपुर जिले के आकांक्षी प्रखंड पीरपैंती में शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का व्यापक आकलन करने के लिए 6 जुलाई से सभी सरकारी विद्यालयों का सोशल ऑडिट शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत प्रखंड के कुल 190 विद्यालयों का चरणबद्ध तरीके से मूल्यांकन किया जाएगा। शिक्षा विभाग का उद्देश्य केवल विद्यालयों की वर्तमान स्थिति का आकलन करना ही नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता और जनभागीदारी को भी मजबूत बनाना है। इस पहल को विद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सोशल ऑडिट की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए शेरमारी स्थित उच्च विद्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रखंड के सभी 190 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने भाग लिया। इस दौरान सोशल ऑडिट की पूरी प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों की तैयारी, मूल्यांकन के मानकों तथा विद्यालयों की जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया कि वे ऑडिट टीम को हर स्तर पर सहयोग प्रदान करें ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

बैठक में डीआरडीए भागलपुर से पहुंचीं सोशल ऑडिटर सतीमा बेगम ने बताया कि यह सोशल ऑडिट आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम के अंतर्गत कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना और उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहां सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र के लिए कुल 30 अंकों का वेटेज निर्धारित किया गया है, इसलिए विद्यालयों की गुणवत्ता और प्रदर्शन को बेहतर बनाना प्राथमिकता है।

सतीमा बेगम ने बताया कि सोशल ऑडिट केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं होगा, बल्कि इसमें विद्यालयों की कार्यप्रणाली के विभिन्न पहलुओं का गहन मूल्यांकन किया जाएगा। इसमें नामांकन, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, शिक्षण व्यवस्था, विद्यालय में उपलब्ध मूलभूत सुविधाएं, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, मिड-डे मील, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, खेल सामग्री और अभिलेखों के रखरखाव सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच की जाएगी।

उन्होंने जानकारी दी कि प्रखंड के प्रत्येक विद्यालय में सोशल ऑडिट की प्रक्रिया कुल छह दिनों तक चलेगी। पहले पांच दिनों के दौरान ऑडिट टीम विद्यालय का विस्तृत निरीक्षण करेगी। इस दौरान विद्यालय के दस्तावेजों की जांच, शिक्षकों और विद्यार्थियों से बातचीत, अभिभावकों की राय तथा स्थानीय समुदाय की सहभागिता का भी आकलन किया जाएगा। छठे दिन संबंधित गांव में ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सोशल ऑडिट के दौरान सामने आए निष्कर्ष और सुझाव सार्वजनिक रूप से साझा किए जाएंगे।

ग्राम सभा के आयोजन का उद्देश्य स्थानीय समुदाय को विद्यालयों की वास्तविक स्थिति से अवगत कराना और शिक्षा व्यवस्था में जनभागीदारी बढ़ाना है। इस दौरान ग्रामीणों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों की मौजूदगी में ऑडिट रिपोर्ट पर चर्चा होगी। यदि किसी विद्यालय में कमियां पाई जाती हैं तो उनके समाधान के लिए भी सुझाव दिए जाएंगे।

बैठक के दौरान सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया कि वे विद्यालयों से जुड़े सभी आवश्यक अभिलेखों को अद्यतन रखें। इनमें छात्रों का नामांकन रजिस्टर, उपस्थिति पंजी, शिक्षकों का विवरण, सरकारी योजनाओं से संबंधित दस्तावेज, वित्तीय अभिलेख और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि अधूरे या गलत दस्तावेज ऑडिट प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए सभी रिकॉर्ड समय पर व्यवस्थित किए जाएं।

शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल ऑडिट के दौरान किसी प्रकार की जानकारी छिपाने या सहयोग नहीं करने की स्थिति में संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई भी की जा सकती है। इसलिए सभी प्रधानाध्यापकों से अपेक्षा की गई है कि वे पूरी पारदर्शिता के साथ ऑडिट टीम को सहयोग दें।

बैठक में बच्चों और अभिभावकों को आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम के बारे में जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि केवल विद्यालय प्रशासन के प्रयासों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है। इसके लिए अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। यदि अभिभावक नियमित रूप से विद्यालय की गतिविधियों से जुड़े रहेंगे तो बच्चों की पढ़ाई और विद्यालय की गुणवत्ता दोनों में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल ऑडिट जैसी व्यवस्था से सरकारी विद्यालयों की जवाबदेही बढ़ती है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों का सही उपयोग हो रहा है या नहीं। साथ ही यह प्रक्रिया विद्यालयों की कमियों को सामने लाने और समय रहते उनमें सुधार करने का भी प्रभावी माध्यम बनती है।

आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम केंद्र सरकार की उस पहल का हिस्सा है जिसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि और बुनियादी सुविधाओं जैसे क्षेत्रों में पिछड़े प्रखंडों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन किया जाता है, जिससे विभिन्न विभागों के कामकाज की नियमित समीक्षा संभव हो पाती है।

पीरपैंती में शुरू होने वाला यह सोशल ऑडिट शिक्षा विभाग के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से विद्यालयों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और जहां भी सुधार की आवश्यकता होगी, वहां समयबद्ध कार्रवाई की जा सकेगी। इससे आने वाले समय में सरकारी विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक व्यवस्था और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

शिक्षा विभाग का कहना है कि सोशल ऑडिट का उद्देश्य किसी विद्यालय या शिक्षक की आलोचना करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। विभाग का लक्ष्य है कि सभी विद्यालय गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराएं और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

अब 6 जुलाई से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया पर पूरे प्रखंड की निगाहें टिकी हैं। यदि सोशल ऑडिट सफलतापूर्वक संपन्न होता है, तो इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक नई शुरुआत मानी जाएगी और भविष्य में अन्य क्षेत्रों के लिए भी यह एक प्रभावी मॉडल साबित हो सकता है।

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