‘मैं BJP से भी समर्थन मांग रहा हूं’—बांकीपुर से उम्मीदवार बनते ही प्रशांत किशोर का बड़ा बयान

पटना: बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज ने बड़ा दांव खेलते हुए अपने संस्थापक प्रशांत किशोर को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। यह फैसला पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में लिया गया।

उम्मीदवारी की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यह उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की जनता की राय का भी संकेत होगा।

“यह चुनाव सरकार के कामकाज की परीक्षा”

प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर का उपचुनाव तय करेगा कि बिहार की जनता सम्राट चौधरी के नेतृत्व में चल रही सरकार के कामकाज से संतुष्ट है या बदलाव चाहती है।

उन्होंने कहा,

“मेरे चुनाव जीतने से सरकार नहीं बदलेगी, लेकिन यह जरूर तय होगा कि लोग वर्तमान सरकार के कामकाज को सही मानते हैं या उसमें बदलाव चाहते हैं।”

“242 विधायकों पर भारी पड़ूंगा”

उन्होंने कहा कि यदि जनता उन्हें विधानसभा भेजती है तो वे सिर्फ एक विधायक नहीं होंगे, बल्कि जनता की आवाज बनकर काम करेंगे।

उन्होंने कहा,

“अगर आप मुझे चुनकर विधानसभा भेजेंगे, तो मैं 242 विधायकों पर भारी पड़ूंगा और लोगों की उम्मीदों का बोझ अपने कंधों पर उठाकर उनका प्रतिनिधित्व करूंगा।”

भाजपा से भी मांगा समर्थन

महागठबंधन के संभावित समर्थन को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि वह केवल महागठबंधन ही नहीं, बल्कि भाजपा से भी समर्थन मांग रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी दल की जीत नहीं, बल्कि सबसे योग्य उम्मीदवार का विधानसभा पहुंचना है।

महावीर मंदिर से प्रचार की शुरुआत

उम्मीदवारी घोषित होने के बाद प्रशांत किशोर पटना स्थित महावीर मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और रुद्राभिषेक में शामिल हुए।

इसके बाद उन्होंने अपने चुनाव प्रचार अभियान की औपचारिक शुरुआत की।

हालांकि, जन सुराज की टीम पिछले कई सप्ताह से बांकीपुर क्षेत्र में घर-घर जाकर जनसंपर्क अभियान चला रही है।

भाजपा का गढ़, प्रतिष्ठा की लड़ाई

बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है।

इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मुकाबला भाजपा और प्रशांत किशोर के बीच सीधी टक्कर का रूप ले सकता है।

एक ओर बांकीपुर को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह चुनाव सक्रिय राजनीति में प्रशांत किशोर की सबसे बड़ी चुनावी परीक्षा भी माना जा रहा है।

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