बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर पर बीजेपी सांसद मनन मिश्रा का हमला, बोले- “जन सुराज का बिहार में कोई भविष्य नहीं”

पटना: बिहार में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने उन पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने दावा किया कि जन सुराज का बिहार की राजनीति में कोई भविष्य नहीं है।

“न विचारधारा, न उद्देश्य”

मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि जन सुराज पहले भी विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है, लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिली।

उन्होंने कहा,

“जन सुराज के पास न कोई स्पष्ट विचारधारा है और न ही कोई ठोस उद्देश्य। बिहार की जनता ने पहले भी उन्हें मौका नहीं दिया और आगे भी कोई भविष्य नहीं दिखता।”

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब जन सुराज ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रशांत किशोर को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

2024 में बनी थी जन सुराज पार्टी

प्रशांत किशोर, जो लंबे समय तक विभिन्न राजनीतिक दलों के चुनावी रणनीतिकार रहे, उन्होंने 2 अक्टूबर 2024 को गांधी जयंती के अवसर पर जन सुराज पार्टी की स्थापना की थी।

इससे पहले वे पूरे बिहार में पदयात्रा कर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुशासन जैसे मुद्दों को लेकर जनसंपर्क अभियान चला चुके थे।

विधानसभा चुनाव में नहीं मिली सफलता

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।

हालांकि—

  • पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी।
  • वोट शेयर लगभग 3.5 प्रतिशत रहा।
  • कई उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।

हालांकि कुछ सीटों पर पार्टी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर प्रमुख दलों के समीकरण प्रभावित किए थे।

एनडीए पर लगातार हमलावर हैं प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर लगातार बिहार की एनडीए सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता के आरोप लगाते रहे हैं।

उन्होंने कई मौकों पर भाजपा नेताओं के नाम लेकर भी सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि बिहार को नई राजनीतिक सोच और नए नेतृत्व की जरूरत है।

तीसरा राजनीतिक विकल्प बनने की कोशिश

जन सुराज खुद को बिहार में एनडीए और महागठबंधन के विकल्प के रूप में पेश कर रही है।

प्रशांत किशोर का कहना है कि पारंपरिक राजनीतिक दल बिहार को अपेक्षित विकास नहीं दे सके हैं, इसलिए जनता को एक नए विकल्प की आवश्यकता है।

वहीं, उनके आलोचकों का मानना है कि केवल एक लोकप्रिय चेहरे के सहारे मजबूत संगठन खड़ा करना आसान नहीं होता। उनका कहना है कि बिना व्यापक संगठनात्मक ढांचे और स्थानीय नेतृत्व के राज्य की राजनीति में स्थायी जगह बनाना चुनौतीपूर्ण होगा।

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