कटिहार में मासूम को बचाने के लिए चाचा-चाची ने दी जान, करंट लगने से दोनों की मौत, अस्पताल में परिजनों का हंगामा

कटिहार: बिहार के कटिहार जिले के मनिहारी थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या-10 स्थित पूरब टोला में इंसानियत और त्याग की एक मार्मिक घटना सामने आई है। घर की मेन बिजली लाइन की चपेट में आए एक मासूम बच्चे को बचाने के प्रयास में उसके चाचा मोहम्मद नाजीर और चाची जुबेदा खातून की करंट लगने से मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद मनिहारी अनुमंडल अस्पताल में इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया।

बच्चे को बचाने में गंवा दी अपनी जान

परिजनों के अनुसार, घर में अचानक एक बच्चा मेन बिजली लाइन की चपेट में आ गया। बच्चे को तड़पता देख उसकी चाची जुबेदा खातून और चाचा मोहम्मद नाजीर उसे बचाने के लिए दौड़ पड़े। इस दौरान दोनों भी करंट की चपेट में आ गए।

तीनों को तत्काल मनिहारी अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मोहम्मद नाजीर और जुबेदा खातून को मृत घोषित कर दिया। वहीं घायल बच्चे का इलाज किया गया और अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

अस्पताल में इलाज को लेकर हंगामा

घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना था कि समय पर समुचित इलाज और ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण दोनों की जान नहीं बच सकी।

परिवार की सदस्य रुखसाना खातून ने आरोप लगाया कि अस्पताल में आपातकालीन सुविधाओं का अभाव था।

डॉक्टर ने आरोपों को किया खारिज

अस्पताल के ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने परिजनों के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि दोनों को अस्पताल लाने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। उनके अनुसार, अस्पताल पहुंचने तक दोनों में जीवन के कोई लक्षण नहीं थे, इसलिए इलाज की संभावना नहीं बची थी।

पुलिस ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही मनिहारी थाना पुलिस और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (डीएसपी) विनोद कुमार अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।

डीएसपी विनोद कुमार ने कहा,

“करंट लगने से दो लोगों की मौत हुई है। दोनों बच्चे के चाचा-चाची थे। इलाज में लापरवाही को लेकर कुछ देर तनाव की स्थिति बनी थी, जिसे पुलिस ने नियंत्रित कर लिया। पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।”

पूरे इलाके में शोक

इस दर्दनाक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। एक मासूम की जान बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले चाचा-चाची के साहस और त्याग को लोग भावुक होकर याद कर रहे हैं। साथ ही इस हादसे ने घरेलू बिजली सुरक्षा और अस्पतालों की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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