बिहार में बारिश का इंतजार लंबा, 5 जुलाई के बाद बदल सकता है मौसम; सामान्य से 50% कम वर्षा ने बढ़ाई चिंता

बिहार में मानसून की दस्तक के बावजूद अपेक्षित बारिश नहीं होने से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य के अधिकांश जिलों में बादलों की आवाजाही तो बनी हुई है, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण उमस भरी गर्मी लोगों को बेहाल कर रही है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 5 जुलाई तक राज्य में व्यापक बारिश की संभावना काफी कम है। इसके बाद मौसम के मिजाज में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जिससे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

पिछले कुछ दिनों से बिहार के कई जिलों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। बारिश की कमी और हवा में नमी अधिक होने के कारण उमस का असर और ज्यादा महसूस किया जा रहा है। सुबह से ही चिपचिपी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है, जबकि दोपहर होते-होते तेज धूप और अधिक तापमान स्थिति को और कठिन बना दे रहे हैं। आम लोगों के साथ-साथ किसान वर्ग भी मौसम की इस स्थिति को लेकर चिंतित नजर आ रहा है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल राज्य में मानसूनी गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं। सामान्य तौर पर इस समय तक बिहार के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिलती है, लेकिन इस वर्ष मानसून अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से पर्याप्त नमी राज्य तक नहीं पहुंच रही है, जिसके कारण वर्षा प्रणाली मजबूत नहीं बन पा रही।

शनिवार तक मौसम में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक राज्य के अधिकांश जिलों में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन भारी या व्यापक बारिश की संभावना बेहद कम है। कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी या छिटपुट बारिश हो सकती है, लेकिन उससे तापमान में विशेष राहत मिलने की संभावना नहीं है।

दिन के समय तेज धूप और अधिक आर्द्रता लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। मौसम विभाग ने अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी की आशंका जताई है। इसका सीधा असर दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। बाजारों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को गर्मी से राहत पाने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।

पिछले 24 घंटों के दौरान कैमूर जिला राज्य का सबसे गर्म इलाका दर्ज किया गया, जहां अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। राजधानी पटना समेत कई जिलों में भी तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। लगातार बढ़ती गर्मी ने लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है। विशेषकर बुजुर्ग, बच्चे और बाहर काम करने वाले लोगों के लिए मौसम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने के पीछे कई मौसमीय कारण हैं। फिलहाल बंगाल की खाड़ी में कोई प्रभावी लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय नहीं है। इसके अलावा कोई मजबूत ट्रफ लाइन भी विकसित नहीं हुई है, जो बिहार में व्यापक वर्षा करा सके। इन्हीं कारणों से बादलों का निर्माण तो हो रहा है, लेकिन वे भारी बारिश कराने की स्थिति में नहीं पहुंच पा रहे हैं।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में वातावरण में नमी तो मौजूद है, लेकिन बारिश के लिए आवश्यक ऊर्जा और दबाव प्रणाली का अभाव है। यही कारण है कि राज्य के अधिकांश जिलों में बादल मंडराने के बावजूद बारिश नहीं हो रही। इससे गर्मी और उमस का संयुक्त प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

इस मानसून सीजन में अब तक बारिश के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार इस अवधि तक बिहार में लगभग 196.1 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। लेकिन अब तक राज्य में केवल 98.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इसका मतलब है कि बिहार में सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है। यह कमी केवल मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर कृषि, जलस्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है।

कम बारिश का सबसे बड़ा असर खेती-किसानी पर दिखाई दे रहा है। बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां धान की खेती काफी बड़े पैमाने पर होती है। जुलाई का शुरुआती समय धान की रोपाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसान खेत तैयार नहीं कर पा रहे हैं। कई इलाकों में सिंचाई के वैकल्पिक साधनों पर निर्भरता बढ़ गई है, जिससे खेती की लागत भी बढ़ रही है।

किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती, तो धान की रोपाई में देरी हो सकती है। इसका असर उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मानसून की कमजोर स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो खरीफ फसलों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

राजधानी पटना की बात करें तो यहां शनिवार को आसमान में हल्के बादल छाए रहने की संभावना है। हालांकि बारिश के आसार बेहद कम बताए गए हैं। दिनभर उमस और गर्मी का असर बना रहेगा। दोपहर के समय तेज धूप लोगों को अधिक परेशान कर सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, धूप में निकलते समय सावधानी बरतें और दोपहर में अनावश्यक बाहर जाने से बचें।

हालांकि मौसम विशेषज्ञों ने 5 जुलाई के बाद राहत की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि यदि बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत मौसम प्रणाली विकसित होती है, तो बिहार में बारिश की गतिविधियां तेजी पकड़ सकती हैं। ऐसी स्थिति बनने पर राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश की शुरुआत हो सकती है।

यदि आगामी दिनों में मानसून सक्रिय होता है, तो तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। इससे उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी और किसानों को भी राहत का अवसर मिलेगा। फिलहाल मौसम विभाग लगातार मानसूनी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और संभावित बदलावों का विश्लेषण कर रहा है।

कुल मिलाकर बिहार में इस समय मौसम लोगों की चिंता का कारण बना हुआ है। एक ओर गर्मी और उमस ने जनजीवन को प्रभावित किया है, तो दूसरी ओर सामान्य से आधी बारिश ने कृषि क्षेत्र की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब सबकी नजर 5 जुलाई के बाद बनने वाली मौसमीय परिस्थितियों पर टिकी है, क्योंकि वहीं से राहत की उम्मीद जुड़ी हुई है।

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