पति की हत्या के मामले में पत्नी को उम्रकैद, दानापुर कोर्ट ने सुनाई सजा; अवैध संबंध के आरोप के बाद रची गई थी साजिश

पटना: राजधानी पटना के दानापुर व्यवहार न्यायालय ने पति की हत्या के चर्चित मामले में दोषी पत्नी अमृता देवी को आजीवन सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला जिला अपर एवं सत्र न्यायाधीश-7 संतोष कुमार गुप्ता की अदालत ने सुनाया।

अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों के बयान, वैज्ञानिक साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर अमृता देवी को दोषी करार दिया।

पत्नी पर पति की हत्या का आरोप

यह मामला पालीगंज थाना कांड संख्या-299/2021 से जुड़ा है।

अरवल जिले के कलेर थाना क्षेत्र के बुद्धन बिगहा गांव निवासी अमित कुमार की हत्या के मामले में उनकी पत्नी अमृता देवी, सास देवंती देवी और बहनोई मिथिलेश सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। मृतक के पिता लखनदेव यादव ने तीनों को नामजद आरोपी बनाया था।

अवैध संबंध को लेकर था विवाद

अभियोजन पक्ष के अनुसार, अमित कुमार और अमृता देवी की शादी करीब छह वर्ष पहले हुई थी। शादी के बाद दोनों के बीच संबंध सामान्य नहीं थे।

जांच के दौरान यह आरोप सामने आया कि अमृता देवी का अपने बहनोई मिथिलेश सिंह के साथ कथित अवैध संबंध था। अमित कुमार इस रिश्ते का विरोध करते थे, जिसके कारण उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।

रक्षा बंधन के बहाने मायके ले जाकर हत्या

अभियोजन के मुताबिक, 18 अगस्त 2021 को अमृता देवी रक्षा बंधन का बहाना बनाकर अपने पति अमित कुमार को पालीगंज थाना क्षेत्र के पीपरादाहा स्थित मायके ले गई।

वहां अमृता देवी, उसकी मां और बहनोई ने कथित रूप से अमित कुमार को जहर देकर मार डाला। हत्या के बाद शव को घर के बाहर फेंक दिया गया और सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।

कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए अमृता देवी को दोषी ठहराया।

कोर्ट ने उसे आजीवन सश्रम कारावास के साथ 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अन्य आरोपियों पर जांच जारी

प्रभारी अपर लोक अभियोजक रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि सह-आरोपी मिथिलेश सिंह और देवंती देवी के खिलाफ अनुसंधान अभी जारी है और पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह मामला पालीगंज थाना कांड संख्या-299/2021 एवं सेशन ट्रायल संख्या-447/2023 से संबंधित है।

इस फैसले को हत्या जैसे गंभीर मामलों में वैज्ञानिक अनुसंधान, गवाहों के सुसंगत बयान और ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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