भीषण सड़क हादसे में तीन की मौत, 102 एम्बुलेंस सेवा ने घायलों को पहुंचाया अस्पताल

भागलपुर जिले के नवगछिया क्षेत्र में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। तेज रफ्तार से गुजर रहे बालू लदे हाइवा का पिछला टायर अचानक फट गया, जिसके बाद वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने फूस के घरों पर पलट गया। इस हादसे में दो मासूम बच्चों और एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाइवा काफी तेज गति में था। अचानक पिछले हिस्से का टायर ब्लास्ट होने से चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। देखते ही देखते भारी वाहन सड़क किनारे बनी झोपड़ियों पर जा गिरा। वाहन में लदा बालू झोपड़ियों और वहां मौजूद लोगों के ऊपर फैल गया, जिससे कई लोग मलबे के नीचे दब गए। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बच्चे का शव पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गया।

मृतकों की पहचान गुड्डू डोम की चार वर्षीय बेटी राधा कुमारी, तीन वर्षीय अंकुश कुमार और भिखारी डोम के परिवार की 50 वर्षीय इंदु देवी के रूप में हुई है। इन तीनों की मौत ने स्थानीय लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे मोहल्ले में शोक का माहौल बना हुआ है।

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग मदद के लिए घटनास्थल पर दौड़े। लोगों ने मलबे के नीचे दबे घायलों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी। इसी बीच सूचना मिलते ही जेनप्लस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित 102 एम्बुलेंस सेवा की टीम मौके पर पहुंची। आपातकालीन सेवा से जुड़े कर्मियों ने तेजी दिखाते हुए घायलों को प्राथमिक सहायता दी और गंभीर रूप से घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। मृतकों के शवों को भी सम्मानपूर्वक अस्पताल ले जाया गया।

इस हादसे में 102 एम्बुलेंस सेवा की त्वरित प्रतिक्रिया ने कई जिंदगियां बचाने में अहम भूमिका निभाई। स्थानीय लोगों ने भी एम्बुलेंस टीम की तत्परता की सराहना की। मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि यदि राहत और बचाव कार्य में थोड़ी भी देरी होती तो मृतकों की संख्या और बढ़ सकती थी।

घटना की जानकारी मिलते ही ट्रैफिक डीएसपी अनिल कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया गया। प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू कराया। भारी वाहन के नीचे दबे लोगों और शवों को निकालने के लिए जेसीबी मशीन की मदद ली गई। कई घंटों की मशक्कत के बाद मलबा हटाया गया और सभी दबे लोगों को बाहर निकाला गया।

दुर्घटना के बाद आक्रोशित स्थानीय लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को जाम कर दिया। लोगों का आरोप था कि इस मार्ग पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार लंबे समय से खतरा बनी हुई है, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। हादसे से नाराज लोगों ने लगभग 45 मिनट तक सड़क जाम रखकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया।

प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उचित कार्रवाई और जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई। पुलिस और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से जाम हटाया गया और राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात दोबारा बहाल कराया गया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे की मुख्य वजह हाइवा के पिछले टायर का ब्लास्ट होना था। हालांकि पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि वाहन की तकनीकी स्थिति कैसी थी और क्या उसमें किसी तरह की लापरवाही बरती गई थी। वाहन की फिटनेस, रखरखाव और चालक की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर ओवरलोडेड ट्रकों और हाइवा की आवाजाही लगातार बढ़ी है। कई वाहन निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार में चलते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। लोगों ने प्रशासन से भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण और नियमित जांच अभियान चलाने की मांग की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारी वाहनों के टायर और ब्रेक सिस्टम की नियमित जांच बेहद जरूरी है। अक्सर तकनीकी खराबी या खराब रखरखाव के कारण ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं। यदि समय रहते वाहन की जांच हो जाए तो बड़े हादसों को रोका जा सकता है।

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और लापरवाही के कारण होने वाले हादसे लगातार लोगों की जान ले रहे हैं। प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि सड़क सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है। इलाके के लोग अब इस हादसे में जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यह हादसा न केवल तीन परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति बन गया, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक दर्दनाक याद भी छोड़ गया।

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