कोलगामा के लाल कुंदन कुमार बने इंटरनेशनल कुश्ती कोच, भागलपुर समेत पूरे इलाके में खुशी की लहर

भागलपुर, सुल्तानगंज। भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड अंतर्गत छोटे से गांव कोलगामा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। कोलगामा गांव के रहने वाले ने अपनी वर्षों की मेहनत, समर्पण और संघर्ष के दम पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कुंदन कुमार का चयन कजाक कुराक कुश्ती (Kazakh Kures/Kurash Wrestling) में इंटरनेशनल कोच के रूप में हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल लेवल रेफरी के लिए A+ रैंक भी प्राप्त कर बिहार और भागलपुर का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।

कुंदन कुमार की इस उपलब्धि के बाद पूरे सुल्तानगंज, भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है। गांव के लोगों से लेकर खेल प्रेमियों तक हर कोई उनकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुंदन कुमार ने यह साबित कर दिया कि यदि लगन और मेहनत सच्ची हो, तो छोटे गांव से निकलकर भी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई जा सकती है।

कुंदन कुमार का खेलों के प्रति समर्पण कोई नया नहीं है। बचपन से ही उन्हें कराटे और कुश्ती के प्रति गहरी रुचि थी। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया। खेल के प्रति यही लगन उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही और आज उसी का परिणाम है कि वे इंटरनेशनल स्तर पर कोच की भूमिका निभाने के लिए चयनित हुए हैं।

पिछले करीब 20 वर्षों से कुंदन कुमार लगातार बच्चों को कराटे और कुश्ती का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उन्होंने न केवल खिलाड़ियों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाया, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और संघर्ष की भावना भी विकसित की। उनके प्रशिक्षण का असर इस रूप में दिखा कि उनके कई शिष्यों ने राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

कुंदन कुमार के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण पाने वाले कई बच्चों ने इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में मेडल जीतकर देश और बिहार का नाम रोशन किया है। वहीं अनेक खिलाड़ियों ने नेशनल स्तर पर पदक हासिल किए हैं। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उस कोच की मेहनत का प्रमाण है जो अपने खिलाड़ियों की क्षमता को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देता है।

कोलगामा के लाल कुंदन कुमार बने इंटरनेशनल कुश्ती कोच, भागलपुर समेत पूरे इलाके में खुशी की लहर

उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि उन्होंने केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षित नहीं किया, बल्कि समाज के वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों को भी खेलों से जोड़ने का काम किया। ऐसे कई बच्चे, जिनके पास रहने के लिए उचित घर तक नहीं था या जिनके परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर थे, उन्हें भी कुंदन कुमार ने खेल के मंच तक पहुंचाया।

कुंदन कुमार ने उन बच्चों को केवल प्रशिक्षण ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किया। उनके नेतृत्व में कई जरूरतमंद खिलाड़ियों को बिहार सरकार की खेल सम्मान योजनाओं का लाभ मिला। कई खिलाड़ियों को राज्य सरकार द्वारा सम्मानित किया गया और आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। विशेष रूप से कुछ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को एक लाख रुपये तक की सम्मान राशि दिलाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

खेल जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि कुंदन कुमार की सबसे बड़ी ताकत उनकी सकारात्मक सोच और खिलाड़ियों के प्रति समर्पण है। वे खिलाड़ियों को केवल जीतने की तकनीक नहीं सिखाते, बल्कि उन्हें जीवन में संघर्ष करना और परिस्थितियों से लड़ना भी सिखाते हैं। यही वजह है कि उनके शिष्य उन्हें सिर्फ कोच नहीं बल्कि मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत मानते हैं।

कुंदन कुमार की उपलब्धियां यहीं तक सीमित नहीं हैं। उन्हें इंडियन कजाक क्रॉस (कुश्ती) संगठन में जॉइंट सेक्रेटरी का महत्वपूर्ण पद भी दिया गया है। यह पद उनके संगठनात्मक कौशल, खेल प्रशासन में योगदान और खेल के विकास के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण माना जा रहा है।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे राज्य में जहां अभी भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का अभाव है, वहां कुंदन कुमार जैसे लोग नई पीढ़ी के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं। वे यह दिखाते हैं कि सही मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच सकती हैं।

कुंदन कुमार की सफलता से कोलगामा गांव में उत्सव जैसा माहौल है। गांव के बुजुर्ग, युवा और बच्चे सभी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक क्षण बताया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुंदन कुमार की उपलब्धि आने वाली पीढ़ी को खेलों के प्रति प्रेरित करेगी और अधिक बच्चे खेल के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने का सपना देखेंगे।

भागलपुर और सुल्तानगंज के खेल प्रेमियों का कहना है कि कुंदन कुमार ने अपने समर्पण से यह साबित किया है कि सफलता केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। यदि किसी व्यक्ति में दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और मेहनत की भावना हो तो वह किसी भी मंच पर अपनी पहचान बना सकता है।

आज कुंदन कुमार की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, समर्पण और सपनों को साकार करने की मिसाल बन चुकी है। कोलगामा गांव का यह बेटा अब हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। उनकी उपलब्धि ने बिहार के खेल जगत को नई ऊर्जा दी है और यह संदेश दिया है कि राज्य में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, जरूरत है तो केवल सही मार्गदर्शन और अवसर की।

कुल मिलाकर, इंटरनेशनल कुश्ती कोच और नेशनल रेफरी के रूप में कुंदन कुमार का चयन न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता आने वाले वर्षों में राज्य के खेल विकास को नई दिशा देने का काम कर सकती है।

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