
खगड़िया: बिहार के खगड़िया जिले से मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। महेशखूंट थाना क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय में मंगलवार को मिड-डे मील खाने के बाद करीब 25 छात्र-छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई, जबकि सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक मौके पर पहुंच गए और जमकर हंगामा किया।
यह मामला पकरैल पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय सुखदेव सुमन साह लेबा का है। बताया जा रहा है कि दोपहर में बच्चों को मध्याह्न भोजन परोसा गया था। आरोप है कि भोजन में खराब चावल और कीड़े लगे सोयाबीन का इस्तेमाल किया गया था।
खाना खाने के कुछ देर बाद बच्चों की हालत बिगड़ी
विद्यालय में कुल 140 बच्चों का नामांकन है, जबकि घटना के दिन लगभग 75 छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। भोजन परोसे जाने के दौरान कई बच्चों ने चावल और सोयाबीन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत भी की। कुछ बच्चों ने खाना खाने से इनकार कर दिया, जबकि कई बच्चों ने भोजन कर लिया।
परिजनों के अनुसार, खाना खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को चक्कर आने लगे, कई बच्चों को उल्टियां हुईं और कुछ की हालत बेहोशी जैसी हो गई। घटना के बाद स्कूल में मौजूद शिक्षकों के बीच भी हड़कंप मच गया।
अस्पताल में कराया गया भर्ती
बीमार बच्चों को तत्काल इलाज के लिए गोगरी अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने सभी बच्चों का इलाज शुरू किया। अस्पताल में बच्चों की जांच के साथ उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
अभिभावकों का हंगामा, स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक विद्यालय पहुंच गए। उन्होंने स्कूल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। अभिभावकों का कहना था कि विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ भोजन की गुणवत्ता की भी अनदेखी की जा रही है।
प्रशासन ने शुरू की जांच
मामले की सूचना मिलते ही गोगरी एसडीओ संजय कुमार, बीडीओ रघुनंदन आनंद, चिकित्सा विभाग, शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने विद्यालय का निरीक्षण किया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।
बचा हुआ भोजन फेंकने का आरोप
जांच के दौरान एक और गंभीर मामला सामने आया। आरोप है कि घटना के बाद विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रिजवाना यासमीन ने बचा हुआ भोजन फेंकवा दिया और भोजन परोसने वाली थालियां भी धुलवा दीं।
अधिकारियों ने इस पर नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि जांच के लिए आवश्यक साक्ष्य को क्यों नष्ट किया गया। एसडीओ ने प्रधानाध्यापिका से पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। फिलहाल प्रशासन भोजन की गुणवत्ता, खाद्यान्न की आपूर्ति और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है।


