सुल्तानगंज में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन का शुभारंभ, किसानों को योजनाओं की दी गई जानकारी

भागलपुर जिले के प्रखंड में ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। सुल्तानगंज प्रखंड स्थित मनरेगा कार्यालय परिसर में “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण” के तहत प्रखंड स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के किसानों, श्रमिकों और जनप्रतिनिधियों को सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ना तथा रोजगार और आजीविका के नए अवसरों के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, पंचायत प्रतिनिधि, मनरेगा कर्मी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान ग्रामीणों को न केवल योजनाओं की जानकारी दी गई, बल्कि उन्हें यह भी समझाया गया कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर वे अपनी आर्थिक स्थिति कैसे मजबूत कर सकते हैं। अधिकारियों ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और स्थायी आय के स्रोत विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

कार्यक्रम का उद्घाटन मनरेगा कार्यालय परिसर में मंचासीन अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर मनरेगा पदाधिकारी सुजीत सिन्हा, लेखापाल प्रदीप कुमार, स्वेतकेतु और तकनीकी सहायक प्रवेश नारायण सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत औपचारिक शुभारंभ के साथ हुई, जिसके बाद प्रशिक्षण और जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया।

उद्घाटन संबोधन में अधिकारियों ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार नई योजनाएं ला रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार और बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराना है। अधिकारियों ने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में पात्र लोग योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते, इसलिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं।

मनरेगा पदाधिकारी सुजीत सिन्हा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब गांव मजबूत होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर बनेगी। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल मजदूरी उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास का व्यापक माध्यम है। इसके जरिए जल संरक्षण, सिंचाई, तालाब निर्माण, सड़क निर्माण और कृषि सहायक संरचनाओं का विकास किया जा सकता है।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं की जानकारी लें और सक्रिय रूप से उनका लाभ उठाएं। उनके अनुसार खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग दोनों की जरूरत है। यदि किसान योजनाओं से जुड़ेंगे तो उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और उनकी आय में भी वृद्धि होगी।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीण किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि सरकार कृषि आधारित रोजगार, सिंचाई सुविधाओं, जल संरक्षण, पशुपालन और आजीविका संवर्धन के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

तकनीकी सहायक प्रवेश नारायण सिंह ने प्रशिक्षण सत्र में बताया कि प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करके खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। उन्होंने जल संरक्षण संरचनाओं, खेत तालाब, मेड़बंदी और अन्य तकनीकी उपायों पर चर्चा की। उनका कहना था कि यदि किसान इन तकनीकों को अपनाते हैं तो कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं।

कार्यक्रम में किसानों को प्रशिक्षण देकर जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं है; जब तक लाभार्थियों को पूरी प्रक्रिया समझ नहीं आएगी, तब तक योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंचेगा। इसी उद्देश्य से प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया ताकि किसान व्यवहारिक जानकारी प्राप्त कर सकें।

कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने भी अधिकारियों से कई सवाल पूछे। कई किसानों ने सिंचाई, कृषि उपकरण, रोजगार उपलब्धता और सरकारी सहायता से संबंधित अपनी समस्याएं साझा कीं। अधिकारियों ने इन प्रश्नों का समाधान करते हुए उन्हें प्रक्रिया और आवेदन संबंधी जानकारी दी।

इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही। नयागांव पंचायत समिति सदस्य कुमार अमन, गनगनिया के पूर्व मुखिया प्रतिनिधि संजय कुमार सहित कई पंचायत प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हुए। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण जनता को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इससे योजनाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचता है।

पंचायत रोजगार सेवकों और मनरेगा से जुड़े कर्मियों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई। राकेश सिंह, महेश कुमार, महताब आलम, राहुल कुमार, कार्यपालक सहायक रोहित रंजन पाण्डेय, अनुराग कुमार और पीआरएस विकास कुमार सहित कई कर्मी मौजूद रहे। इन सभी ने ग्रामीणों को योजना क्रियान्वयन की प्रक्रिया समझाने में सहयोग किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण भारत की प्रगति के लिए केवल कृषि पर निर्भरता पर्याप्त नहीं है। कृषि के साथ-साथ वैकल्पिक आजीविका, कौशल विकास और संसाधन आधारित रोजगार भी जरूरी हैं। यही कारण है कि सरकार अब आजीविका मिशन और रोजगार गारंटी योजनाओं को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा रही है।

सुल्तानगंज में आयोजित यह कार्यक्रम उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण समाज को केवल लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें विकास प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाना है। जब किसान, श्रमिक और स्थानीय समुदाय जागरूक होंगे, तभी योजनाओं का प्रभाव अधिक दिखाई देगा।

कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने गांवों में भी अन्य लोगों को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जानकारी का प्रसार जितना अधिक होगा, योजनाओं का लाभ उतने ही व्यापक स्तर पर मिलेगा।

सुल्तानगंज मनरेगा कार्यालय में आयोजित यह प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीण विकास की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। रोजगार, आजीविका और कृषि विकास पर केंद्रित यह अभियान आने वाले समय में ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और विकसित भारत के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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