20वें सांख्यिकी दिवस पर प्रशासनिक आंकड़ों की उपयोगिता पर मंथन, भागलपुर में संगोष्ठी आयोजित

भागलपुर में 20वें सांख्यिकी दिवस के अवसर पर प्रशासनिक आंकड़ों की उपयोगिता, डेटा आधारित नीति निर्माण और सुशासन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के उपक्षेत्रीय कार्यालय, भागलपुर द्वारा रविवार को एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम का केंद्रीय विषय “Unlocking the Potential of Administrative Data” रखा गया, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक आंकड़ों की क्षमता को समझना और उनके प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना था।

इस संगोष्ठी में सांख्यिकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, वित्तीय क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों तथा सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आधुनिक समय में सटीक और विश्वसनीय डेटा केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह बेहतर नीतियों, प्रभावी योजनाओं और पारदर्शी प्रशासन की मजबूत नींव है।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया गया और सांख्यिकी दिवस के महत्व पर चर्चा का सिलसिला शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, भागलपुर के प्रभारी वरिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी रंजीत कुमार ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने अपने संबोधन में सांख्यिकी की बदलती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में विश्वसनीय आंकड़े किसी भी समाज और शासन व्यवस्था के लिए अमूल्य संसाधन बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं की सफलता, आर्थिक विकास की दिशा और सामाजिक परिवर्तन की वास्तविक तस्वीर आंकड़ों के माध्यम से ही सामने आती है। यदि आंकड़े सटीक और अद्यतन हों तो सरकारें अधिक प्रभावी नीतियां बना सकती हैं और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर सकती हैं।

इसके बाद वरिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी संजय कुमार मिश्र ने सांख्यिकी की मूल आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति को समझने के लिए आंकड़ों का विश्लेषण अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, उद्योग और सामाजिक विकास जैसे लगभग सभी क्षेत्रों में डेटा आधारित निर्णय ही दीर्घकालिक परिणाम देते हैं।

उन्होंने कहा कि बिना विश्वसनीय आंकड़ों के विकास की वास्तविक स्थिति का आकलन संभव नहीं है। यही कारण है कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर नियमित डेटा संग्रह और विश्लेषण की भूमिका लगातार बढ़ रही है। आधुनिक प्रशासन में डेटा सिर्फ रिपोर्टिंग का साधन नहीं, बल्कि रणनीतिक योजना का आधार बन चुका है।

वरिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी पवन कुमार ने अपने संबोधन में रोजगार सृजन में सांख्यिकी की भूमिका को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसरों की पहचान, श्रम बाजार की स्थिति और कौशल विकास की दिशा तय करने में सांख्यिकी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सरकारें रोजगार से जुड़ी योजनाओं की सफलता का मूल्यांकन भी आंकड़ों के आधार पर करती हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि रोजगार क्षेत्र में सटीक डेटा उपलब्ध होने से नीति निर्माता यह समझ पाते हैं कि किस क्षेत्र में अधिक निवेश की आवश्यकता है और किन क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं सबसे अधिक हैं। इससे युवाओं के लिए बेहतर अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

इसके बाद वरिष्ठ सांख्यिकीय अधिकारी रौशन कुमार ने प्रशासनिक एवं सामाजिक विकास में आंकड़ों के महत्व पर विस्तार से विचार रखा। उन्होंने कहा कि सामाजिक असमानता, संसाधनों का वितरण, गरीबी उन्मूलन और कल्याणकारी योजनाओं के मूल्यांकन में डेटा अत्यंत आवश्यक है। प्रशासनिक आंकड़े सरकार को वास्तविक स्थिति समझने और लक्षित हस्तक्षेप करने में मदद करते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे मुख्य अतिथि डॉ. विजय कुमार, जो के सांख्यिकी विभाग के विभागाध्यक्ष हैं। उन्होंने “Unlocking the Potential of Administrative Data” विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रशासनिक आंकड़े भविष्य के सुशासन की रीढ़ बन सकते हैं, बशर्ते उनका संग्रह, विश्लेषण और उपयोग व्यवस्थित ढंग से किया जाए।

उन्होंने बताया कि प्रशासनिक डेटा से नीति निर्माण अधिक सटीक और प्रभावी हो सकता है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, कराधान और जनकल्याण योजनाओं के संचालन में ऐसे आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि डेटा गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय हो, तो नीतियां केवल अनुमान पर आधारित नहीं रहतीं बल्कि साक्ष्य आधारित निर्णय संभव हो जाते हैं।

डॉ. विजय कुमार ने पारदर्शिता और जवाबदेही के संदर्भ में भी डेटा की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मजबूत डेटा प्रणाली शासन में पारदर्शिता बढ़ाती है और योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन संभव बनाती है। इससे प्रशासनिक दक्षता में सुधार आता है और नागरिकों का भरोसा भी मजबूत होता है।

संगोष्ठी में उद्योग और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े दृष्टिकोण को भी शामिल किया गया। मुंगेर आईटीसी के फाइनेंस मैनेजर निखिल हरि ने अपने संबोधन में वित्तीय निर्णयों में डेटा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी व्यावसायिक माहौल में डेटा आधारित निर्णय लेना कंपनियों और संस्थानों के लिए अत्यंत आवश्यक हो गया है।

उन्होंने बताया कि वित्तीय प्रबंधन में जोखिम मूल्यांकन, लागत नियंत्रण, निवेश योजना और भविष्य की रणनीति तय करने में सांख्यिकीय विश्लेषण की बड़ी भूमिका होती है। उनका कहना था कि डेटा का सही उपयोग किसी भी संस्था को अधिक सक्षम, प्रतिस्पर्धी और कुशल बना सकता है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों ने भी सांख्यिकी और प्रशासनिक डेटा के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ डेटा का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और उन्नत डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकें सांख्यिकी के क्षेत्र को नई दिशा देंगी।

पूरे कार्यक्रम का संचालन पुरुषोत्तम कुमार पांडेय ने प्रभावी ढंग से किया। उन्होंने वक्ताओं और प्रतिभागियों के बीच संवाद को सहज बनाया और कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया। समापन सत्र में पवन कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि सांख्यिकी दिवस जैसे आयोजन समाज में डेटा साक्षरता बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को इस क्षेत्र की संभावनाओं से भी परिचित कराते हैं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

इस अवसर पर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, भागलपुर के अधिकारी एवं कर्मचारी, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ और अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। यह संगोष्ठी केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रही, बल्कि इसने प्रशासनिक आंकड़ों की शक्ति और उनके भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर संवाद का मंच प्रदान किया। आने वाले समय में डेटा आधारित शासन और निर्णय प्रक्रिया को मजबूत बनाने की दिशा में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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