स्वाद, सुगंध और संस्कृति का महाकुंभ: सबौर में राष्ट्रीय आम समागम शुरू, एक हजार से अधिक किस्मों के आम बने आकर्षण का केंद्र

भागलपुर के सबौर स्थित परिसर में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। आम की मिठास, सुगंध और विविधता से सराबोर इस आयोजन ने न केवल किसानों और आम उत्पादकों को एक साझा मंच दिया, बल्कि आम प्रेमियों के लिए भी यह किसी उत्सव से कम नहीं रहा। देशभर से लाई गई एक हजार से अधिक किस्मों के आमों की प्रदर्शनी इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण बनी हुई है। सबौर का ऐतिहासिक परिसर इन दिनों पूरी तरह आममय नजर आ रहा है, जहां हर ओर आम की खुशबू, रंग और विविधता लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

राष्ट्रीय आम समागम के आयोजन ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना दिया है। विश्वविद्यालय परिसर को आम के आकर्षक कटआउट, कलात्मक डिजाइनों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया है। बहुउद्देशीय कक्ष में देश के अलग-अलग हिस्सों से लाए गए दुर्लभ और लोकप्रिय किस्मों के आमों की प्रदर्शनी लगाई गई है। यहां आमों के विक्रय काउंटर भी स्थापित किए गए हैं, जहां आगंतुक अपनी पसंद के आम खरीद सकते हैं। प्रदर्शनी देखने पहुंचे लोग न केवल आमों की विविधता देखकर चकित हैं, बल्कि उनके स्वाद, आकार और विशेषताओं को लेकर भी उत्साहित नजर आए।

कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन विश्वविद्यालय के कर्पूरी सभागार में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति द्वारा अतिथियों के स्वागत से हुई। अतिथियों को अंगवस्त्र, जर्दालू आम के पौधे और ताजे फल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार सरकार के ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मंत्री श्रवण कुमार ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह विश्वविद्यालय कृषि अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में कार्य कर रहा है, वह दिन दूर नहीं जब बिहार कृषि के क्षेत्र में वैश्विक पहचान स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि बिहार के किसान मेहनती और प्रयोगशील हैं तथा आधुनिक तकनीक से जुड़कर वे कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने आम उत्पादक किसानों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन किसानों को नई तकनीक, नए बाजार और बेहतर अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भागलपुर के सांसद ने कहा कि भागलपुर पहले सिल्क सिटी के रूप में प्रसिद्ध था, लेकिन अब जर्दालू आम के कारण यह जर्दालू सिटी के रूप में भी अपनी नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय के प्रयासों ने भागलपुर के जर्दालू आम को नई पहचान दिलाई है, जिससे स्थानीय किसानों को भी बड़ा लाभ मिल रहा है।

विधायक ने कहा कि भागलपुर के लिए यह गर्व की बात है कि यहां राष्ट्रीय स्तर का आम समागम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन कृषि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए लाभदायक साबित होगा।

ने कहा कि इस समागम में देशभर के किसानों द्वारा प्रदर्शित आमों की विविधता वास्तव में अद्वितीय है। यहां एक ही स्थान पर इतनी अधिक और दुर्लभ किस्मों का संग्रह देखना अत्यंत दुर्लभ अवसर है।

कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सबौर की धरती आम अनुसंधान के इतिहास में विशेष स्थान रखती है। उन्होंने बताया कि विश्व की पहली संकर यानी हाइब्रिड आम की किस्म वर्ष 1951 में पहली बार सबौर में विकसित की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय के प्रयासों से भागलपुर के प्रसिद्ध जर्दालू आम को जीआई टैग प्राप्त हुआ, जिसने इस क्षेत्र की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। उनके अनुसार बिहार आम उत्पादन में अब सातवें स्थान से आगे बढ़कर तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है।

कार्यक्रम में देश के आठ राज्यों से आए आम उत्पादकों में से चार श्रेष्ठ उत्पादकों को सम्मानित किया गया। सुपौल के राजेंद्र कुमार यादव, झारखंड की अनीता दासी, पश्चिम बंगाल के विमान मंडल और ओडिशा के सत्यनारायण चुंदरू को उनके उत्कृष्ट उत्पादन और प्रदर्शनी के लिए सम्मान मिला। इसके अलावा को उत्कृष्ट प्रदर्शनी के लिए सम्मानित किया गया।

प्रदर्शनी का सबसे रोमांचक हिस्सा दुर्लभ और अनोखी आम प्रजातियां हैं। यहां प्रदर्शित कुछ आमों ने लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। लगभग ढाई किलोग्राम वजन वाला गदाधार आम लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वहीं डेढ़ किलोग्राम तक वजन वाला क्यूज़म मैंगो भी चर्चा में है। जापान का विश्व प्रसिद्ध और बेहद महंगा मियाजाकी आम भी प्रदर्शनी में मौजूद है, जिसे देखने के लिए लोग विशेष रूप से पहुंच रहे हैं।

इसके अलावा आइसक्रीम आम भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र है, जिसके बारे में बताया गया कि फ्रीजर में रखने पर यह एक वर्ष तक खराब नहीं होता। एप्पल मैंगो, जिसका स्वाद और आकार सेब जैसा है, भी लोगों को खूब पसंद आ रहा है। थाईलैंड की आकर्षक किस्म रेड इनोवरी तथा छोटे आकार का काजू आम भी उत्सुकता का विषय बना हुआ है।

देसी किस्मों में केसर, स्वर्णरेखा, फाजली, मालदह, अंबिका, अरुणिमा, वनराज, किशन भोग, हिमसागर, नीलम, लालिमा और गुलाबखास जैसे सैकड़ों प्रकार के आम प्रदर्शित किए गए हैं। हालांकि इतनी विविधता के बीच भी भागलपुर का जर्दालू आम अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। बाहर से आए आगंतुकों ने माना कि जर्दालू की सुगंध और स्वाद बाकी सभी किस्मों से अलग और बेहद खास है।

इस समागम का एक प्रमुख आकर्षण “आम खाओ प्रतियोगिता” भी है। इसमें कोई भी व्यक्ति निर्धारित शुल्क देकर भाग ले सकता है और सबसे अधिक आम खाने वाले प्रतिभागी को पुरस्कार दिया जाएगा। यह प्रतियोगिता लोगों के बीच उत्साह और मनोरंजन का केंद्र बनी हुई है।

आगंतुक यहां केवल आम देखने ही नहीं, बल्कि खरीदने भी पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनी में विभिन्न किस्मों के आमों के साथ जर्दालू, मालदह, आम्रपाली और गुलाबखास जैसी लोकप्रिय किस्मों के पौधे भी उपलब्ध कराए गए हैं।

समागम के दूसरे दिन बिहार के राज्यपाल और कृषि मंत्री के शामिल होने की संभावना ने आयोजन की महत्ता और बढ़ा दी है। वे उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित करेंगे।

सबौर में शुरू हुआ यह राष्ट्रीय आम समागम स्वाद, संस्कृति, कृषि और नवाचार का अद्भुत संगम बन गया है। यह आयोजन न केवल आम की विविधता को प्रदर्शित कर रहा है, बल्कि बिहार की कृषि क्षमता और किसानों की मेहनत को भी राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा है।

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