
पटना: बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा जारी पंचायत सचिवों की औपबंधिक वरीयता सूची में एक ऐसी गलती सामने आई है, जिसने सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूची के अनुसार सारण जिले के पंचायत सचिव सुदर्शन राम की नियुक्ति तिथि 28 जनवरी 1969 दर्ज है, जबकि उनकी जन्मतिथि 19 नवंबर 1969 अंकित की गई है। यानी सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक उनकी नियुक्ति जन्म लेने से करीब 9 महीने पहले हो गई।
इस चूक के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर सरकारी महकमे तक चर्चा तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या बिना जांच-पड़ताल के इतनी महत्वपूर्ण वरीयता सूची जारी कर दी गई? यदि जन्मतिथि और नियुक्ति तिथि जैसी मूलभूत जानकारी ही गलत है, तो बाकी रिकॉर्ड कितने विश्वसनीय हैं?
दरअसल, पंचायती राज विभाग ने 1 अप्रैल 2026 के आधार पर पंचायत सचिवों की औपबंधिक वरीयता सूची जारी की है। विभाग के संयुक्त सचिव मो. वसीम अहमद ने सभी जिलाधिकारियों और जिला पंचायत राज पदाधिकारियों को पत्र भेजकर सूची में त्रुटियों, छूटे नामों और अन्य आपत्तियों को 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
विभाग ने कहा है कि यदि किसी सेवानिवृत्त, मृत, इस्तीफा दे चुके या किसी पात्र पंचायत सचिव का नाम सूची में गलत दर्ज हुआ है अथवा छूट गया है, तो संबंधित जिला प्रशासन इसकी जानकारी भेजे। आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी।
इधर, बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने भी सूची में कई गंभीर खामियों का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्त कई स्नातक पंचायत सचिवों के नाम सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। इसके अलावा कई कर्मचारियों की सेवा संबंधी जानकारी भी गलत दर्ज की गई है।
गौरतलब है कि पंचायत सचिव लंबे समय से प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी के पद पर पदोन्नति की मांग कर रहे हैं। वरीयता सूची जारी होने के बाद कर्मचारियों को उम्मीद थी कि पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, लेकिन अब सूची में सामने आई गलतियों ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह केवल एक टाइपिंग की गलती है या विभागीय रिकॉर्ड तैयार करने में व्यापक लापरवाही हुई है? यदि मूलभूत जानकारी में ही इतनी बड़ी त्रुटि है, तो पूरे सेवा अभिलेखों की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब निगाहें पंचायती राज विभाग पर हैं कि वह इस चूक को कैसे सुधारता है और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है।


