प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार में भावुक हुए रौशन आनंद, बोले- साजिश करने वाले सुन लें, हम टूटे नहीं हैं

प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार का माहौल बेहद भावुक और गमगीन रहा। अंतिम विदाई के दौरान परिजनों, समर्थकों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर आंख नम थी और वातावरण शोक से भरा हुआ था। इसी बीच अपने भाई को अंतिम विदाई देते समय रौशन आनंद खुद को संभाल नहीं सके और फूट-फूटकर रो पड़े। वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह उन्हें संभाला और ढाढस बंधाने की कोशिश की। भाई को खोने का दर्द उनके चेहरे और शब्दों दोनों में साफ दिखाई दे रहा था।

अंतिम संस्कार के दौरान रौशन आनंद ने मीडिया और मौजूद लोगों से बातचीत करते हुए अपने दर्द को खुलकर व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका भाई सिर्फ परिवार का सदस्य नहीं था, बल्कि पूरे परिवार की ताकत और उम्मीद था। उसके जाने से परिवार के जीवन में एक बड़ा खालीपन आ गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। रौशन आनंद बार-बार भावुक होते नजर आए और अपने भाई से जुड़ी यादों को साझा करते हुए कई बार उनकी आंखें भर आईं।

रौशन आनंद ने बताया कि प्रिंस यादव धार्मिक स्वभाव के व्यक्ति थे और आध्यात्मिक जीवन में उनकी गहरी आस्था थी। उन्होंने कहा कि प्रिंस हर मंगलवार व्रत रखते थे और नियमित रूप से पटना के महावीर मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करते थे। उनके अनुसार प्रिंस अपने जीवन में अनुशासन, श्रद्धा और सेवा भावना को बहुत महत्व देते थे। परिवार के लोगों का कहना है कि वह हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते थे और समाज में भी उनकी अलग पहचान थी।

भाई की याद में रौशन आनंद ने एक भावुक घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि अब जब उनका भाई इस दुनिया में नहीं रहा, तो वे स्वयं हर मंगलवार व्रत रखेंगे ताकि भाई की आस्था और परंपरा जीवित रह सके। इसके साथ ही उन्होंने अपने पैतृक गांव में एक मंदिर निर्माण कराने की बात भी कही। उनका कहना था कि यह मंदिर उनके भाई की स्मृति को जीवित रखेगा और उन्हें मानसिक शांति देगा।

रौशन आनंद ने इस दौरान सामाजिक संदेश भी दिया। उन्होंने रक्तदान करने का ऐलान करते हुए कहा कि जीवन बचाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता। उनका मानना है कि यदि किसी की मदद कर किसी की जान बचाई जा सके, तो यह मृतक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस घोषणा को वहां मौजूद लोगों ने सराहा। अंतिम संस्कार के दौरान महिलाओं के बीच साड़ियों का वितरण भी किया गया, जिसे लोगों ने सेवा और संवेदना का प्रतीक माना।

भावुक माहौल के बीच रौशन आनंद ने न्याय की मांग भी जोरदार तरीके से उठाई। उन्होंने बिहार सरकार और न्यायपालिका से निष्पक्ष जांच और न्याय की अपील की। उन्होंने कहा कि उनका परिवार लगातार न्याय की उम्मीद में है और चाहता है कि सच्चाई जल्द सामने आए। रौशन ने कहा कि जो कुछ हुआ, उसने पूरे परिवार को अंदर तक झकझोर दिया है।

उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा महसूस होता है मानो सिस्टम से भरोसा टूटता जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद वे न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना था कि वे किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि उनकी आत्मा न्याय की मांग कर रही है और जब तक सच सामने नहीं आएगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

रौशन आनंद का सबसे चर्चित बयान तब सामने आया जब उन्होंने कथित साजिशकर्ताओं को सीधे संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग यह सोच रहे हैं कि उनका परिवार टूट चुका है, वे कान खोलकर सुन लें। उन्होंने साफ कहा कि वे टूटे नहीं हैं और पहले से ज्यादा मजबूती के साथ उठेंगे। उनका यह बयान समर्थकों के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन गया।

उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष अब केवल व्यक्तिगत नहीं रहा, बल्कि यह न्याय और सच्चाई की लड़ाई बन चुका है। रौशन का कहना था कि यदि किसी ने यह सोचा है कि दबाव या डर से वे चुप हो जाएंगे, तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल होगी। वे हर हाल में न्याय के लिए आवाज उठाते रहेंगे।

दूसरी ओर इस मामले में कानूनी मोर्चे पर भी बड़ी राहत की खबर सामने आई। रौशन आनंद के दो करीबी सहयोगियों अभिषेक और गौरव को अदालत से राहत मिल गई है। दोनों की जमानत याचिका मंजूर कर ली गई है। अदालत के इस फैसले को रौशन पक्ष के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

रौशन आनंद के वकील ने बताया कि कोर्ट ने अभिषेक और गौरव की जमानत मंजूर कर दी है और बिना किसी अतिरिक्त शर्त के राहत प्रदान की गई है। अब जेल से रिहाई और बेल बॉन्ड की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों की रिहाई संभव होगी।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से मामले की आगामी सुनवाई पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष आगे की रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। पूरे मामले पर प्रशासन, कानूनी विशेषज्ञों और आम लोगों की नजर बनी हुई है।

प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार ने एक बार फिर यह दिखाया कि किसी प्रियजन को खोने का दर्द कितना गहरा होता है। रौशन आनंद के आंसुओं में भाई के प्रति प्रेम, पीड़ा और न्याय की उम्मीद साफ झलक रही थी। उनका संदेश स्पष्ट था—दर्द बड़ा है, लेकिन हौसला उससे भी बड़ा है।

अब इस पूरे मामले में आगे क्या मोड़ आता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। पर एक बात साफ है कि रौशन आनंद ने अपने बयान से यह जता दिया है कि उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ। वे न्याय की लड़ाई को अंत तक लड़ने के लिए तैयार हैं और सच्चाई सामने लाने की अपनी कोशिश जारी रखेंगे।

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