
पटना (बिहार): नीट (NEET) परीक्षा में सॉल्वर गैंग से जुड़े मामलों में एक बार फिर बिहार के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पीएमसीएच (PMCH) का नाम सामने आने से हड़कंप मच गया है। मेडिकल परीक्षाओं में हो रहे फर्जीवाड़े को लेकर यह कोई नया मामला नहीं है, इससे पहले भी देश के कई राज्यों की पुलिस जांच के लिए पीएमसीएच पहुंच चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, NEET और अन्य मेडिकल परीक्षाओं में सॉल्वर गैंग की गतिविधियों में कुछ मेडिकल छात्रों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय है और परीक्षा में पास कराने के नाम पर बड़े पैमाने पर लेन-देन होता है।
पहले भी PMCH पर उठते रहे हैं सवाल
इस तरह की जांच के लिए पहले भी मध्य प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और दिल्ली की पुलिस व CID टीमें पीएमसीएच और अन्य मेडिकल कॉलेजों में जांच कर चुकी हैं।
- 2015 में मध्य प्रदेश CID ने व्यापम घोटाले के सिलसिले में बिहार के मेडिकल छात्रों से पूछताछ की थी
- हरियाणा पुलिस भी उसी वर्ष एक छात्र की तलाश में पीएमसीएच पहुंची थी
- तेलंगाना पुलिस ने 2016 में मेडिकल पेपर लीक केस की जांच की थी
- दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 2017 में रेडियोलॉजी विभाग से जुड़े एक PG छात्र को गिरफ्तार किया था
इन मामलों के बाद भी सॉल्वर गैंग की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है।
छात्रों के नाम सामने आने पर चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल छात्रों के ऐसे मामलों में शामिल होना गंभीर चिंता का विषय है। बिहार के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजय कुमार ने कहा कि लालच में आकर कुछ छात्र इस तरह के गिरोहों में फंस जाते हैं और उन पर सख्त कार्रवाई न होने से यह प्रवृत्ति बढ़ रही है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
राजद ने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था में बड़ी मिलीभगत है और सॉल्वर गैंग को कहीं न कहीं संरक्षण मिलता है। वहीं जेडीयू ने कहा कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
प्रशासनिक जांच जारी
जानकारी के अनुसार, इस बार भी कई संदिग्ध छात्रों और अनुपस्थित अभ्यर्थियों की सूची जांच एजेंसियों के पास है। लगभग 47 छात्रों के परीक्षा दिन अनुपस्थित रहने की बात भी सामने आई है, जिससे जांच और गहरी हो गई है।
चिंता का विषय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ परीक्षा फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि भविष्य के डॉक्टरों की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। सरकार और प्रशासन पर अब दबाव है कि वे इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाएं।
फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क का जल्द खुलासा किया जाएगा।


