मुजफ्फरपुर के कैंसर अस्पताल की बड़ी उपलब्धि, कैंसर मरीजों के देखभालकर्ताओं के लिए तैयार हुआ मोबाइल सपोर्ट सिस्टम

बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। मुजफ्फरपुर स्थित होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (HBCH&RC) के शोधकर्ताओं ने कैंसर मरीजों की देखभाल करने वाले परिजनों और केयरगिवर्स के लिए एक अभिनव मोबाइल आधारित सपोर्ट सिस्टम विकसित किया है। इस नई प्रणाली का उद्देश्य कैंसर सर्जरी के बाद मरीजों की घर पर बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना और देखभाल करने वालों पर पड़ने वाले मानसिक एवं शारीरिक दबाव को कम करना है। शोध के शुरुआती नतीजों ने संकेत दिया है कि यह तकनीक न केवल केयरगिवर्स की मदद कर रही है, बल्कि मरीजों की रिकवरी प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी बना रही है।

मुजफ्फरपुर स्थित , जो की इकाई है, ने इस शोध के जरिए कैंसर देखभाल के क्षेत्र में एक नई दिशा देने का प्रयास किया है। यह संस्थान भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत संचालित होता है और देश के पिछड़े क्षेत्रों में कैंसर उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

शोध टीम द्वारा विकसित इस नई प्रणाली को “Cancer Caregiver Support System (CCSS)” नाम दिया गया है। यह एक कम लागत वाला मोबाइल आधारित डिजिटल सपोर्ट मॉडल है, जिसे खास तौर पर उन परिवारों के लिए तैयार किया गया है जो ओरल कैंसर सर्जरी के बाद मरीजों की घर पर देखभाल करते हैं। कैंसर सर्जरी के बाद रिकवरी का एक बड़ा हिस्सा अस्पताल से बाहर घर पर होता है, जहां मरीज के परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर उपचार केवल ऑपरेशन या दवाइयों तक सीमित नहीं होता। ऑपरेशन के बाद मरीजों को पोषण, स्वच्छता, घाव की देखभाल, पुनर्वास और लक्षणों की निगरानी जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अक्सर परिवार के सदस्य बिना पर्याप्त जानकारी के इन जिम्मेदारियों को निभाते हैं, जिससे तनाव और भ्रम की स्थिति पैदा होती है। यही चुनौती इस शोध की प्रेरणा बनी।

इस पायलट अध्ययन के निष्कर्ष इसी महीने में प्रकाशित हुए हैं। अध्ययन में 75 ओरल कैंसर मरीजों और उनके प्राथमिक देखभालकर्ताओं को शामिल किया गया। शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि डिजिटल सपोर्ट सिस्टम के जरिए केयरगिवर्स को बेहतर जानकारी देकर उनकी भूमिका कितनी प्रभावी बनाई जा सकती है।

CCSS के तहत केयरगिवर्स को हिंदी भाषा में तैयार एक डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया गया। इसके साथ एक शैक्षणिक पुस्तिका और मॉडरेटेड व्हाट्सएप सपोर्ट ग्रुप भी दिया गया। इन माध्यमों से देखभालकर्ताओं को पोस्ट-ऑपरेटिव केयर, पोषण, हाइजीन, लक्षण प्रबंधन और रिहैबिलिटेशन से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। यह पहल खास इसलिए भी रही क्योंकि इसमें स्थानीय भाषा और मोबाइल तकनीक दोनों का उपयोग किया गया, जिससे जानकारी समझना आसान हुआ।

शोध के परिणाम काफी उत्साहजनक रहे। अध्ययन में पाया गया कि जिन परिवारों ने CCSS का उपयोग किया, उनमें देखभालकर्ताओं का तनाव और मानसिक बोझ उल्लेखनीय रूप से कम हुआ। इसके अलावा मरीजों को अनियोजित फॉलो-अप विजिट्स के लिए अस्पताल कम जाना पड़ा। इसका मतलब यह है कि केयरगिवर्स घर पर ही अधिक आत्मविश्वास के साथ मरीजों की देखभाल कर पाए।

HBCH&RC मुजफ्फरपुर के हेड एंड नेक सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ डॉ. मेघना कुमार ने कहा कि कैंसर सर्जरी के बाद वास्तविक रिकवरी घर पर होती है, जहां परिवार के सदस्य सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य देखभालकर्ताओं को सरल, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना था ताकि वे बिना घबराहट के मरीज की मदद कर सकें।

अस्पताल के निदेशक डॉ. कुमार प्रभाष ने कहा कि आधुनिक कैंसर उपचार अब मरीज-केंद्रित होने के साथ-साथ परिवार-केंद्रित भी बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि केयरगिवर्स को उचित प्रशिक्षण और जानकारी देने से उपचार की गुणवत्ता, जीवन स्तर और रोग नियंत्रण के परिणाम बेहतर हो सकते हैं। उनके अनुसार CCSS जैसे मॉडल भविष्य के कैंसर केयर सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

शोध टीम के वरिष्ठ सदस्य डॉ. बुरहानुद्दीन कय्यूमी ने कहा कि घर पर उपचार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए देखभालकर्ताओं को सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। सही जानकारी और मार्गदर्शन मिलने पर परिवार मरीज की रिकवरी में कहीं अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

इस शोध में कई विभागों और संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल रहे। टीम में HBCH&RC मुजफ्फरपुर, टाटा मेमोरियल सेंटर, वाराणसी स्थित कैंसर संस्थान तथा नवी मुंबई के विशेषज्ञों ने मिलकर काम किया। यह बहु-विषयक सहयोग इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।

इस अध्ययन को की CK Handoo Scholarship का समर्थन प्राप्त हुआ। शोध के प्रारंभिक निष्कर्ष 24वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ फाउंडेशन फॉर हेड नेक ऑन्कोलॉजी (FHNO 2024) में प्रस्तुत किए गए थे, जहां इसे प्रथम पुरस्कार भी मिला। यह सम्मान इस शोध की उपयोगिता और प्रभाव को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विशाल देश में, जहां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कई बार सीमित होती है, डिजिटल केयरगिवर सपोर्ट सिस्टम गेम चेंजर साबित हो सकता है। भविष्य में इस परियोजना को और विस्तारित करने की योजना है। शोध टीम अब इसकी उपयोगिता बढ़ाने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित व्यक्तिगत सहायता प्रणाली जोड़ने पर काम कर रही है।

2018 में स्थापित HBCH&RC मुजफ्फरपुर पूर्वी भारत के सबसे महत्वपूर्ण कैंसर केंद्रों में गिना जाता है। यह संस्थान 13 करोड़ से अधिक आबादी वाले क्षेत्र की कैंसर देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में इस तरह का नवाचार बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है। यह पहल साबित करती है कि तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय से मरीजों और उनके परिवारों का जीवन बेहतर बनाया जा सकता है।

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